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ज्ञानोदय वाटिका में सींच रहे ज्ञान के अंकुर
Updated Sat, 08 Jul 2017 03:03 AM IST
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मेरठ। संस्कारों के साथ ज्ञानोदय वाटिका निर्धन बच्चों के जीवन में ज्ञान का उजियारा फहरा रही है। समाजसेवी अविनाश सिंह अलग ने 15 साल पहले वाटिका की स्थापना की थी। आज शहर में इसकी 13 शाखाएं हैं, जो बच्चों को शिक्षित कर रही हैं। परतापुर गगोल के दयाल पॉली क्लीनिक में हर शाम ढाई घंटे वाटिका लगती है। जहां हर आयु वर्ग के बच्चे, युवा, महिलाएं ज्ञान की रोशनी में अपना भविष्य संवारने पहुंचते हैं।
छोटे बच्चे वाटिका में खेल-खेल में गणित के सवाल, पहाड़े, वर्णमाला सीखते हैं। महिलाएं व युवतियां अपने पैरों पर खड़ी होने के लिए सिलाई, कढ़ाई, कंप्यूटर का निशुल्क प्रशिक्षण लेती हैं। वाटिका में कार्यरत शिक्षक मोहित, प्रवीन, राजकुमारी त्यागी, अर्चना पांडे, सुषमा और काजल बच्चों को परिवार से ज्यादा प्यार देते हैं। खेल-खेल में पढ़ाई भी कराते हैं। परतापुर की शाखा में करीब 150 बच्चे हैं।
वाटिका की खासियत
शहर में महरौली, जवाहर नगर, परतापुर गगोल, बुढ़ाना गेट, घोसी मोहल्ला, नई बस्ती, मुल्तान नगर, मंगतपुरम, किशनपुरा आदि स्थानों पर पिछले 15 वर्ष से 13 ज्ञानोदय वाटिका संचालित हैं। देहरादून में दून स्कूल के साथ मिलकर दो वाटिकाएं संचालित हैं।
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वाटिका में गरीब, मलिन बस्तियों के बच्चों को निशुल्क शिक्षा, सिलाई, कढ़ाई, पेंटिंग, बुनाई, कंप्यूटर व स्वरोजगार प्रशिक्षण देते हैं।
वाटिका में हर साल लड़कियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। हर वाटिका पर लड़कों से अधिक लड़कियां हैं
हर शाम 4 बजे से 6.30 बजे तक लगती है वाटिका।
यूपी बोर्ड के सिलेबस से बच्चों को हिंदी, इंग्लिश, योग, नृत्य, खेल, संस्कृत, गणित, स्टोरी टेलिंग व संस्कारों की मिलती है शिक्षा।
कई बच्चे प्राथमिक विद्यालय के बाद शाम को वाटिका में पढ़ने आते हैं।
बच्चों के खेलने के लिए वाटिका में झूले और मैदान हैं, जहां बच्चे खेल खेलते हैं।
समाज में कई ऐसे बच्चे हैं, जो महंगे स्कूलों में जाकर शिक्षित नहीं हो सकते। लेकिन शिक्षा हर बच्चे का पहला अधिकार है। वाटिका में आने वाले हर बच्चे का जीवन एक कहानी है। हमारी कोशिश बच्चों को सभ्यता, संस्कृति व संस्कारों से सिंचित करना है। - अविनाश सिंह अलग, संस्थापक ज्ञानोदय वाटिका
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छोटे बच्चे वाटिका में खेल-खेल में गणित के सवाल, पहाड़े, वर्णमाला सीखते हैं। महिलाएं व युवतियां अपने पैरों पर खड़ी होने के लिए सिलाई, कढ़ाई, कंप्यूटर का निशुल्क प्रशिक्षण लेती हैं। वाटिका में कार्यरत शिक्षक मोहित, प्रवीन, राजकुमारी त्यागी, अर्चना पांडे, सुषमा और काजल बच्चों को परिवार से ज्यादा प्यार देते हैं। खेल-खेल में पढ़ाई भी कराते हैं। परतापुर की शाखा में करीब 150 बच्चे हैं।
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वाटिका की खासियत
शहर में महरौली, जवाहर नगर, परतापुर गगोल, बुढ़ाना गेट, घोसी मोहल्ला, नई बस्ती, मुल्तान नगर, मंगतपुरम, किशनपुरा आदि स्थानों पर पिछले 15 वर्ष से 13 ज्ञानोदय वाटिका संचालित हैं। देहरादून में दून स्कूल के साथ मिलकर दो वाटिकाएं संचालित हैं।
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वाटिका में गरीब, मलिन बस्तियों के बच्चों को निशुल्क शिक्षा, सिलाई, कढ़ाई, पेंटिंग, बुनाई, कंप्यूटर व स्वरोजगार प्रशिक्षण देते हैं।
वाटिका में हर साल लड़कियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। हर वाटिका पर लड़कों से अधिक लड़कियां हैं
हर शाम 4 बजे से 6.30 बजे तक लगती है वाटिका।
यूपी बोर्ड के सिलेबस से बच्चों को हिंदी, इंग्लिश, योग, नृत्य, खेल, संस्कृत, गणित, स्टोरी टेलिंग व संस्कारों की मिलती है शिक्षा।
कई बच्चे प्राथमिक विद्यालय के बाद शाम को वाटिका में पढ़ने आते हैं।
बच्चों के खेलने के लिए वाटिका में झूले और मैदान हैं, जहां बच्चे खेल खेलते हैं।
समाज में कई ऐसे बच्चे हैं, जो महंगे स्कूलों में जाकर शिक्षित नहीं हो सकते। लेकिन शिक्षा हर बच्चे का पहला अधिकार है। वाटिका में आने वाले हर बच्चे का जीवन एक कहानी है। हमारी कोशिश बच्चों को सभ्यता, संस्कृति व संस्कारों से सिंचित करना है। - अविनाश सिंह अलग, संस्थापक ज्ञानोदय वाटिका