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शहर की सफाई पर भी धन का संकट
Updated Sun, 08 Jul 2018 02:12 AM IST
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निगम के पास धन की कमी, बाधित हो सकती है सफाई
मेरठ। निगम के पास धन की कमी है, ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था बाधित हो सकती है। नगर निगम के खजाने में कूड़ा गाड़ियों के डीजल पर खर्च होने वाली धनराशि भी नहीं है। अगर धन के अभाव में पेट्रोल पंप मालिकों ने डीजल आपूर्ति बंद कर दी तो शहर की कूड़ा गाड़ियों का चक्का जाम हो जाएगा। शहर की सफाई व्यवस्था कभी भी खराब हो सकती है।
प्रतिमाह 25-30 लाख का फुंकता है डीजल
नगर निगम की कूड़ा गाड़ियों के डीजल पर प्रतिमाह 25-30 लाख रुपये का खर्च होता है। पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल का भुगतान करना होता है। नगर निगम में बिल बनकर तैयार हैं, लेकिन धन के अभाव में भुगतान नहीं हो पा रहा है।
निगम बोर्ड फंड से करा चुके कई करोड़ के कार्य
नगर निगम प्रशासन बोर्ड फंड से 20 करोड़ से भी अधिक के कार्य करा चुका है। कुछ कार्यों के कार्य आदेश दिए गए हैं। अधिकतर ठेकेदारों का निगम पर बकाया है। वहीं अधिकारी निगम फंड में धन का अभाव बता रहे हैं।
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ये हैं निगम की आय के साधन
हाउस टैक्स, वाटर टैक्स, होर्डिंग, नगर निगम दुकान एवं अन्य संपत्ति किराया, लाइसेंस फीस आदि।
नहीं हो रही राजस्व वसूली
नगर निगम में राजस्व वस्ली नहीं हो रही है। जबकि नया वित्तीय वर्ष शुरू हुए तीन माह बीत चुके हैं। यही कारण है कि नगर निगम की तिजोरी खाली पड़ी है। अगर नगर निगम तीन माह में नए भवनों पर हाउस टैक्स भी लगाता तो कई करोड़ की आय हो सकती थी। उधर जल मूल्य की भी वसूली नहीं की जा रही है।
शीघ्र सुधर जाएगी व्यवस्था
नगर निगम बोर्ड फंड में धन की कमी है। फिलहाल तो आवश्यक कार्य कराया जाना और ठेकेदारों का भुगतान किया जाना संभव नहीं है। राजस्व वसूली के लिए ऑनलाइन सुविधा शुरू की जा रही है। इसलिए राजस्व की प्राप्ति नहीं हो पाई है। 15 दिन के भीतर ऑनलाइन टैक्स वसूली शुरू हो जाएगी। उसके बाद ही व्यवस्था में सुधार होगा। संतोष शर्मा, एफसी नगर निगम।
टैक्स वसूली करने के दिए निर्देश
राजस्व वसूली के लिए हाउस टैक्स और जलकल विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक चल रही है। शनिवार को भी बैठक ली है। हाउस टैक्स और वाटर टैक्स वसूली तेज करने के निर्देश दे दिए हैं। मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त।
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मेरठ। निगम के पास धन की कमी है, ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था बाधित हो सकती है। नगर निगम के खजाने में कूड़ा गाड़ियों के डीजल पर खर्च होने वाली धनराशि भी नहीं है। अगर धन के अभाव में पेट्रोल पंप मालिकों ने डीजल आपूर्ति बंद कर दी तो शहर की कूड़ा गाड़ियों का चक्का जाम हो जाएगा। शहर की सफाई व्यवस्था कभी भी खराब हो सकती है।
प्रतिमाह 25-30 लाख का फुंकता है डीजल
नगर निगम की कूड़ा गाड़ियों के डीजल पर प्रतिमाह 25-30 लाख रुपये का खर्च होता है। पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल का भुगतान करना होता है। नगर निगम में बिल बनकर तैयार हैं, लेकिन धन के अभाव में भुगतान नहीं हो पा रहा है।
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निगम बोर्ड फंड से करा चुके कई करोड़ के कार्य
नगर निगम प्रशासन बोर्ड फंड से 20 करोड़ से भी अधिक के कार्य करा चुका है। कुछ कार्यों के कार्य आदेश दिए गए हैं। अधिकतर ठेकेदारों का निगम पर बकाया है। वहीं अधिकारी निगम फंड में धन का अभाव बता रहे हैं।
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ये हैं निगम की आय के साधन
हाउस टैक्स, वाटर टैक्स, होर्डिंग, नगर निगम दुकान एवं अन्य संपत्ति किराया, लाइसेंस फीस आदि।
नहीं हो रही राजस्व वसूली
नगर निगम में राजस्व वस्ली नहीं हो रही है। जबकि नया वित्तीय वर्ष शुरू हुए तीन माह बीत चुके हैं। यही कारण है कि नगर निगम की तिजोरी खाली पड़ी है। अगर नगर निगम तीन माह में नए भवनों पर हाउस टैक्स भी लगाता तो कई करोड़ की आय हो सकती थी। उधर जल मूल्य की भी वसूली नहीं की जा रही है।
शीघ्र सुधर जाएगी व्यवस्था
नगर निगम बोर्ड फंड में धन की कमी है। फिलहाल तो आवश्यक कार्य कराया जाना और ठेकेदारों का भुगतान किया जाना संभव नहीं है। राजस्व वसूली के लिए ऑनलाइन सुविधा शुरू की जा रही है। इसलिए राजस्व की प्राप्ति नहीं हो पाई है। 15 दिन के भीतर ऑनलाइन टैक्स वसूली शुरू हो जाएगी। उसके बाद ही व्यवस्था में सुधार होगा। संतोष शर्मा, एफसी नगर निगम।
टैक्स वसूली करने के दिए निर्देश
राजस्व वसूली के लिए हाउस टैक्स और जलकल विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक चल रही है। शनिवार को भी बैठक ली है। हाउस टैक्स और वाटर टैक्स वसूली तेज करने के निर्देश दे दिए हैं। मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त।