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रेरा कानून को लेकर आवास विकास अधिकारियों को प्रशिक्षण् ा
Updated Sat, 24 Mar 2018 02:31 AM IST
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आवास विकास अफसरों को दिया रेरा का प्रशिक्षण
-गाजियाबाद, मेरठ और सहारनपुर के आवास विकास अधिकारियों रहे मौजूद
-प्राइवेट बिल्डरों के साथ परिषद को भी रेरा के नियमों को करना होगा पालन
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
आवास एवं विकास परिषद् द्वारा विकसित नवीन कालोनियों को रेरा (रियल इस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी) के दायरे में रखा गया है। इसको लेकर गाजियाबाद में आवास-विकास अधिकारियों को दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। यहां गाजियाबाद, मेरठ और सहारनपुर के आवास अधिकारियों को लखनऊ से आये अधिकारियों ने रेरा कानून के नियमों को बारीकी से समझाया।
लखनऊ से आए चीफ मैनेजमेंट रिप्रजेंटेटिव राजेश मेहतानी ने बताया कि एक मई 2017 को लागू हुए रेरा कानून प्राइवेट बिल्डरों की मनमानी रोकने के लिए लागू किया गया था। लेकिन आवास-विकास परिषद् की नई योजनाएं भी रेरा के दायरे में रखी गई हैं। परिषद द्वारा विकसित सभी नवीन योजनाओं का रेरा में पंजीकरण कराया गया है। जो आगे भी जारी रहेगा। प्राइवेट बिल्डरों के साथ परिषदीय अधिकारियों को रेरा के नियमों को पालन करना होगा। इसमें आवंटियों को परिषद द्वारा तय समय सीमा के मुताबिक फ्लैट या आवास पर कब्जा देना होगा। ऐसा नहीं करने पर आवंटी परिषद की शिकायत रेरा में कर सकता है। शिकायत होने पर परिषद को ग्राहकों का पैसा लौटाने के साथ पेनल्टी भी देनी होगी। इसमें अधिकारियों को दोषी माना जाएगा। उन्होंने कहा कि रेरा कानून को देखते हुए अधिकारियों को वर्तमान में लंबित पड़े कार्यों और योजनाओं पर ध्यान देना होगा। जिसमें फ्लैट योजना भी शामिल है। अधीक्षण अभियंता एसपीएन सिंह ने बताया सभी अधिशासी अभियंताओं ने अपने-अपने प्रोजेक्ट का रेरा में पंजीकरण कराया है। इसको लेकर प्रशिक्षण भी दिया गया है। आवंटियों को समय से कब्जा देने के लिए रेरा के नियमों का पालन करना होगा।
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-गाजियाबाद, मेरठ और सहारनपुर के आवास विकास अधिकारियों रहे मौजूद
-प्राइवेट बिल्डरों के साथ परिषद को भी रेरा के नियमों को करना होगा पालन
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
आवास एवं विकास परिषद् द्वारा विकसित नवीन कालोनियों को रेरा (रियल इस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी) के दायरे में रखा गया है। इसको लेकर गाजियाबाद में आवास-विकास अधिकारियों को दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। यहां गाजियाबाद, मेरठ और सहारनपुर के आवास अधिकारियों को लखनऊ से आये अधिकारियों ने रेरा कानून के नियमों को बारीकी से समझाया।
लखनऊ से आए चीफ मैनेजमेंट रिप्रजेंटेटिव राजेश मेहतानी ने बताया कि एक मई 2017 को लागू हुए रेरा कानून प्राइवेट बिल्डरों की मनमानी रोकने के लिए लागू किया गया था। लेकिन आवास-विकास परिषद् की नई योजनाएं भी रेरा के दायरे में रखी गई हैं। परिषद द्वारा विकसित सभी नवीन योजनाओं का रेरा में पंजीकरण कराया गया है। जो आगे भी जारी रहेगा। प्राइवेट बिल्डरों के साथ परिषदीय अधिकारियों को रेरा के नियमों को पालन करना होगा। इसमें आवंटियों को परिषद द्वारा तय समय सीमा के मुताबिक फ्लैट या आवास पर कब्जा देना होगा। ऐसा नहीं करने पर आवंटी परिषद की शिकायत रेरा में कर सकता है। शिकायत होने पर परिषद को ग्राहकों का पैसा लौटाने के साथ पेनल्टी भी देनी होगी। इसमें अधिकारियों को दोषी माना जाएगा। उन्होंने कहा कि रेरा कानून को देखते हुए अधिकारियों को वर्तमान में लंबित पड़े कार्यों और योजनाओं पर ध्यान देना होगा। जिसमें फ्लैट योजना भी शामिल है। अधीक्षण अभियंता एसपीएन सिंह ने बताया सभी अधिशासी अभियंताओं ने अपने-अपने प्रोजेक्ट का रेरा में पंजीकरण कराया है। इसको लेकर प्रशिक्षण भी दिया गया है। आवंटियों को समय से कब्जा देने के लिए रेरा के नियमों का पालन करना होगा।
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