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बदली आबकारी नीति ने पहले ही दिन मनवा दिया ड्राई डे
Updated Mon, 02 Apr 2018 02:28 AM IST
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बदली आबकारी नीति ने पहले ही दिन मनवा दिया ‘ड्राई डे’
मेरठ। बदली आबकारी नीति के तहत शराब की दुकानें तो आवंटित हो गईं, लेकिन व्यवस्था पूरी तरह न बन पाने से शराब के शौकीन परेशान हैं। पिछले चार दिन से जहां अंग्रेजी शराब और बीयर नहीं मिल पा रही है, वहीं शनिवार को 20 रुपये में बिकने वाले देशी शराब के पव्वे रविवार को 100 रुपये में बिके।
नई आबकारी नीति के तहत सिंडिकेट को तोड़ते हुए अब आम आदमी को शराब की दुकानें आवंटित की गई है। लेकिन इन आवंटियों को 10 दिन बाद भी लाइसेंस जारी नहीं हो सका। जबकि नियमानुसार एक अप्रैल की सुबह 10 बजे तक इन सभी आवंटियों को लाइसेंस आवंटित हो जाना चाहिए था। लेकिन आबकारी विभाग की लापरवाही और सुस्ती के चलते रविवार शाम तक फुटकर शराब विक्रेताओं को लाइसेंस जारी हुए।
वहीं दूसरी तरफ अंग्रेजी शराब के थोक विक्रेता के मेरठ में चार लाइसेंस जारी हुए हैं। लेकिन आबकारी विभाग और थोक विक्रेता आपसी समन्वय की कमी से अभी तक कोड नंबर हासिल कर पाए हैं। जिस कारण इनका एकाउंट भी डिस्टलरियों में नहीं खुला है। ऐसे में मेरठ के भीतर अंग्रेजी शराब के एक भी थोक विक्रेता के पास शराब नहीं है। बीयर की स्थिति तो पूरे प्रदेश में ही खराब है, रविवार तक पूरे प्रदेश में कहीं भी बीयर उपलब्ध नहीं हुई।
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रविवार को गाजियाबाद के दो थोक विक्रेताओं, जिन्हें मेरठ में भी बेचने की अनुमति है, उन्होंने रेडिगो खेतान डिस्टलरी में बनने वाली दो तरह की शराब वोदका और व्हीस्की की सप्लाई की। लेकिन यह आपूर्ति भी इतनी कम थी कि मात्र 25-30 दुकान संचालकों को ही 8-10 पेटी के हिसाब से मिल पाईं। थोक विक्रेताओं और फुटकर विक्रेताओं की मानें तो अभी जो स्थिति है, उसके अनुसार आने वाले तीन दिन तक यही स्थिति रहेगी। अहम बात ये है कि नई नीति के तहत शराब की दुकानें आवंटित होने की प्रक्रिया के चलते अंग्रेजी शराब के ठेकों पर पिछले 10 दिन से शराब की कमी चल रही थी, जबकि तीन दिन से अधिकांश दुकानों पर ताले लटके थे। इससे एक तरफ जहां शराब के शौकीन लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है, वहीं जिन लोगों ने 30 से 70 लाख रुपये शुल्क देकर दुकानें ली हैं, उनको भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पव्वा बिका 100 रुपये का
देशी शराब के थोक विक्रेताओं के पास भी माल नहीं आया है। ऐसे में रविवार को देशी शराब के अधिकांश ठेके बंद रहे, लेकिन जो खुले उन पर 65 रुपये का पव्वा 100 रुपये का बिका। देशी शराब की दुकानों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि शनिवार रात कुछ सेल्समैनों ने स्टॉक अपने आप खरीदकर रोक लिया था। जिसे रविवार को 100 रुपये प्रति पव्वा के हिसाब से बेचा।
फुटकर दुकानदारों को लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं। बीयर तो पूरे उत्तर प्रदेश में ही कहीं नहीं मिल पाई। अंग्रेजी शराब के थोक विक्रेता अंतिम दिनों में बैंक की व्यस्तता के कारण अपना खाता नहीं खुलवा पाए हैं। जिस कारण व्यवस्था बिगड़ी है। लेकिन एक दो दिन में यह सुधर जाएगी और माल आकर दुकानों तक पहुंच जाएगा। एसपी सिंह, जिला आबकारी अधिकारी
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मेरठ। बदली आबकारी नीति के तहत शराब की दुकानें तो आवंटित हो गईं, लेकिन व्यवस्था पूरी तरह न बन पाने से शराब के शौकीन परेशान हैं। पिछले चार दिन से जहां अंग्रेजी शराब और बीयर नहीं मिल पा रही है, वहीं शनिवार को 20 रुपये में बिकने वाले देशी शराब के पव्वे रविवार को 100 रुपये में बिके।
नई आबकारी नीति के तहत सिंडिकेट को तोड़ते हुए अब आम आदमी को शराब की दुकानें आवंटित की गई है। लेकिन इन आवंटियों को 10 दिन बाद भी लाइसेंस जारी नहीं हो सका। जबकि नियमानुसार एक अप्रैल की सुबह 10 बजे तक इन सभी आवंटियों को लाइसेंस आवंटित हो जाना चाहिए था। लेकिन आबकारी विभाग की लापरवाही और सुस्ती के चलते रविवार शाम तक फुटकर शराब विक्रेताओं को लाइसेंस जारी हुए।
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वहीं दूसरी तरफ अंग्रेजी शराब के थोक विक्रेता के मेरठ में चार लाइसेंस जारी हुए हैं। लेकिन आबकारी विभाग और थोक विक्रेता आपसी समन्वय की कमी से अभी तक कोड नंबर हासिल कर पाए हैं। जिस कारण इनका एकाउंट भी डिस्टलरियों में नहीं खुला है। ऐसे में मेरठ के भीतर अंग्रेजी शराब के एक भी थोक विक्रेता के पास शराब नहीं है। बीयर की स्थिति तो पूरे प्रदेश में ही खराब है, रविवार तक पूरे प्रदेश में कहीं भी बीयर उपलब्ध नहीं हुई।
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रविवार को गाजियाबाद के दो थोक विक्रेताओं, जिन्हें मेरठ में भी बेचने की अनुमति है, उन्होंने रेडिगो खेतान डिस्टलरी में बनने वाली दो तरह की शराब वोदका और व्हीस्की की सप्लाई की। लेकिन यह आपूर्ति भी इतनी कम थी कि मात्र 25-30 दुकान संचालकों को ही 8-10 पेटी के हिसाब से मिल पाईं। थोक विक्रेताओं और फुटकर विक्रेताओं की मानें तो अभी जो स्थिति है, उसके अनुसार आने वाले तीन दिन तक यही स्थिति रहेगी। अहम बात ये है कि नई नीति के तहत शराब की दुकानें आवंटित होने की प्रक्रिया के चलते अंग्रेजी शराब के ठेकों पर पिछले 10 दिन से शराब की कमी चल रही थी, जबकि तीन दिन से अधिकांश दुकानों पर ताले लटके थे। इससे एक तरफ जहां शराब के शौकीन लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है, वहीं जिन लोगों ने 30 से 70 लाख रुपये शुल्क देकर दुकानें ली हैं, उनको भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पव्वा बिका 100 रुपये का
देशी शराब के थोक विक्रेताओं के पास भी माल नहीं आया है। ऐसे में रविवार को देशी शराब के अधिकांश ठेके बंद रहे, लेकिन जो खुले उन पर 65 रुपये का पव्वा 100 रुपये का बिका। देशी शराब की दुकानों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि शनिवार रात कुछ सेल्समैनों ने स्टॉक अपने आप खरीदकर रोक लिया था। जिसे रविवार को 100 रुपये प्रति पव्वा के हिसाब से बेचा।
फुटकर दुकानदारों को लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं। बीयर तो पूरे उत्तर प्रदेश में ही कहीं नहीं मिल पाई। अंग्रेजी शराब के थोक विक्रेता अंतिम दिनों में बैंक की व्यस्तता के कारण अपना खाता नहीं खुलवा पाए हैं। जिस कारण व्यवस्था बिगड़ी है। लेकिन एक दो दिन में यह सुधर जाएगी और माल आकर दुकानों तक पहुंच जाएगा। एसपी सिंह, जिला आबकारी अधिकारी