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35 मिनट के संबोधन में भागवत दे गए भविष्य का संकेत  

Mon, 26 Feb 2018 11:31 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Mon, 26 Feb 2018 11:31 AM IST
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35 minute ke sambodhan mr bhaagvat de gaye bhavishye ke sanket
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

संघ के हिंदुत्व का एजेंडा अब विस्तार ले चुका है। लेकिन इस हिंदुत्व के एजेंडे में सबसे पहले जातीय विद्वेष की बढ़ती खाई के साथ भाषा, क्षेत्र और पूजा पद्धति को लेकर हो रहे संघर्ष को दूर कर उसे पाटना है। सरसंघ चालक अपने 35 मिनट के संबोधन में यही संदेश देते नजर आए।

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डॉ. मोहनराव भागवत का संबोधन पूरी तरह आपसी भेदभाव मिटाने पर केंद्रित रहा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ते जातीय संघर्ष को देखते हुए बनायी गयी रणनीति के मद्देनजर जिस सोच के साथ राष्ट्रोदय का आयोजन मेरठ प्रांत में किया गया था। सर संघ चालक के संबोधन में वह एजेंडा साफ नजर आया। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए विपक्षियों से भी सतर्क रहने को कहा। डॉ. भागवत ने कहा कि विघटनकारी ताकते हमें एक होते नहीं देखना चाहती हैं, क्योंकि हम एक हुए तो उनका हित सिद्ध नहीं होगा। 
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उन्होंने देश की विविधता में पैदा हो रही दूरियों को पाटने का संदेश देते हुए कहा कि विविधता हमारी ताकत है। क्योंकि जिन देशों ने अपनी एक भाषा और एक पूजा पद्धति को अपनाया, वह आगे नहीं बढ़ सके। जबकि हमारा देश आज भी आठ हजार साल पुराने राम जैसे राजा और उनके परिवार की संस्कृति को अपनाए हुए है। 
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डॉ. भागवत ने हिंदुत्व का एजेंडा भी प्रमुखता से रखा। लेकिन इस हिंदुत्व में उन्होंने धार्मिक भावनाओं को बिल्कुल दरकिनार कर उसे राष्ट्रीयता और संस्कृति जोड़ने की कोशिश की। साफ कहा कि हम हिंदू है और यह गर्व की बात है। ऐसे में साफ हो गया कि संघ अपने हिंदुत्व के एजेंडे पर कायम है। लेकिन अब उसे दलित, अति पिछड़ा, बौद्ध, जैन आदि धर्माें तक ले जाना चाहता है। इसके साथ ही उन्होंने निडर और बलशाली होने का भी अप्रत्यक्ष रुप से संदेश दिया। इसके लिए कई किस्से कहानी सुनाते हुए स्पष्ट कहा कि कमजोर को देवताओं ने भी सम्मान नहीं दिया। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वह अपनी शक्ति पहचानें और राष्ट्र निर्माण की तरफ निडर होकर आगे बढ़ें। 


राम कथा से कर गए मोदी की तारीफ 
डॉ. मोहन राव भागवत ने अपने संबोधन में किसी राजनैतिक पार्टी, नेता, धर्म या समुदाय का नाम नहीं लिया। लेकिन रामायण के कुछ कथानकों के माध्यम से वह अप्रत्यक्ष रुप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी कर गए। उन्होंने कहा कि हमारे यहां उन राजाओं की कहानी सुनायी जाती है जो अपने माता-पिता के कहने पर राजपाट छोड़कर वनवास को चले जाते हैं। राजा वह अच्छा होता है जो प्रजा की सेवा के लिए अपनी पत्नी और भाई आदि का भी त्याग कर दे। क्योंकि राजा बनने के बाद उसका पहला कर्तव्य अपनी प्रजा के लिए बन जाता है।

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