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समागम के बहाने साधे एक तीर से दो निशाने
Updated Tue, 07 Nov 2017 12:46 AM IST
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मेरठ। किसानों की जिस जमीन पर आवास विकास परिषद कब्जा लेने में हांफ गया था। उस पर विभाग ने एक तीर से दो निशाने साध दिए। आवास विकास ने 25 फरवरी को आरएसएस के कार्यकर्ता समागम होने की अनुमति दी थी। कार्यक्रम में दो लाख से ज्यादा स्वयंसेवकों के आने की उम्मीद है। समागम के लिए कई एकड़ जमीन की जरूरत थी। इस बहाने आवास विकास को फोर्स मिली और विभाग ने करीब 160 एकड़ जमीन खाली करा ली।
जागृति विहार विस्तार योजना आवास एवं विकास अधिकारियों के लिए मुसीबत नजर आ रही थी। उसका मुख्य कारण किसानों की प्रतिकर बढ़ाने की मांग थी। इससे पहले विभाग घोसीपुर के किसानों को 666 प्रति वर्ग मीटर प्रतिकर बढ़ाकर दे चुका है। जिसके बाद काजीपुर और सराय काजी गांव के किसानों ने भी प्रतिकर बढ़ाने की मांग शुरू कर दी थी। जिसको लेकर आवास विकास अधिकारी और किसानों में दो महीने पहले विवाद भी हुआ था। मामला मारपीट तक पहुंचा तो अधिकारियों ने किसानों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर भी कराई थी।
आवास विकास के हाथों एक सबसे अहम कड़ी हाथ लगी कि 25 फरवरी में आरएसएस का बड़ा समागम आयोजित होना है। जिसको लेकर विभाग ने अनुमति भी दे दी। अब मामला किसानों से जमीन पर कब्जे को लेकर आया। विभाग को पुलिस प्रशासन का साथ मिल गया। फोर्स जागृति विहार पहुंच गई। जिसके बाद आवास विकास ने जिस जगह पर समागम होना था, वो तो खाली कराई। साथ ही घोसीपुर के किसानों की जमीन भी कब्जे में ले ली। हालांकि किसानों को जमीन का प्रतिकर मिल चुका था। उस पर कानूनी रूप से किसानोें का अधिकार नहीं था। लेकिन जगह खाली पड़ी थी। तो किसानों ने लागत लगाकर खेती करनी शुरू कर दी। क्योंकि आवास विकास इस योजना में अभी तक फेल ही हुआ है। कारण है एक हजार फ्लैट का खाली पड़ा होना। जब फ्लैट योजना ही पास नहीं हो सकी तो आगे की योजना कब शुरू होगी। जिसका कोई अंदाजा विभाग के पास भी नहीं है। लेकिन फिलहाल विभाग ने समागम के बहाने करीब 160 एकड़ जमीन पर कब्जा तो कर लिया है। जमीन पर कब्जे को लेकर संयुक्त आवास आयुक्त महेंद्र प्रसाद लगातार मौके पर मौजूद रहे। फोर्स मिली है तो किसानों की पूरी जमीन पर कब्जा होना चाहिए। विभाग को अंदेशा था कि किसान एक बार उग्र हो गये तो मामला बढ़ सकता है। जबकि विभाग जमीन को लेकर वर्षों से मशक्कत कर रहा था।
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मैंने जिम्मेदारी निभायी
संयुक्त विकास आयुक्त महेंद्र प्रसाद का कहना है कि आवास विकास द्वारा किसानों से जमीन अधिग्रहण की गई थी, तो उस पर विभाग का ही अधिकार है। किसानों ने कई साल तक जमीन पर फसल बोई है। लेकिन जमीन पर कानूनी तौर पर विभाग का अधिकार था। आवास विकास अधिकारियों और किसानों के बीच विवाद न बढ़ जाए, जिसके लिए मैंने अपनी जिम्मेदारी निभाई है।
खास बात
- किसानों से जमीन पर कब्जा लेने में हांफ गया था आवास विकास
- आरएसएस के समागम को लेकर परिषद को मिली भारी फोर्स
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जागृति विहार विस्तार योजना आवास एवं विकास अधिकारियों के लिए मुसीबत नजर आ रही थी। उसका मुख्य कारण किसानों की प्रतिकर बढ़ाने की मांग थी। इससे पहले विभाग घोसीपुर के किसानों को 666 प्रति वर्ग मीटर प्रतिकर बढ़ाकर दे चुका है। जिसके बाद काजीपुर और सराय काजी गांव के किसानों ने भी प्रतिकर बढ़ाने की मांग शुरू कर दी थी। जिसको लेकर आवास विकास अधिकारी और किसानों में दो महीने पहले विवाद भी हुआ था। मामला मारपीट तक पहुंचा तो अधिकारियों ने किसानों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर भी कराई थी।
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आवास विकास के हाथों एक सबसे अहम कड़ी हाथ लगी कि 25 फरवरी में आरएसएस का बड़ा समागम आयोजित होना है। जिसको लेकर विभाग ने अनुमति भी दे दी। अब मामला किसानों से जमीन पर कब्जे को लेकर आया। विभाग को पुलिस प्रशासन का साथ मिल गया। फोर्स जागृति विहार पहुंच गई। जिसके बाद आवास विकास ने जिस जगह पर समागम होना था, वो तो खाली कराई। साथ ही घोसीपुर के किसानों की जमीन भी कब्जे में ले ली। हालांकि किसानों को जमीन का प्रतिकर मिल चुका था। उस पर कानूनी रूप से किसानोें का अधिकार नहीं था। लेकिन जगह खाली पड़ी थी। तो किसानों ने लागत लगाकर खेती करनी शुरू कर दी। क्योंकि आवास विकास इस योजना में अभी तक फेल ही हुआ है। कारण है एक हजार फ्लैट का खाली पड़ा होना। जब फ्लैट योजना ही पास नहीं हो सकी तो आगे की योजना कब शुरू होगी। जिसका कोई अंदाजा विभाग के पास भी नहीं है। लेकिन फिलहाल विभाग ने समागम के बहाने करीब 160 एकड़ जमीन पर कब्जा तो कर लिया है। जमीन पर कब्जे को लेकर संयुक्त आवास आयुक्त महेंद्र प्रसाद लगातार मौके पर मौजूद रहे। फोर्स मिली है तो किसानों की पूरी जमीन पर कब्जा होना चाहिए। विभाग को अंदेशा था कि किसान एक बार उग्र हो गये तो मामला बढ़ सकता है। जबकि विभाग जमीन को लेकर वर्षों से मशक्कत कर रहा था।
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मैंने जिम्मेदारी निभायी
संयुक्त विकास आयुक्त महेंद्र प्रसाद का कहना है कि आवास विकास द्वारा किसानों से जमीन अधिग्रहण की गई थी, तो उस पर विभाग का ही अधिकार है। किसानों ने कई साल तक जमीन पर फसल बोई है। लेकिन जमीन पर कानूनी तौर पर विभाग का अधिकार था। आवास विकास अधिकारियों और किसानों के बीच विवाद न बढ़ जाए, जिसके लिए मैंने अपनी जिम्मेदारी निभाई है।
खास बात
- किसानों से जमीन पर कब्जा लेने में हांफ गया था आवास विकास
- आरएसएस के समागम को लेकर परिषद को मिली भारी फोर्स