फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   जीवन की जगह मौत बांट रहा जल

जीवन की जगह मौत बांट रहा जल

Tue, 06 Mar 2018 02:24 AM IST
Updated Tue, 06 Mar 2018 02:24 AM IST
विज्ञापन
जीवन की जगह मौत बांट रहा जल
जीवन की जगह मौत बांट रहा जल
विज्ञापन

मेरठ। जिले के दर्जनभर से ज्यादा गांवों में भूगर्भ जल इतना प्रदूषित हो चुका है कि यह लोगों को जीवन देने की जगह तरह-तरह की गंभीर बीमारियां बांट रहा है। जनपद के गांव रहदरा, सठला, अगवानपुर, रामनगर, कस्तला शमशेर नगर, बहलोलपुर और छबड़िया वो गांव हैं, जहां कैंसर की काली छाया है। वहीं काली नदी के आस-पास बसे देदुआ, धंज्जू, कौल, आड़, कुढला, जलालपुर, अतराड़ा, गोकलपुर, छिलौरा आदि में पानी का प्रदूषण पेट और चर्म रोगों को बांट रहा है।
ये है रिपोर्ट का सार
नीर फाउंडेशन के निदेशक रमन त्यागी ने बताया कि कुछ माह पूर्व उन्होंने प्रदूषित जल के नमूनों की जांच कराने के साथ ही इसका गहन अध्ययन किया। इसमें पता चला कि प्रदूषित जल में आर्सेनिक और लेड जैसे खतरनाक रसायनों की मात्रा बहुत अधिक मिली है। इनमें क्रोमियम और कैडमियम भी पाए गए। इसके अलावा पेस्टीसाइड का स्तर भी खतरनाक मात्रा तक मिला। रमन त्यागी के अनुसार कुछ गांव जहां पर कच्चे गड्ढे के शौचालय बना दिये जाते हैं और वहां का जल स्तर ऊपर है। ऐसे गांवों के पेयजल के कुछ नमूनों में मल के अपशिष्ट भी पाए गए।
विज्ञापन

जल का दोहन और लापरवाही बना कारण
लघु सिंचाई और भूगर्भ जल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जनपद में जल का दोहन तेजी से हो रहा है। इसके रिचार्ज का कोई प्राकृतिक साधन नहीं है। ऐसे में खेती में प्रयुक्त होने वाले रसायन, औद्योगिक इकाईयों का प्रदूषित पानी, गांवों में बने शुष्क शौचालय तथा तालाबों पर हो रहे अवैध कब्जों के कारण भूगर्भ जल में प्रदूषण की मात्रा बढ़ रही है। पहले जो रजवाहे कच्चे हुआ करते थे, अब उन्हें भी कई जगह पक्का कर दिए जाने से वाटर रिचार्ज नहीं हो पा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पांच सौ गांव अभी भी वंचित
जल निगम द्वारा गांवों में नलकूप लगाकर वाटर टैंक बनाने की योजना है। लेकिन पिछले आठ सालों में योजना के तहत जनपद में 459 ग्राम पंचायतों (जिसमें करीब छह सौ गांव हैं) में से सिर्फ 102 गांव का इसके लिए चयन हुआ है। चयनित गांवों में से अभी तक सिर्फ 97 गांवों में नलकूप लगाकर ओवरहैड टैंक से पेयजल आपूर्ति शुरू की गई है। इसमें भी फिलहाल सात गांवों के नलकूप बंद पड़े हैं। इन गांवों के चयन में भी पक्षपात किया गया है। क्योंकि जिन गांवों में जल प्रदूषण सबसे ज्यादा है, उन गांवों का इस योजना में अभी तक चयन नहीं हुआ है।

वर्जन..........
आज जल संरक्षण और संवर्धन की बहुत जरूरत है। अत्यधिक दोहन ने ही शुद्ध पेयजल समस्या खड़ी की है। इसके साथ ही औद्योगिक इकाइयों और तालाबों के कब्जों ने यह संकट खड़ा किया है। जब तक सरकार इस पर विशेष प्रोजेक्ट तैयार नहीं करेगी। इस समस्या से मुक्ति नहीं मिल सकती है।
रमन त्यागी, निदेशक नीर फाउंडेशन

यह सही है कि कैंसर के रोगी बढ़ते जा रहे है। इसका एक बड़ा कारण प्रदूषित जल है। क्योंकि पानी की जांच में कई जगह खतरनाक रसायन मिले है।
डा. उमंग मित्थल, कैंसर रोग विशेषज्ञ

खास बातें:
जिले के एक दर्जन से ज्यादा गांवों के भूभर्ग जल में बढ़ा प्रदूषण का स्तर
चर्म रोग, पेट से जुड़ी बीमारियों के साथ कैंसर तक का शिकार हो रहे लोग
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed