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Meerut News: 29 प्रतिष्ठानों पर काम करते मिले 40 किशोर
Mon, 08 Dec 2025 07:45 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Mon, 08 Dec 2025 07:45 PM IST
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श्रम विभाग ने दुकानदारों और सेवायोजकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा
श्रम विभाग, सामाजिक संगठन और एएचटीयू की टीम ने किया निरीक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। डीएम द्वारा गठित श्रम विभाग की टीम ने सोमवार को अभियान चलाकर प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इसमें 29 दुकानों पर काम कर रहे 40 किशोरों को चिंह्ति किया गया। टीम ने इनसे काम करा रहे सेवायोजकों को नोटिस जारी किए। टीम में श्रम प्रर्वतन अधिकारी सुधीर कुमार, सुधा तोमर, नीलम, रघुवर यादव और जनहित फाउडेंशन और एएचटीयू के अधिकारी शामिल रहे।
टीम ने हापुड़ रोड़, खराखौदा क्षेत्र, करीमनगर, अहमद नगर, करीमनगर, अब्दुल्लापुर, किदवई नगर, मोहिउद्दीन पुर के 29 प्रतिष्ठानों में 40 बाल किशोर श्रमिकों को अवमुक्त कराया गया। सेवायोजकों को नोटिस देकर जवाब मांगा है। उपश्रमायुक्त राजेश मिश्रा ने बताया कि बाल एवं श्रम कानून अधिनियम 1986 की धारा 3 (1) और 3 (ए) का उल्लंघन करने पर नियोजक को 6 माह से 2 वर्ष तक कारावास की सजा और 20 हजार से 50 हजार अर्थदंड का प्रावधान है। उप श्रमायुक्त राजेश मिश्रा ने सभी से अपील की प्रतिष्ठानों में बाल श्रमिकों का नियोजन वर्जित है।
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श्रम विभाग, सामाजिक संगठन और एएचटीयू की टीम ने किया निरीक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। डीएम द्वारा गठित श्रम विभाग की टीम ने सोमवार को अभियान चलाकर प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इसमें 29 दुकानों पर काम कर रहे 40 किशोरों को चिंह्ति किया गया। टीम ने इनसे काम करा रहे सेवायोजकों को नोटिस जारी किए। टीम में श्रम प्रर्वतन अधिकारी सुधीर कुमार, सुधा तोमर, नीलम, रघुवर यादव और जनहित फाउडेंशन और एएचटीयू के अधिकारी शामिल रहे।
टीम ने हापुड़ रोड़, खराखौदा क्षेत्र, करीमनगर, अहमद नगर, करीमनगर, अब्दुल्लापुर, किदवई नगर, मोहिउद्दीन पुर के 29 प्रतिष्ठानों में 40 बाल किशोर श्रमिकों को अवमुक्त कराया गया। सेवायोजकों को नोटिस देकर जवाब मांगा है। उपश्रमायुक्त राजेश मिश्रा ने बताया कि बाल एवं श्रम कानून अधिनियम 1986 की धारा 3 (1) और 3 (ए) का उल्लंघन करने पर नियोजक को 6 माह से 2 वर्ष तक कारावास की सजा और 20 हजार से 50 हजार अर्थदंड का प्रावधान है। उप श्रमायुक्त राजेश मिश्रा ने सभी से अपील की प्रतिष्ठानों में बाल श्रमिकों का नियोजन वर्जित है।
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