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शहर में 40 बड़े अवैध निर्माणों पर एमडीए की नजर, होगी बड़ी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 03 Dec 2016 01:59 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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शहर में हुए 40 बड़े निर्माणों पर मेरठ विकास प्राधिकरण की नजर टिक गई है। इन भूखंडों का अधिग्रहण करने के बाद भी एमडीए कब्जा हासिल नहीं कर पाया है। इनमें से अधिकांश भूखंडों पर विशाल इमारतें बन चुकी हैं। कई भूखंडों पर अस्थायी रूप से अतिक्रमण किया गया है। एमडीए अधिकारियों ने इन मामलों में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। जोन ए में मुख्य रूप से यह प्लान तैयार किया गया है।
मेरठ विकास प्राधिकरण इन दिनों ध्वस्तीकरण कर रहा है। पुलिस और प्रशासन भी इसमें सहयोग कर रहा है। इसी कारण सप्ताहवार कार्रवाई की जा रही है। दरअसल एनएच 58 पर गलत तरीके से व्यवसायिक निर्माण अधिक किए जा रहे हैं। बिल्डर ग्रीन बेल्ट में मार्केट बना रहे हैं। ग्रीन बेल्ट में हुए निर्माण को शमन शुल्क वसूलकर भी समायोजित नहीं किया जाता है। ध्वस्तीकरण ही एकमात्र उसका विकल्प है। एमडीए ने इस जोन का पूरा प्लान तैयार किया है। इस जोन में वेद व्यासपुरी और शताब्दी नगर दो बड़ी योजनाएं हैं। यहां बडे़ पैमाने पर अवैध निर्माण हो रहा है। एमडीए की ओर से मुआवजा दिए जा चुकी जमीन पर इमारतें बन गई हैं। ऐसे कई मामले हाईकोर्ट में लंबित थे। इनमें फैसला एमडीए के हक में आया है। अब एमडीए ऐसे सभी भूखंडों पर कब्जा लेने की तैयारी में है।
तहसीलदार और लेखपाल भी जुटे
एमडीए शताब्दी नगर और वेदव्यासपुरी के 40 ऐसे प्रकरणों में कार्रवाई करने की तैयारी में है। ऐसे मामलों की कुंडली खंगाली जा रही है। देखा जा रहा है कि कब और क्या कार्रवाई की गई। इसके लिए एमडीए ने अलग से अपनी टीम लगाई है। उधर, राजस्व अभिलेख भी खंगाले जा रहे हैं। तहसीलदार और लेखपाल इस काम में जुटे हैं।
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एसएलओ टीम भी एमडीए में
एमडीए ने इन जमीनों पर कब कितना मुआवजा जारी किया, इसकी जांच के लिए विशेष भू अध्याप्ति (एसएलओ) कार्यालय के कर्मचारियों की टीम भी एमडीए में जमी है। दोनों विभाग अपने-अपने दस्तावेज से मिलान कर रहे हैं ताकि कागजी कार्रवाई मजबूती से की जा सके। माना जा रहा है कि इसी पखवाड़े में एमडीए टीम बड़ा एक्शन लेगी।
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मेरठ विकास प्राधिकरण इन दिनों ध्वस्तीकरण कर रहा है। पुलिस और प्रशासन भी इसमें सहयोग कर रहा है। इसी कारण सप्ताहवार कार्रवाई की जा रही है। दरअसल एनएच 58 पर गलत तरीके से व्यवसायिक निर्माण अधिक किए जा रहे हैं। बिल्डर ग्रीन बेल्ट में मार्केट बना रहे हैं। ग्रीन बेल्ट में हुए निर्माण को शमन शुल्क वसूलकर भी समायोजित नहीं किया जाता है। ध्वस्तीकरण ही एकमात्र उसका विकल्प है। एमडीए ने इस जोन का पूरा प्लान तैयार किया है। इस जोन में वेद व्यासपुरी और शताब्दी नगर दो बड़ी योजनाएं हैं। यहां बडे़ पैमाने पर अवैध निर्माण हो रहा है। एमडीए की ओर से मुआवजा दिए जा चुकी जमीन पर इमारतें बन गई हैं। ऐसे कई मामले हाईकोर्ट में लंबित थे। इनमें फैसला एमडीए के हक में आया है। अब एमडीए ऐसे सभी भूखंडों पर कब्जा लेने की तैयारी में है।
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तहसीलदार और लेखपाल भी जुटे
एमडीए शताब्दी नगर और वेदव्यासपुरी के 40 ऐसे प्रकरणों में कार्रवाई करने की तैयारी में है। ऐसे मामलों की कुंडली खंगाली जा रही है। देखा जा रहा है कि कब और क्या कार्रवाई की गई। इसके लिए एमडीए ने अलग से अपनी टीम लगाई है। उधर, राजस्व अभिलेख भी खंगाले जा रहे हैं। तहसीलदार और लेखपाल इस काम में जुटे हैं।
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एसएलओ टीम भी एमडीए में
एमडीए ने इन जमीनों पर कब कितना मुआवजा जारी किया, इसकी जांच के लिए विशेष भू अध्याप्ति (एसएलओ) कार्यालय के कर्मचारियों की टीम भी एमडीए में जमी है। दोनों विभाग अपने-अपने दस्तावेज से मिलान कर रहे हैं ताकि कागजी कार्रवाई मजबूती से की जा सके। माना जा रहा है कि इसी पखवाड़े में एमडीए टीम बड़ा एक्शन लेगी।