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मिट्टी के बर्तनों से सुधरेगी सेहत
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मिट्टी के बर्तनों से सुधरेगी सेहत
परीक्षितगढ़। मानव सभ्यता के विकास के गवाह रहे मिट्टी के बर्तनों ने एक बार फिर लोगों के बीच जगह बनानी शुरू कर दी है। जिसका मुख्य कारण परंपराओं की पुनरावृत्ति माना जा रहा है। दूसरा सेहत को लेकर संजीदगी। मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग केवल घर की रसोई में ही नहीं बल्कि नगर के कई होटलों और रेस्टोरेंट में भी किया जा रहा है। इनकी सोंधी महक जहां लोगों को अपनी ओर खींच रही है। वहीं, इनका रंग रूप और डिजाइन भी लोगों को खूब भा रहा है।
बर्तन मिट्टी के पर फ्रेम स्टील का
बाजार में मौजूूद मिट्टी के तवे, कड़ाही, हांडी आदि को स्टील के फ्रेम में तैयार किया गया है। जिससे गैस पर प्रयोग करते समय बर्तन चटक न जाए। नगर में इस तरह के बर्तन तैयार किए जा रहे हैं। रोटी, चावल और खीर आदि बनाने के लिए लोग इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। रसोई में इस्तेमाल आने वाले ये बर्तन मवी बस स्टैंड, मवाना बस स्टैंड एवं प्रजापति बस्ती में मिलते हैं।
रसोई से लेकर हलवाई तक है मुरीद
महिला सविता गुलवीर का कहना है कि मिट्टी के तवे से निकली रोटी का स्वाद ही अलग है। काफी समय से वह इस तवे का प्रयोग कर रही हैं। उनका कहना है कि मिट्टी के बर्तन में रखा गया समान भी काफी समय तक खराब नहीं होता है। वहीं, इन बर्तनों में दही जमाने पर मिट्टी की सोंधी खुशबू भी आती है जो दही के स्वाद को और बढ़ा देती है।
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मिट्टी में हैं पोषक तत्व
डॉ. समसुद्दीन का कहना है कि मिट्टी के बर्तनों में कई सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं। ये शरीर के लिए काफी लाभदायक हैं। मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाकर खाने से शरीर को कई बीमारियों से बचाया जा सकता है। जल्दबाजी में पकाया गया भोजन सेहत के लिए नुकसान दायक रहता है।
कुछ तथ्य ये भी हैं
-एल्युमीनियम के प्रेशर कुकर में खाना बनाने से 87 फीसदी पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।
- पीतल में खाना बनाने से सौ फीसदी तत्व खत्म होते हैं।
- कांसे के बर्तन में खाना बनाने से 3 फीसदी पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से 100 फीसदी पोषक तत्व मिलते हैं।
बर्तनों की कीमत
बर्तन कीमत रुपये में
तवा-100
कढ़ाही-400
गिलास-04
वाटर कूलर 200
हांडी- 40
घड़े- 200 से 400
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परीक्षितगढ़। मानव सभ्यता के विकास के गवाह रहे मिट्टी के बर्तनों ने एक बार फिर लोगों के बीच जगह बनानी शुरू कर दी है। जिसका मुख्य कारण परंपराओं की पुनरावृत्ति माना जा रहा है। दूसरा सेहत को लेकर संजीदगी। मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग केवल घर की रसोई में ही नहीं बल्कि नगर के कई होटलों और रेस्टोरेंट में भी किया जा रहा है। इनकी सोंधी महक जहां लोगों को अपनी ओर खींच रही है। वहीं, इनका रंग रूप और डिजाइन भी लोगों को खूब भा रहा है।
बर्तन मिट्टी के पर फ्रेम स्टील का
बाजार में मौजूूद मिट्टी के तवे, कड़ाही, हांडी आदि को स्टील के फ्रेम में तैयार किया गया है। जिससे गैस पर प्रयोग करते समय बर्तन चटक न जाए। नगर में इस तरह के बर्तन तैयार किए जा रहे हैं। रोटी, चावल और खीर आदि बनाने के लिए लोग इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। रसोई में इस्तेमाल आने वाले ये बर्तन मवी बस स्टैंड, मवाना बस स्टैंड एवं प्रजापति बस्ती में मिलते हैं।
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रसोई से लेकर हलवाई तक है मुरीद
महिला सविता गुलवीर का कहना है कि मिट्टी के तवे से निकली रोटी का स्वाद ही अलग है। काफी समय से वह इस तवे का प्रयोग कर रही हैं। उनका कहना है कि मिट्टी के बर्तन में रखा गया समान भी काफी समय तक खराब नहीं होता है। वहीं, इन बर्तनों में दही जमाने पर मिट्टी की सोंधी खुशबू भी आती है जो दही के स्वाद को और बढ़ा देती है।
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मिट्टी में हैं पोषक तत्व
डॉ. समसुद्दीन का कहना है कि मिट्टी के बर्तनों में कई सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं। ये शरीर के लिए काफी लाभदायक हैं। मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाकर खाने से शरीर को कई बीमारियों से बचाया जा सकता है। जल्दबाजी में पकाया गया भोजन सेहत के लिए नुकसान दायक रहता है।
कुछ तथ्य ये भी हैं
-एल्युमीनियम के प्रेशर कुकर में खाना बनाने से 87 फीसदी पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।
- पीतल में खाना बनाने से सौ फीसदी तत्व खत्म होते हैं।
- कांसे के बर्तन में खाना बनाने से 3 फीसदी पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से 100 फीसदी पोषक तत्व मिलते हैं।
बर्तनों की कीमत
बर्तन कीमत रुपये में
तवा-100
कढ़ाही-400
गिलास-04
वाटर कूलर 200
हांडी- 40
घड़े- 200 से 400