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मेडिकल कॉलेज में अब नहीं मिलेगी ‘तारीख पर तारीख’
अरीश रिज़वी
मेरठ। मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग में मैग्नेटिक रोजेनेंस इमेजिंग (एमआरआई), सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड के लिए अभी तक मरीजों लंबी तारीखें दी जाती थीं। एमआरआई और अल्ट्रासाउंड के लिए तो मरीजों को दो-तीन माह तक इंतजार करना पड़ रहा था। अब इस व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है। अब आप अगर ये जाचें कराने रेडियोलॉजी विभाग में जाएंगे तो आपको तारीख नहीं मिलेगी, बल्कि उसी दिन आपकी जांचें होंगी। अगर कोई रह जाता तो उसकी जांच अगले दिन होगी। यानि पहले आओ, पहले जांच कराओ।
80 फीसदी मरीज नहीं आते थे दोबारा
अभी तक यहां आने वाले हजारों मरीज हर माह बिना जांच कराए ही वापस लौट जाते थे। वह फिर दोबारा जांच कराने भी नहीं आते थे। रेडियोलॉजी विभाग के सीनियर टेक्नीशियन आरआर मिश्रा ने बताया कि पिछले एक साल में करीब 80 प्रतिशत यानि करीब 20 हजार मरीज ऐसे मिले हैं, जिन्हें तारीख दी गई थी और वह फिर जांच कराने यहां नहीं आए। पिछले तीन माह के दौरान जिन मरीजों को तारीख दी गई थी, उन्हें बाद में फोन करके जानकारी की गई तो पता चला कि वह जांच करा चुकेहैं।
पिछले साल मेडिकल में आए नौ लाख 50 हजार से ज्यादा मरीज
पिछले साल ओपीडी में जनवरी से दिसंबर तक 9 लाख 50 हजार 424 मरीज आए थे। इनमें 92 हजार 128 मरीज दिसंबर माह में आए। 12 महीनों में 33 हजार 289 मरीज भर्ती कराए गए।
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मरीजों की सुविधा के लिए उठाया कदम
अभी तक यहां तारीख की व्यवस्था थी, जिसे खत्म कर दिया गया है। मरीजों को जांच में असुविधा न हो, इसलिए यह कदम उठाया गया है। - डॉ. एके तिवारी, प्रोफेसर, विकिरण सुरक्षा अधिकारी
गर्भवती महिलाओं का हर रोज होगा अल्ट्रासाउंड
अभी तक मेडिकल में गर्भवती महिलाओं का दो दिन (मंगलवार और बृहस्पतिवार) अल्ट्रासाउंड होता था, लेकिन अब इस व्यवस्था को भी खत्म कर दिया गया है। अब गर्भवती महिलाओं का भी हर रोज अल्ट्रासाउंड होगा। उन्हें तारीख नहीं दी जाएगी। अगर कोई जांच से वंचित रह जाती है तो उसका अगले दिन नंबर आएगा।
स्टाफ की कमी से जूझ रहा है विभाग
पद जरूरत तैनात
सीनियर रेजिडेंट छह एक
रेडियोग्राफर आठ चार
रूम असिस्टेंट चार तीन
अटेंडेंट चार चार
स्टोर कीपर एक एक
क्या है ये जांचें
एमआरआई: एक ऐसी तकनीक है, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों की सहायता से शरीर के अंगों एवं उनकी कोशिकाओं का स्पष्ट एवं विस्तृत चित्र बनाया जाता है।
अल्ट्रासाउंड: इसमें उच्च आवृत्ति की ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है, इन तरंगों की मदद से शरीर के अंदर की तस्वीरें निकाली जाती हैं। अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी सुरक्षित स्कैन होते हैं।
सीटी स्कैन: यह एक्सरे का एक रूप होता है, जिसे कम्यूटराइज एक्सीयल टोमोग्राफी भी कहा जाता है। यह शरीर के अंगों के चित्र को दिखाता है।
रेडियोलॉजी विभाग का यह है हाल
माह अक्तूबर
जांच संख्या औसत
एमआरआई 117 4.68 प्रतिदिन
सीटी स्कैन 291 11.64 प्रतिदिन
अल्ट्रा साउंड 1734 69.36 प्रतिदिन
माह नवंबर
जांच संख्या औसत
एमआरआई 165 6.6 प्रतिदिन
सीटीस्कैन 293 11.72 प्रतिदिन
अल्ट्रासाउंड 1616 64 प्रतिदिन
माह दिसंबर
जांच संख्या औसत
एमआरआई 166 6.64 प्रतिदिन
सीटी स्कैन 343 13 प्रतिदिन
अल्ट्रासाउंड 2145 85 प्रतिदिन
(रविवार या अन्य छुट्टी की वजह से माह के 25 दिन केहिसाब से औसत लगाया गया है।)
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अरीश रिज़वी
मेरठ। मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग में मैग्नेटिक रोजेनेंस इमेजिंग (एमआरआई), सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड के लिए अभी तक मरीजों लंबी तारीखें दी जाती थीं। एमआरआई और अल्ट्रासाउंड के लिए तो मरीजों को दो-तीन माह तक इंतजार करना पड़ रहा था। अब इस व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है। अब आप अगर ये जाचें कराने रेडियोलॉजी विभाग में जाएंगे तो आपको तारीख नहीं मिलेगी, बल्कि उसी दिन आपकी जांचें होंगी। अगर कोई रह जाता तो उसकी जांच अगले दिन होगी। यानि पहले आओ, पहले जांच कराओ।
80 फीसदी मरीज नहीं आते थे दोबारा
अभी तक यहां आने वाले हजारों मरीज हर माह बिना जांच कराए ही वापस लौट जाते थे। वह फिर दोबारा जांच कराने भी नहीं आते थे। रेडियोलॉजी विभाग के सीनियर टेक्नीशियन आरआर मिश्रा ने बताया कि पिछले एक साल में करीब 80 प्रतिशत यानि करीब 20 हजार मरीज ऐसे मिले हैं, जिन्हें तारीख दी गई थी और वह फिर जांच कराने यहां नहीं आए। पिछले तीन माह के दौरान जिन मरीजों को तारीख दी गई थी, उन्हें बाद में फोन करके जानकारी की गई तो पता चला कि वह जांच करा चुकेहैं।
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पिछले साल मेडिकल में आए नौ लाख 50 हजार से ज्यादा मरीज
पिछले साल ओपीडी में जनवरी से दिसंबर तक 9 लाख 50 हजार 424 मरीज आए थे। इनमें 92 हजार 128 मरीज दिसंबर माह में आए। 12 महीनों में 33 हजार 289 मरीज भर्ती कराए गए।
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मरीजों की सुविधा के लिए उठाया कदम
अभी तक यहां तारीख की व्यवस्था थी, जिसे खत्म कर दिया गया है। मरीजों को जांच में असुविधा न हो, इसलिए यह कदम उठाया गया है। - डॉ. एके तिवारी, प्रोफेसर, विकिरण सुरक्षा अधिकारी
गर्भवती महिलाओं का हर रोज होगा अल्ट्रासाउंड
अभी तक मेडिकल में गर्भवती महिलाओं का दो दिन (मंगलवार और बृहस्पतिवार) अल्ट्रासाउंड होता था, लेकिन अब इस व्यवस्था को भी खत्म कर दिया गया है। अब गर्भवती महिलाओं का भी हर रोज अल्ट्रासाउंड होगा। उन्हें तारीख नहीं दी जाएगी। अगर कोई जांच से वंचित रह जाती है तो उसका अगले दिन नंबर आएगा।
स्टाफ की कमी से जूझ रहा है विभाग
पद जरूरत तैनात
सीनियर रेजिडेंट छह एक
रेडियोग्राफर आठ चार
रूम असिस्टेंट चार तीन
अटेंडेंट चार चार
स्टोर कीपर एक एक
क्या है ये जांचें
एमआरआई: एक ऐसी तकनीक है, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों की सहायता से शरीर के अंगों एवं उनकी कोशिकाओं का स्पष्ट एवं विस्तृत चित्र बनाया जाता है।
अल्ट्रासाउंड: इसमें उच्च आवृत्ति की ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है, इन तरंगों की मदद से शरीर के अंदर की तस्वीरें निकाली जाती हैं। अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी सुरक्षित स्कैन होते हैं।
सीटी स्कैन: यह एक्सरे का एक रूप होता है, जिसे कम्यूटराइज एक्सीयल टोमोग्राफी भी कहा जाता है। यह शरीर के अंगों के चित्र को दिखाता है।
रेडियोलॉजी विभाग का यह है हाल
माह अक्तूबर
जांच संख्या औसत
एमआरआई 117 4.68 प्रतिदिन
सीटी स्कैन 291 11.64 प्रतिदिन
अल्ट्रा साउंड 1734 69.36 प्रतिदिन
माह नवंबर
जांच संख्या औसत
एमआरआई 165 6.6 प्रतिदिन
सीटीस्कैन 293 11.72 प्रतिदिन
अल्ट्रासाउंड 1616 64 प्रतिदिन
माह दिसंबर
जांच संख्या औसत
एमआरआई 166 6.64 प्रतिदिन
सीटी स्कैन 343 13 प्रतिदिन
अल्ट्रासाउंड 2145 85 प्रतिदिन
(रविवार या अन्य छुट्टी की वजह से माह के 25 दिन केहिसाब से औसत लगाया गया है।)