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‘कुर्बानी इबादत है, इसमें किसी को न हो परेशानी’
Updated Fri, 01 Sep 2017 01:56 AM IST
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मेरठ। कल बकरा ईद के त्योहार पर शहर काजी जैनुस साजिद्दीन ने मुस्लिम वर्ग के लोगों से खास अपील की है। कहा कि कुर्बानी अल्लाह की राह में की जाने वाली इबादत है। इबादत के दौरान किसी भी धर्म और वर्ग के लोगों को त्योहार पर कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। कुर्बानी के दौरान साफ-सफाई रखने में सभी उम्र के लोग विशेष ध्यान दें। जानवरों के अवशेषों को खुले में छोड़ें। नगर निगम की टीम को अवशेषों को देकर ही बाहर जाएं। त्योहार के दिन युवा वर्ग बाइक या गाड़ियों को शहर में न दौड़ाएं। उन्हाेेंने शहर के माहौल में शांति बरकरार रखने के लिए युवाओं से अपील की है।
कुर्बानी का तरीका और किन लोगों पर फर्ज
शहर जमियत उलमा से क़ारी सलमान ने बताया कि जिन लोगों पर साढे़ सात तौला सोना या साढे़ 52 तौला चांदी है या इनके बराबर रकम मौजूद है। उन पर कुर्बानी वाजिब हो जाती है।
ईदुल-अज़हा की नमाज के बाद ही कुर्बानी की जाती है। इससे पहले कोई कुर्बानी कर देता है तो वो कुर्बानी नही मानी जायेगी। चांद की 10, 11 और 12 तारीख के साथ तीन दिन तक बकरा ईद का त्योहार मनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सभी जानवरों की उम्र के हिसाब से कुर्बानी की जाती है। जिसमें बकरा कम से कम एक साल, भैंसा दो साल, ऊंट की पांच साल की उम्र में कुर्बानी की की जा सकती है। कुर्बानी के गोश्त में तीन हिस्से करने चाहिए। जिसमें एक खुद के लिए, दूसरा पड़ोस-रिश्तेदारों और तीसरा गरीब लोगों को जरूर देना चाहिए।
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खास बात:
- ईदुल-अज़हा पर शहर काजी ने की साफ-सफाई की अपील
- मुस्लिम वर्ग के लोगों से खुले में कुर्बानी न करने को कहा
- कहा कि अवशेषों को खुले में रखने से करें परहेज
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कुर्बानी का तरीका और किन लोगों पर फर्ज
शहर जमियत उलमा से क़ारी सलमान ने बताया कि जिन लोगों पर साढे़ सात तौला सोना या साढे़ 52 तौला चांदी है या इनके बराबर रकम मौजूद है। उन पर कुर्बानी वाजिब हो जाती है।
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ईदुल-अज़हा की नमाज के बाद ही कुर्बानी की जाती है। इससे पहले कोई कुर्बानी कर देता है तो वो कुर्बानी नही मानी जायेगी। चांद की 10, 11 और 12 तारीख के साथ तीन दिन तक बकरा ईद का त्योहार मनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सभी जानवरों की उम्र के हिसाब से कुर्बानी की जाती है। जिसमें बकरा कम से कम एक साल, भैंसा दो साल, ऊंट की पांच साल की उम्र में कुर्बानी की की जा सकती है। कुर्बानी के गोश्त में तीन हिस्से करने चाहिए। जिसमें एक खुद के लिए, दूसरा पड़ोस-रिश्तेदारों और तीसरा गरीब लोगों को जरूर देना चाहिए।
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खास बात:
- ईदुल-अज़हा पर शहर काजी ने की साफ-सफाई की अपील
- मुस्लिम वर्ग के लोगों से खुले में कुर्बानी न करने को कहा
- कहा कि अवशेषों को खुले में रखने से करें परहेज