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वैक्सीन की एक लाख 23,500 डोज और आईं
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एक लाख 23,500 वैक्सीन की डोज और आईं
मेरठ। कोरोना वैक्सीन (कोविशील्ड) की एक लाख 23,500 डोज और गई हैं। इन्हें फिलहाल मेडिकल कॉलेज स्थित अपर निदेशक स्वास्थ्य कार्यालय में बने राज्य वैक्सीन केंद्र में आठ डिग्री तापमान में रखा गया है। यहां से इन्हें सुरक्षा के बीच मेरठ और सहारनपुर मंडल के जिलों में भेजा जाएगा।
बुधवार दोपहर करीब तीन बजे ट्रक में वैक्सीन मेडिकल कॉलेज लाई गई। मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तालियान और संयुक्त निदेशक डॉ. ज्योत्सना वत्स ने कंटेनर रिसीव किया। पिछली बार 13 जनवरी को वैक्सीन की एक लाख 55 हजार 500 डोज आई थीं, जिनमें से 23,500 डोज जिले को मिली थीं।
सीधे सवाल... सीधे जवाब
किन लोगों को अभी वैक्सीन नहीं लगाई जाएगी?
अगर कोई खून पतला करने की दवा ले रहा है या किसी को ब्लीडिंग डिसऑर्डर की समस्या है तो उन्हें वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए। गर्भवती और स्तनपान करा रही महिलाओं, ज्यादा एलर्जी के बीमार भी न लगवाएं।
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ऐसे लोगों की पहचान कैसे करेंगे?
कोई सूची नहीं बनाई गई है। लाभार्थियों को रैंडम मैसेज भेजे जाएंगे। इसके लिए वैक्सीनेशन सेंटर पर ही काउंसलिंग की जाएगी। सबसे ज्यादा जरूरी है कि जब व्यक्ति वैक्सीनेशन सेंटर पर जाए तो वहां डॉक्टर को अपनी बीमारी के बार में पूरा बताएं और डॉक्टर को फैसला लेने दें।
बुखार होने पर वैक्सीन लें या नहीं?
बुखार कम होने का इंतजार करें और उसके बाद ही वैक्सीन लें। जब वैक्सीनेशन के लिए जाएं तो इस बारे में डॉक्टर को जरूर बताएं। वैसे वैक्सीन से पहले उनका तापमान भी चेक किया जाएगा।
कोरोना के सक्रिय मरीजों को वैक्सीन लगेगी या नहीं?
कोरोना के सक्रिय मरीजों को वैक्सीन नहीं लगेगी। ऐसे लाभार्थी जब ठीक हो जाएं तो उसके चार हफ्ते बाद ही वैक्सीनेशन किया जाएगा।
कोरोना वैक्सीन लगने के बाद शरीर में क्या-क्या लक्षण दिख सकते हैं?
आम लक्षण में जहां पर वैक्सीन लगती है, वहां पर दर्द होता है। थोड़ा बुखार, सिर दर्द, थकान, शरीर में दर्द हो सकता है। यह अपने आप ठीक हो जाता है। ये लक्षण टीकाकरण के आधे घंटे में आ जाते हैं, इसलिए ऑब्जर्वेशन का नियम बना हुआ है।
(नोट: आम लोगों से जुड़े सवालों के जवाब मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अखिलेश मोहन और जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रवीण गौतम ने दिए हैं)
मुख्य अभियंता के बाद अब अधीक्षण अभियंता भी कोरोना की चपेट में
मेरठ। पीवीवीएनएल के मुख्य अभियंता मेरठ जोन एसबी यादव के बाद अब अधीक्षण अभियंता शहर एके सिंह भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। यादव को पिछले सप्ताह कोरोना हो गया था। उनका अधीक्षण अभियंता शहर एके सिंह देख रहे थे। मंगलवार को सिंह की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद दोनों कार्यालयों का काम ठप हो गया है।
ब्यूरो
रोडवेज बसों में नहीं हो रहा एसओपी का पालन
- मेरठ रीजन की बसों का लोड फैक्टर 61 फीसदी तक पहुंचा
मेरठ। कोरोना के केस कम होते ही रोडवेज की बसें यात्रियों के खचाखच भरी दिख रही हैं। बस अड्डा हो या बस कहीं पर भी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन नहीं हो रहा है। चालक-परिचालक बेफ्रिक होकर बसों में यात्रियों को भर कर उनकी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
बुधवार को जब इस बावत पड़ताल की तो भैसाली डिपो, मेरठ डिपो के अलावा अन्य डिपो की बसों में ऐसा हाल दिखा। गाजियाबाद और कौशांबी डिपो की बसों में भी एसओपी का पालन होते हुए नहीं मिला। चालक-परिचालक समेत कोई भी यात्री मास्क लगाए नहीं दिखता है। यात्रियों से भरी खचाखच बस पर भी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
नहीं दिखती हैंड फ्री सैनिटाइजर मशीन
परिवहन विभाग ने बस अड्डों और परिचालक को सैनिटाइजर मुहैया कराए थे, लेकिन समय के साथ ही यह भी गायब हो गए हैं। वहीं यात्रियों के सामान व बसों के सैनिटाइजेशन की सुविधा पर भी लचर व्यवस्था का शिकार हो गई हैं।
मेरठ रीजन की बसों का लोड फैक्टर 61 फीसदी
रोडवेज की आय बस के लोड फैक्टर पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर विभाग ने बसों का लोड फैक्टर 60 फीसदी तय किया हुआ है। यात्रियों की भीड़ के चलते मेरठ रीजन का औसत लोड फैक्टर 61 फीसदी पहुंच गया है, जो पिछले साल जनवरी के मुकाबले 2 फीसदी ज्यादा है। रीजन में सर्वाधिक लोड फैक्टर बड़ौत और भैसाली डिपो का 64 फीसदी और सबसे कम लोड फैक्टर गढ़मुक्तेश्वर और सोहराबगेट डिपो का 57 फीसदी है। हालांकि आरएम केके शर्मा का कहना है कि बसों का लोड फैक्टर भले ही 60 फीसदी तक पहुंच गया हो लेकिन पिछले साल के मुकाबले यात्रियों की संख्या 22 हजार प्रतिदिन कम चल रही है।
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मेरठ। कोरोना वैक्सीन (कोविशील्ड) की एक लाख 23,500 डोज और गई हैं। इन्हें फिलहाल मेडिकल कॉलेज स्थित अपर निदेशक स्वास्थ्य कार्यालय में बने राज्य वैक्सीन केंद्र में आठ डिग्री तापमान में रखा गया है। यहां से इन्हें सुरक्षा के बीच मेरठ और सहारनपुर मंडल के जिलों में भेजा जाएगा।
बुधवार दोपहर करीब तीन बजे ट्रक में वैक्सीन मेडिकल कॉलेज लाई गई। मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तालियान और संयुक्त निदेशक डॉ. ज्योत्सना वत्स ने कंटेनर रिसीव किया। पिछली बार 13 जनवरी को वैक्सीन की एक लाख 55 हजार 500 डोज आई थीं, जिनमें से 23,500 डोज जिले को मिली थीं।
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सीधे सवाल... सीधे जवाब
किन लोगों को अभी वैक्सीन नहीं लगाई जाएगी?
अगर कोई खून पतला करने की दवा ले रहा है या किसी को ब्लीडिंग डिसऑर्डर की समस्या है तो उन्हें वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए। गर्भवती और स्तनपान करा रही महिलाओं, ज्यादा एलर्जी के बीमार भी न लगवाएं।
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ऐसे लोगों की पहचान कैसे करेंगे?
कोई सूची नहीं बनाई गई है। लाभार्थियों को रैंडम मैसेज भेजे जाएंगे। इसके लिए वैक्सीनेशन सेंटर पर ही काउंसलिंग की जाएगी। सबसे ज्यादा जरूरी है कि जब व्यक्ति वैक्सीनेशन सेंटर पर जाए तो वहां डॉक्टर को अपनी बीमारी के बार में पूरा बताएं और डॉक्टर को फैसला लेने दें।
बुखार होने पर वैक्सीन लें या नहीं?
बुखार कम होने का इंतजार करें और उसके बाद ही वैक्सीन लें। जब वैक्सीनेशन के लिए जाएं तो इस बारे में डॉक्टर को जरूर बताएं। वैसे वैक्सीन से पहले उनका तापमान भी चेक किया जाएगा।
कोरोना के सक्रिय मरीजों को वैक्सीन लगेगी या नहीं?
कोरोना के सक्रिय मरीजों को वैक्सीन नहीं लगेगी। ऐसे लाभार्थी जब ठीक हो जाएं तो उसके चार हफ्ते बाद ही वैक्सीनेशन किया जाएगा।
कोरोना वैक्सीन लगने के बाद शरीर में क्या-क्या लक्षण दिख सकते हैं?
आम लक्षण में जहां पर वैक्सीन लगती है, वहां पर दर्द होता है। थोड़ा बुखार, सिर दर्द, थकान, शरीर में दर्द हो सकता है। यह अपने आप ठीक हो जाता है। ये लक्षण टीकाकरण के आधे घंटे में आ जाते हैं, इसलिए ऑब्जर्वेशन का नियम बना हुआ है।
(नोट: आम लोगों से जुड़े सवालों के जवाब मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अखिलेश मोहन और जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रवीण गौतम ने दिए हैं)
मुख्य अभियंता के बाद अब अधीक्षण अभियंता भी कोरोना की चपेट में
मेरठ। पीवीवीएनएल के मुख्य अभियंता मेरठ जोन एसबी यादव के बाद अब अधीक्षण अभियंता शहर एके सिंह भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। यादव को पिछले सप्ताह कोरोना हो गया था। उनका अधीक्षण अभियंता शहर एके सिंह देख रहे थे। मंगलवार को सिंह की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद दोनों कार्यालयों का काम ठप हो गया है।
ब्यूरो
रोडवेज बसों में नहीं हो रहा एसओपी का पालन
- मेरठ रीजन की बसों का लोड फैक्टर 61 फीसदी तक पहुंचा
मेरठ। कोरोना के केस कम होते ही रोडवेज की बसें यात्रियों के खचाखच भरी दिख रही हैं। बस अड्डा हो या बस कहीं पर भी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन नहीं हो रहा है। चालक-परिचालक बेफ्रिक होकर बसों में यात्रियों को भर कर उनकी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
बुधवार को जब इस बावत पड़ताल की तो भैसाली डिपो, मेरठ डिपो के अलावा अन्य डिपो की बसों में ऐसा हाल दिखा। गाजियाबाद और कौशांबी डिपो की बसों में भी एसओपी का पालन होते हुए नहीं मिला। चालक-परिचालक समेत कोई भी यात्री मास्क लगाए नहीं दिखता है। यात्रियों से भरी खचाखच बस पर भी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
नहीं दिखती हैंड फ्री सैनिटाइजर मशीन
परिवहन विभाग ने बस अड्डों और परिचालक को सैनिटाइजर मुहैया कराए थे, लेकिन समय के साथ ही यह भी गायब हो गए हैं। वहीं यात्रियों के सामान व बसों के सैनिटाइजेशन की सुविधा पर भी लचर व्यवस्था का शिकार हो गई हैं।
मेरठ रीजन की बसों का लोड फैक्टर 61 फीसदी
रोडवेज की आय बस के लोड फैक्टर पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर विभाग ने बसों का लोड फैक्टर 60 फीसदी तय किया हुआ है। यात्रियों की भीड़ के चलते मेरठ रीजन का औसत लोड फैक्टर 61 फीसदी पहुंच गया है, जो पिछले साल जनवरी के मुकाबले 2 फीसदी ज्यादा है। रीजन में सर्वाधिक लोड फैक्टर बड़ौत और भैसाली डिपो का 64 फीसदी और सबसे कम लोड फैक्टर गढ़मुक्तेश्वर और सोहराबगेट डिपो का 57 फीसदी है। हालांकि आरएम केके शर्मा का कहना है कि बसों का लोड फैक्टर भले ही 60 फीसदी तक पहुंच गया हो लेकिन पिछले साल के मुकाबले यात्रियों की संख्या 22 हजार प्रतिदिन कम चल रही है।