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जांच में फंसा रामानुज वैश्य अनाथालय
Updated Tue, 22 May 2018 02:16 AM IST
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जांच में फंसा रामानुज वैश्य अनाथालय प्रबंधन
मेरठ। लाला रामानुज वैश्य अनाथालय के विरुद्ध कई सालों से हो रही शिकायत और जांच के बाद भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब इस मामले में मंडलायुक्त के निर्देश पर हुई जांच में एक बार फिर से फर्जीवाड़ा कर गबन किए जाने की पुष्टि हुई है। ऐसे में अनाथालय प्रबंधन फंस गया है।
सच संस्था के अध्यक्ष डॉ. संदीप पहल ने लाला रामानुज वैश्य अनाथालय प्रबंधन द्वारा गबन की शिकायत मंडलायुक्त से की थी। मंडलायुक्त के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी ने जिला लेखा परीक्षा अधिकारी कार्यालय से ऑडिट करते हुए जांच कराई। इस पर जिला लेखा परीक्षा अधिकारी मनोज कुमार ने 19 मार्च को जो रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को भेजी है, उसमें अनाथालय प्रबंधन फंस गया है।
रिपोर्ट में बताया गया कि अनाथालय का अंतिम ऑडिट वर्ष 2009-10 में किया गया था। इस रिपोर्ट में अनाथालय को 1,54,115 रुपये का अनुदान कपड़ों के लिए और 1,01,690 रुपये भोजन के लिए प्राप्त हुआ था। जबकि 52425 रुपये अन्य व्यवस्था के लिए था। उस ऑडिट रिपोर्ट में तमाम खर्च नियम विरुद्ध करने की बात कही गयी थी। रिपोर्ट में बताया गया कि अब फिर से जांच हुई तो पाया गया कि तमाम सामान फर्जी कोटेशन व मुहर आदि से खरीदा गया है। क्योंकि किसी भी बिल पर फर्म का टिन नंबर या बिल नंबर आदि दर्ज नहीं है।
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इस रिपोर्ट को आधार बनाते हुए डॉ. संदीप पहल ने मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार से अनाथालय प्रबंधन के दोषी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की है।
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मेरठ। लाला रामानुज वैश्य अनाथालय के विरुद्ध कई सालों से हो रही शिकायत और जांच के बाद भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब इस मामले में मंडलायुक्त के निर्देश पर हुई जांच में एक बार फिर से फर्जीवाड़ा कर गबन किए जाने की पुष्टि हुई है। ऐसे में अनाथालय प्रबंधन फंस गया है।
सच संस्था के अध्यक्ष डॉ. संदीप पहल ने लाला रामानुज वैश्य अनाथालय प्रबंधन द्वारा गबन की शिकायत मंडलायुक्त से की थी। मंडलायुक्त के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी ने जिला लेखा परीक्षा अधिकारी कार्यालय से ऑडिट करते हुए जांच कराई। इस पर जिला लेखा परीक्षा अधिकारी मनोज कुमार ने 19 मार्च को जो रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को भेजी है, उसमें अनाथालय प्रबंधन फंस गया है।
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रिपोर्ट में बताया गया कि अनाथालय का अंतिम ऑडिट वर्ष 2009-10 में किया गया था। इस रिपोर्ट में अनाथालय को 1,54,115 रुपये का अनुदान कपड़ों के लिए और 1,01,690 रुपये भोजन के लिए प्राप्त हुआ था। जबकि 52425 रुपये अन्य व्यवस्था के लिए था। उस ऑडिट रिपोर्ट में तमाम खर्च नियम विरुद्ध करने की बात कही गयी थी। रिपोर्ट में बताया गया कि अब फिर से जांच हुई तो पाया गया कि तमाम सामान फर्जी कोटेशन व मुहर आदि से खरीदा गया है। क्योंकि किसी भी बिल पर फर्म का टिन नंबर या बिल नंबर आदि दर्ज नहीं है।
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इस रिपोर्ट को आधार बनाते हुए डॉ. संदीप पहल ने मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार से अनाथालय प्रबंधन के दोषी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की है।