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मुखबिर कैसे करेंगे काम, बेटियां बचाने की मुहिम ‘धड़ाम’
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मुखबिर कैसे करेंगे काम, बेटियां बचाने की मुहिम ‘धड़ाम’
आठ सफल ‘स्टिंग ऑपरेशन’ का मुखबिरों को नहीं मिला पैसा, 16 लाख बकाया
स्वास्थ्य विभाग कई बार भेज चुका रिमाइंडर, शासन नहीं दे रहा ध्यान
अरीश रिज़वी
मेरठ। बेटियों को बचाने के लिए आठ सफल स्टिंग ऑपरेशन। भ्रूण लिंग परीक्षण करने वालों का भंडाफोड़। दो दर्जन से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारियां। जी हां, बात हो रही है मुखबिर योजना की। लेकिन अब इस योजना को पलीता लग रहा है। पलीता भी कोई और नहीं बल्कि शासन ही लगा रहा है, क्योंकि पिछले करीब दो साल में हुए इन ऑपरेशन का एक भी पैसा मुखबिरों को नहीं मिला है। जबकि हर सफल स्टिंग ऑपरेशन के लिए दो लाख रुपये दिए जाने हैं। स्वास्थ्य विभाग कई बार रिमाइंडर भेज चुका है, मगर जूं नहीं रेंग रही है।
बेटियों को बचाने के लिए भ्रूण लिंग परीक्षण करने वालों पर स्वास्थ्य विभाग शिकंजा कसता है। मुखबिर योजना के तहत स्टिंग ऑपरेशन कर ऐसे लोगों को दबोचता है। हर स्टिंग ऑपरेशन में दो महिलाओं समेत तीन लोगों की जरूरत पड़ती है। उनके काम और पैसे भी फिक्स हैं। कौन व्यक्ति क्या काम करेगा और कितने पैसे मिलेंगे, लेकिन अभी तक एक भी स्टिंग ऑपरेशन के पैसे जारी नहीं किए गए हैं। यह हालात तब हैं जबकि मेरठ में स्वास्थ्य विभाग को बड़ी मुश्किल से मुखबिर मिलते हैं। इक्का-दुक्का मामलों को छोड़ दें तो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को हरियाणा स्वास्थ्य विभाग से मदद लेनी पड़ती है।
यहां किया गया भंडाफोड़
मवाना, अमरोहा, मोदीनगर, परतापुर, भावनपुर, ब्रह्मपुरी, मेरठ कोतवाली और संभल।
यह है मुखबिर योजना
एक जुलाई 2017 को शासन की ‘मुखबिर योजना’ लागू हुई थी। एक स्टिंग ऑपरेशन पर शासन को दो लाख रुपये खर्च करने हैं। इनमें भ्रूण जांच या गर्भपात कराने वाले सेंटर को ढूंढने वाले व्यक्ति को 60 हजार रुपये दिए जाने तय हैं। जो महिला मिथ्या गर्भवती बनकर सेंटर में जाएगी, उसे एक लाख रुपये और जो महिला के साथ सहयोगी बनकर जाएगा या जाएगी, उसे 40 हजार रुपये दिए जाने तय हैं।
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पांच साल तक की सजा
इसमें दोष सिद्ध होने पर पांच साल कैद और एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। डॉक्टर और जांच कराने वाले व्यक्तियों (महिला-पुरुष) को समान कैद और जुर्माना हो सकता है।
पकड़े गए कुछ बड़े मामले
03 मार्च 2019- कोतवाली क्षेत्र में भ्रूण लिंग परीक्षण करने वालों का भंडाफोड़, एक पकड़ा
16 जनवरी 2019- भावनपुर में भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार
05 जनवरी 2019- मवाना में चल रहे भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़, छह गिरफ्तार
16 नवंबर 2018- मोहिउद्दीनपुर में भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार
एक भी किस्त नहीं हुई जारी
मुखबिर योजना के तहत 16 लाख रुपये शासन से आने हैं, मगर अभी तक एक भी किस्त जारी नहीं की गई है। इसके लिए शासन को रिमाइंडर भी भेजे जा चुके हैं। उम्मीद है कि जल्द ही किस्त जारी होगी।
- डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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आठ सफल ‘स्टिंग ऑपरेशन’ का मुखबिरों को नहीं मिला पैसा, 16 लाख बकाया
स्वास्थ्य विभाग कई बार भेज चुका रिमाइंडर, शासन नहीं दे रहा ध्यान
अरीश रिज़वी
मेरठ। बेटियों को बचाने के लिए आठ सफल स्टिंग ऑपरेशन। भ्रूण लिंग परीक्षण करने वालों का भंडाफोड़। दो दर्जन से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारियां। जी हां, बात हो रही है मुखबिर योजना की। लेकिन अब इस योजना को पलीता लग रहा है। पलीता भी कोई और नहीं बल्कि शासन ही लगा रहा है, क्योंकि पिछले करीब दो साल में हुए इन ऑपरेशन का एक भी पैसा मुखबिरों को नहीं मिला है। जबकि हर सफल स्टिंग ऑपरेशन के लिए दो लाख रुपये दिए जाने हैं। स्वास्थ्य विभाग कई बार रिमाइंडर भेज चुका है, मगर जूं नहीं रेंग रही है।
बेटियों को बचाने के लिए भ्रूण लिंग परीक्षण करने वालों पर स्वास्थ्य विभाग शिकंजा कसता है। मुखबिर योजना के तहत स्टिंग ऑपरेशन कर ऐसे लोगों को दबोचता है। हर स्टिंग ऑपरेशन में दो महिलाओं समेत तीन लोगों की जरूरत पड़ती है। उनके काम और पैसे भी फिक्स हैं। कौन व्यक्ति क्या काम करेगा और कितने पैसे मिलेंगे, लेकिन अभी तक एक भी स्टिंग ऑपरेशन के पैसे जारी नहीं किए गए हैं। यह हालात तब हैं जबकि मेरठ में स्वास्थ्य विभाग को बड़ी मुश्किल से मुखबिर मिलते हैं। इक्का-दुक्का मामलों को छोड़ दें तो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को हरियाणा स्वास्थ्य विभाग से मदद लेनी पड़ती है।
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यहां किया गया भंडाफोड़
मवाना, अमरोहा, मोदीनगर, परतापुर, भावनपुर, ब्रह्मपुरी, मेरठ कोतवाली और संभल।
यह है मुखबिर योजना
एक जुलाई 2017 को शासन की ‘मुखबिर योजना’ लागू हुई थी। एक स्टिंग ऑपरेशन पर शासन को दो लाख रुपये खर्च करने हैं। इनमें भ्रूण जांच या गर्भपात कराने वाले सेंटर को ढूंढने वाले व्यक्ति को 60 हजार रुपये दिए जाने तय हैं। जो महिला मिथ्या गर्भवती बनकर सेंटर में जाएगी, उसे एक लाख रुपये और जो महिला के साथ सहयोगी बनकर जाएगा या जाएगी, उसे 40 हजार रुपये दिए जाने तय हैं।
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पांच साल तक की सजा
इसमें दोष सिद्ध होने पर पांच साल कैद और एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। डॉक्टर और जांच कराने वाले व्यक्तियों (महिला-पुरुष) को समान कैद और जुर्माना हो सकता है।
पकड़े गए कुछ बड़े मामले
03 मार्च 2019- कोतवाली क्षेत्र में भ्रूण लिंग परीक्षण करने वालों का भंडाफोड़, एक पकड़ा
16 जनवरी 2019- भावनपुर में भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार
05 जनवरी 2019- मवाना में चल रहे भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़, छह गिरफ्तार
16 नवंबर 2018- मोहिउद्दीनपुर में भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार
एक भी किस्त नहीं हुई जारी
मुखबिर योजना के तहत 16 लाख रुपये शासन से आने हैं, मगर अभी तक एक भी किस्त जारी नहीं की गई है। इसके लिए शासन को रिमाइंडर भी भेजे जा चुके हैं। उम्मीद है कि जल्द ही किस्त जारी होगी।
- डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी