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तकनीक से ऊपर आ गया सीसीएसयू कैंपस में पानी
Updated Fri, 22 Jun 2018 01:52 AM IST
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तकनीक से ऊपर आ गया कैंपस में पानी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी ने तकनीक के दम पर पानी को बचाने की पहल की है। यहां पर हर साल जहां 10 से 15 फीट पानी नीचे चला जाता था वहीं, अब 40 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए यहां की धरती का पानी रिचार्ज होने लगा है। इस बार जून महीने में भी पानी के हर साल घटने के कारण पाइप रिबोर करने की जरूरत नहीं पड़ी है।
शहर के बीचोंबीच 222 एकड़ में बने चौधरी चरण सिंह कैंपस में चार ट्यूबवेल हैं। वैसे तो पानी का लेवल 120 फीट तक आ जाता है लेकिन स्वच्छ पानी के लिए इन ट्यूबवेल के बोर 250 फीट तक कराए गए हैं। पहले यूनिवर्सिटी में पानी का लेवल हर साल मई-जून महीने में 250 फीट से गिरकर 260 से 265 फीट तक पहुंच जाता था। जिसके चलते हर साल पाइप रिबोर करने पड़ते थे। फिर नौ साल पहले यूनिवर्सिटी ने शुरुआत की कैंपस में रेन वाटर हार्वेसिंग सिस्टम लगाने की। शुरू में दो जगह सिस्टम लगाए गए। इसके बाद इनकी संख्या बढ़ती चली गई। पिछले साल तक जहां 28 सिस्टम थे वहीं, अब इनकी संख्या 40 हो चुकी है। कैंपस में जितनी भी बिल्डिंग हैं सभी का पानी बरसात में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए जमीन में पहुंचाया जाता है।
महाराणा प्रताप हॉस्टल और न्यू ब्वॉयज हॉस्टल का पानी भी सिस्टम के जरिए जमीन को रिचार्ज कर रहा है। जिसके चलते इस बार चौंकाने वाला परिणाम सामने आया है। इस बार पानी का लेवल जून महीने में भी 250 फीट से कम नहीं हुआ है। इसके कारण पाइप रिबोर करने की भी जरूरत नहीं पड़ी है। बरसात से पहले अब यूनिवर्सिटी में लगे इन सारे सिस्टम की सफाई करा दी गई है।
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दूसरे विभाग भी सबक लें तो बदल जाए सूरत
कैंपस की धरती जहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए रिचार्ज हो रही है वहीं, अगर दूसरे सरकारी विभाग भी इससे सबक लें तो शहर में भी पानी के लेवल को घटने से रोका जाता है। लेकिन दूसरे सरकारी विभागों जहां कहीं रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे भी हैं तो वे ठप पड़े हैं।
वर्षा जल से बढ़ाया जा सकता है भूजल भंडारण
रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए वर्षाजल को व्यर्थ बहने से रोककर इसे नालियों, पाइप लाइनों के माध्यम से इस प्रकार संग्रहीत किया जाता है ताकि इसका उपयोग फिर से किया जा सके। भूजल भंडारों में वर्षा जल के द्वारा भंडारण बढ़ाया जा सकता है। वर्तमान जल संकट में यह न केवल जरूरी है, बल्कि बेहद सस्ता व फायदेमंद भी है। कुछ दशक पूर्व तक लोग यह मानते थे कि पानी के भंडार असीमित है। लेकिन पानी के लगातार दोहन से भूजल भंडार खाली हो गए तथा भूजल स्तर निरंतर नीचे खिसकता रहा। यदि यही स्थिति रही तो जल्द ही धरती भूगर्भीय जल भंडारों से खाली हो जाएगी। ऐसे में हम जितना पानी धरती से लेते हैं उतना ही पानी धरती को किसी-न-किसी रूप में लौटाए। यह रेनवाटर हार्वेस्टिंग से ही संभव है।
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी ने तकनीक के दम पर पानी को बचाने की पहल की है। यहां पर हर साल जहां 10 से 15 फीट पानी नीचे चला जाता था वहीं, अब 40 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए यहां की धरती का पानी रिचार्ज होने लगा है। इस बार जून महीने में भी पानी के हर साल घटने के कारण पाइप रिबोर करने की जरूरत नहीं पड़ी है।
शहर के बीचोंबीच 222 एकड़ में बने चौधरी चरण सिंह कैंपस में चार ट्यूबवेल हैं। वैसे तो पानी का लेवल 120 फीट तक आ जाता है लेकिन स्वच्छ पानी के लिए इन ट्यूबवेल के बोर 250 फीट तक कराए गए हैं। पहले यूनिवर्सिटी में पानी का लेवल हर साल मई-जून महीने में 250 फीट से गिरकर 260 से 265 फीट तक पहुंच जाता था। जिसके चलते हर साल पाइप रिबोर करने पड़ते थे। फिर नौ साल पहले यूनिवर्सिटी ने शुरुआत की कैंपस में रेन वाटर हार्वेसिंग सिस्टम लगाने की। शुरू में दो जगह सिस्टम लगाए गए। इसके बाद इनकी संख्या बढ़ती चली गई। पिछले साल तक जहां 28 सिस्टम थे वहीं, अब इनकी संख्या 40 हो चुकी है। कैंपस में जितनी भी बिल्डिंग हैं सभी का पानी बरसात में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए जमीन में पहुंचाया जाता है।
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महाराणा प्रताप हॉस्टल और न्यू ब्वॉयज हॉस्टल का पानी भी सिस्टम के जरिए जमीन को रिचार्ज कर रहा है। जिसके चलते इस बार चौंकाने वाला परिणाम सामने आया है। इस बार पानी का लेवल जून महीने में भी 250 फीट से कम नहीं हुआ है। इसके कारण पाइप रिबोर करने की भी जरूरत नहीं पड़ी है। बरसात से पहले अब यूनिवर्सिटी में लगे इन सारे सिस्टम की सफाई करा दी गई है।
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दूसरे विभाग भी सबक लें तो बदल जाए सूरत
कैंपस की धरती जहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए रिचार्ज हो रही है वहीं, अगर दूसरे सरकारी विभाग भी इससे सबक लें तो शहर में भी पानी के लेवल को घटने से रोका जाता है। लेकिन दूसरे सरकारी विभागों जहां कहीं रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे भी हैं तो वे ठप पड़े हैं।
वर्षा जल से बढ़ाया जा सकता है भूजल भंडारण
रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए वर्षाजल को व्यर्थ बहने से रोककर इसे नालियों, पाइप लाइनों के माध्यम से इस प्रकार संग्रहीत किया जाता है ताकि इसका उपयोग फिर से किया जा सके। भूजल भंडारों में वर्षा जल के द्वारा भंडारण बढ़ाया जा सकता है। वर्तमान जल संकट में यह न केवल जरूरी है, बल्कि बेहद सस्ता व फायदेमंद भी है। कुछ दशक पूर्व तक लोग यह मानते थे कि पानी के भंडार असीमित है। लेकिन पानी के लगातार दोहन से भूजल भंडार खाली हो गए तथा भूजल स्तर निरंतर नीचे खिसकता रहा। यदि यही स्थिति रही तो जल्द ही धरती भूगर्भीय जल भंडारों से खाली हो जाएगी। ऐसे में हम जितना पानी धरती से लेते हैं उतना ही पानी धरती को किसी-न-किसी रूप में लौटाए। यह रेनवाटर हार्वेस्टिंग से ही संभव है।