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Meerut News: 500 मीटर दूरी में 26 स्पीड ब्रेकर, अब हटाने पड़े
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लावड़ - कस्बे में लगे ब्रेकर हटवाते चेयरपर्सन। स्रोत : संवाद
- सरकारी धन के दुरुपयोग पर उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
लावड़। कस्बे के मुख्य टेंपो चौराहे से छोटा बाजार तक करीब 500 मीटर की दूरी में लगाए गए 26 प्लास्टिक के स्पीड ब्रेकर अब नगर पंचायत को हटाने पड़ रहे हैं। तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण और दुर्घटनाओं की रोकथाम के नाम पर लगाए गए इन ब्रेकरों को लेकर शुरू से ही व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई थी।
लोगों का आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से ब्रेकर लगाए गए, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और आमजन को परेशानी झेलनी पड़ी। अब इनके हटने के साथ ही सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
हाल ही में व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने नगर पंचायत चेयरपर्सन आफताब बेगम को ज्ञापन देकर अतिरिक्त स्पीड ब्रेकर हटाने की मांग की थी। उनका कहना था कि मुख्य बाजार क्षेत्र में कुछ ही दूरी पर लगातार ब्रेकर होने से वाहन चालकों को बार-बार रुकना पड़ता था। इससे जाम की स्थिति बनती है और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। स्थानीय नागरिकों ने भी इसे अव्यवहारिक निर्णय बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
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मंगलवार को चेयरपर्सन आफताब बेगम के निर्देश पर अनावश्यक स्पीड ब्रेकर हटाने का कार्य शुरू कराया गया। चेयरपर्सन ने कहा कि ब्रेकर सड़क सुरक्षा और जनहित को ध्यान में रखकर लगाए गए थे, लेकिन लोगों की शिकायतों को देखते हुए उनकी संख्या कम की जा रही है ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु रह सके।
हालांकि, ब्रेकर हटाने के निर्णय के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब ये ब्रेकर लगाए गए थे तब क्या संबंधित विभाग ने निर्धारित मानकों का पालन किया था। नियमों के अनुसार प्लास्टिक या रबर स्पीड ब्रेकरों के बीच सामान्यतः 20 से 150 मीटर तक की दूरी रखी जाती है, जबकि स्कूल अथवा आवासीय क्षेत्रों में 50 से 70 मीटर का अंतर उपयुक्त माना जाता है। इसके अलावा ब्रेकर से 40 मीटर पहले चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर और मानक ऊंचाई जैसे नियमों का पालन भी अनिवार्य है। 500 मीटर की दूरी में 26 ब्रेकर लगाने का मतलब लगभग हर 19 मीटर पर एक ब्रेकर होना है, जो निर्धारित मानकों और व्यावहारिक जरूरतों पर सवाल खड़ा करता है। यदि बिना उचित सर्वे और मानकों के विपरीत ब्रेकर लगाए गए थे तो उन पर खर्च हुए सरकारी धन की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
कोट...
जनता की मांग पर ब्रेकर लगवाए गए थे। अब उन्हें परेशानी हुई तो उनकी मांग पर ही कुछ ब्रेकर हटवाए जा रहे हैं। हटवाए गए ब्रेकर उन स्थानों पर लगवाए जाएंगे जहां जरूरत होगी। - आफताब बेगम, चेयरपर्सन, नगर पंचायत, लावड़
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संवाद न्यूज एजेंसी
लावड़। कस्बे के मुख्य टेंपो चौराहे से छोटा बाजार तक करीब 500 मीटर की दूरी में लगाए गए 26 प्लास्टिक के स्पीड ब्रेकर अब नगर पंचायत को हटाने पड़ रहे हैं। तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण और दुर्घटनाओं की रोकथाम के नाम पर लगाए गए इन ब्रेकरों को लेकर शुरू से ही व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई थी।
लोगों का आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से ब्रेकर लगाए गए, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और आमजन को परेशानी झेलनी पड़ी। अब इनके हटने के साथ ही सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
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हाल ही में व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने नगर पंचायत चेयरपर्सन आफताब बेगम को ज्ञापन देकर अतिरिक्त स्पीड ब्रेकर हटाने की मांग की थी। उनका कहना था कि मुख्य बाजार क्षेत्र में कुछ ही दूरी पर लगातार ब्रेकर होने से वाहन चालकों को बार-बार रुकना पड़ता था। इससे जाम की स्थिति बनती है और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। स्थानीय नागरिकों ने भी इसे अव्यवहारिक निर्णय बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
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मंगलवार को चेयरपर्सन आफताब बेगम के निर्देश पर अनावश्यक स्पीड ब्रेकर हटाने का कार्य शुरू कराया गया। चेयरपर्सन ने कहा कि ब्रेकर सड़क सुरक्षा और जनहित को ध्यान में रखकर लगाए गए थे, लेकिन लोगों की शिकायतों को देखते हुए उनकी संख्या कम की जा रही है ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु रह सके।
हालांकि, ब्रेकर हटाने के निर्णय के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब ये ब्रेकर लगाए गए थे तब क्या संबंधित विभाग ने निर्धारित मानकों का पालन किया था। नियमों के अनुसार प्लास्टिक या रबर स्पीड ब्रेकरों के बीच सामान्यतः 20 से 150 मीटर तक की दूरी रखी जाती है, जबकि स्कूल अथवा आवासीय क्षेत्रों में 50 से 70 मीटर का अंतर उपयुक्त माना जाता है। इसके अलावा ब्रेकर से 40 मीटर पहले चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर और मानक ऊंचाई जैसे नियमों का पालन भी अनिवार्य है। 500 मीटर की दूरी में 26 ब्रेकर लगाने का मतलब लगभग हर 19 मीटर पर एक ब्रेकर होना है, जो निर्धारित मानकों और व्यावहारिक जरूरतों पर सवाल खड़ा करता है। यदि बिना उचित सर्वे और मानकों के विपरीत ब्रेकर लगाए गए थे तो उन पर खर्च हुए सरकारी धन की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
कोट...
जनता की मांग पर ब्रेकर लगवाए गए थे। अब उन्हें परेशानी हुई तो उनकी मांग पर ही कुछ ब्रेकर हटवाए जा रहे हैं। हटवाए गए ब्रेकर उन स्थानों पर लगवाए जाएंगे जहां जरूरत होगी। - आफताब बेगम, चेयरपर्सन, नगर पंचायत, लावड़