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जिला कारागार से दो माह के लिए रिहा होंगे 250 विचाराधीन बंदी
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जिला कारागार से दो माह के लिए रिहा होंगे 250 विचाराधीन बंदी
मेरठ। बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए चौधरी चरण सिंह जिला कारागार से करीब 250 विचाराधीन बंदी दो महीने की अंतरिम जमानत पर छोड़े जाएंगे। जबकि 70 सजायाफ्ता कैदियों को दो महीने की पैरोल मिलेगी। हाई पावर कमेटी की ओर से जारी निर्देशों पर जेल प्रशासन काम कर रहा है। जल्द यह प्रक्रिया शुरू होगी।
जिला कारागार में वर्तमान में करीब 2600 बंदी हैं, जो क्षमता से कहीं अधिक हैं। विचाराधीन बंदियों की संख्या 2100 और सजायाफ्ता कैदियों की संख्या 500 है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए जेल में बंदियों की संख्या कम करने का निर्णय लिया गया है। विचाराधीन बंदियों की अंतरिम जमानत को लेकर आज से न्यायालय में सुनवाई शुरू होगी। वहीं, शासन को सजायाफ्ता कैदियों का विवरण भेजा जा चुका है।
विचाराधीन-सजायाफ्ता के अलग नियम
न्यायालय के आदेश पर ऐसे विचाराधीन बंदी दो माह की अंतरिम जमानत पर छोड़े जाएंगे जिन्हें अधिकतम सजा सात साल की हो सकती हो, जबकि सजायाफ्ता कैदियों को शासन के आदेश पर दो महीने की पैरोल मिलेगी। इसमें ऐसे बंदी चिह्नित किए हैं, जिन्हें सात साल तक की सजा हुई हो या फिरी उनकी उम्र 65 वर्ष से अधिक हो।
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हाई पावर कमेटी की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार विवरण तैयार कर लिया है। जनपद में 250 विचाराधीन और 70 सजायाफ्ता इस श्रेणी में शामिल किए हैं। विचाराधीन बंदी की प्रक्रिया आज से शुरू हो रही है, जबकि सजायाफ्ता की प्रक्रिया शासन से अनुमति मिलने के बाद शुरू होगी। - डॉ. बीडी पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
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मेरठ। बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए चौधरी चरण सिंह जिला कारागार से करीब 250 विचाराधीन बंदी दो महीने की अंतरिम जमानत पर छोड़े जाएंगे। जबकि 70 सजायाफ्ता कैदियों को दो महीने की पैरोल मिलेगी। हाई पावर कमेटी की ओर से जारी निर्देशों पर जेल प्रशासन काम कर रहा है। जल्द यह प्रक्रिया शुरू होगी।
जिला कारागार में वर्तमान में करीब 2600 बंदी हैं, जो क्षमता से कहीं अधिक हैं। विचाराधीन बंदियों की संख्या 2100 और सजायाफ्ता कैदियों की संख्या 500 है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए जेल में बंदियों की संख्या कम करने का निर्णय लिया गया है। विचाराधीन बंदियों की अंतरिम जमानत को लेकर आज से न्यायालय में सुनवाई शुरू होगी। वहीं, शासन को सजायाफ्ता कैदियों का विवरण भेजा जा चुका है।
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विचाराधीन-सजायाफ्ता के अलग नियम
न्यायालय के आदेश पर ऐसे विचाराधीन बंदी दो माह की अंतरिम जमानत पर छोड़े जाएंगे जिन्हें अधिकतम सजा सात साल की हो सकती हो, जबकि सजायाफ्ता कैदियों को शासन के आदेश पर दो महीने की पैरोल मिलेगी। इसमें ऐसे बंदी चिह्नित किए हैं, जिन्हें सात साल तक की सजा हुई हो या फिरी उनकी उम्र 65 वर्ष से अधिक हो।
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हाई पावर कमेटी की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार विवरण तैयार कर लिया है। जनपद में 250 विचाराधीन और 70 सजायाफ्ता इस श्रेणी में शामिल किए हैं। विचाराधीन बंदी की प्रक्रिया आज से शुरू हो रही है, जबकि सजायाफ्ता की प्रक्रिया शासन से अनुमति मिलने के बाद शुरू होगी। - डॉ. बीडी पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक