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सरकारी अस्पतालों का हाल- बेहाल, हाथों पर मरीज
Updated Thu, 16 Nov 2017 02:58 AM IST
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मेरठ। दर्द से कराह रहे मरीज को तीमारदार स्ट्रेचर न मिलने के कारण गोद में उठाकर ले जा रहे हैं। ओपीडी परिसर में एक मरीज अचानक गिर गया, लेकिन पास से गुजर रहे स्टाफ ने न उस पर कोई ध्यान नहीं दिया। यह हाल जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज का है। बुधवार को अमर उजाला की टीम दोनों स्थानों पर पहुंची तो मरीज सुविधाएं न मिलने पर परेशान दिखे।
बुधवार को मेडिकल कॉलेज में एक तीमारदार, बुजुर्ग का इलाज कराने आया था। इलाज के बाद बुजुर्ग को बाहर तक ले जाने के लिए उसे न तो स्ट्रेचर मिला और न ही स्टाफ का सदस्य दिखाई दिया। मजबूरन तीमारदार बुजुर्ग को गोद में उठाकर मुख्यद्वार के पास तक लेकर आया और उन्हें ई-रिक्शा में बैठाया। वहीं जिला अस्पताल में एक तीमारदार स्ट्रेचर न मिलने पर मरीज को ओपीडी परिसर के पास खड़ा कर पर्चा बनवाने चला गया। कुछ देर बाद मरीज अचानक गिर पड़ा। इस दौरान स्टाफ के सदस्य वहां से गुजरते रहे, लेकिन किसी ने भी मरीज की सुध नहीं ली। तीमारदार ने ही उसे उठाया और डॉक्टर के पास लेकर गया। इसके अलावा एक महिला मरीज के ड्रिप लगी हुई थी और तीमारदार उसे पकड़कर ले जा रहे थे। दोनों ही अस्पतालों में ऐसे मरीजों की काफी तादाद रही जिन्हें स्ट्रेचर न मिलने पर तीमारदार मजबूरन गोद, ठेले, रिक्शा में ले जा रहे थे।
आए दिन होता है हंगामा
यही वजह है कि यहां अक्सर हंगामे होते रहते हैं। इस संबंध में मेडिकल अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी और जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. पीके बंसल का कहना है कि उनकी कोशिश रहती है कि मरीजों को बेहतर इलाज मिले। कई बार जल्दबाजी में तीमारदार मरीजों को बिना स्ट्रेचर केही ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल में हर रोज 3000 से ज्यादा की ओपीडी रहती है, जबकि जिला अस्पताल की ओपीडी में 1800 से 2000 मरीज आते हैं।
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बुधवार को मेडिकल कॉलेज में एक तीमारदार, बुजुर्ग का इलाज कराने आया था। इलाज के बाद बुजुर्ग को बाहर तक ले जाने के लिए उसे न तो स्ट्रेचर मिला और न ही स्टाफ का सदस्य दिखाई दिया। मजबूरन तीमारदार बुजुर्ग को गोद में उठाकर मुख्यद्वार के पास तक लेकर आया और उन्हें ई-रिक्शा में बैठाया। वहीं जिला अस्पताल में एक तीमारदार स्ट्रेचर न मिलने पर मरीज को ओपीडी परिसर के पास खड़ा कर पर्चा बनवाने चला गया। कुछ देर बाद मरीज अचानक गिर पड़ा। इस दौरान स्टाफ के सदस्य वहां से गुजरते रहे, लेकिन किसी ने भी मरीज की सुध नहीं ली। तीमारदार ने ही उसे उठाया और डॉक्टर के पास लेकर गया। इसके अलावा एक महिला मरीज के ड्रिप लगी हुई थी और तीमारदार उसे पकड़कर ले जा रहे थे। दोनों ही अस्पतालों में ऐसे मरीजों की काफी तादाद रही जिन्हें स्ट्रेचर न मिलने पर तीमारदार मजबूरन गोद, ठेले, रिक्शा में ले जा रहे थे।
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आए दिन होता है हंगामा
यही वजह है कि यहां अक्सर हंगामे होते रहते हैं। इस संबंध में मेडिकल अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी और जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. पीके बंसल का कहना है कि उनकी कोशिश रहती है कि मरीजों को बेहतर इलाज मिले। कई बार जल्दबाजी में तीमारदार मरीजों को बिना स्ट्रेचर केही ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल में हर रोज 3000 से ज्यादा की ओपीडी रहती है, जबकि जिला अस्पताल की ओपीडी में 1800 से 2000 मरीज आते हैं।
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