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इलाज कम, दर्द ज्यादा दे रहे सरकारी अस्पताल
Updated Sun, 17 Sep 2017 02:55 AM IST
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मेरठ। इलाज कम, मेरठ के सरकारी अस्पताल ‘दर्द’ ज्यादा दे रहे हैं। स्ट्रेचर गायब हैं, तीमारदार मरीजों को गोद में उठाकर ले जाने को मजबूर हैं। ओपीडी परिसर में मरीज तड़पते रहते हैं, मगर आपाधापी ऐसी है कि उन्हें समय से उपचार नहीं मिलता। मेडिकल कॉलेज हो या जिला अस्पताल, दोनों का यही है हाल।
शनिवार को मेडिकल अस्पताल में एक मरीज दर्द से कराहता हुआ ओपीडी परिसर में ही गिर गया। तीमारदार उसका पर्चा बनवाने गया हुआ था। इस दौरान मेडिकल स्टाफ वहां से गुजरता रहा, लेकिन किसी ने उसकी सुध नहीं ली। तीमारदार के आने पर ही उसे वहां से ले जाया जा सका। वहीं एक महिला को ले जाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिला तो तीमारदारों को बिना पहियों वाले स्ट्रेचर पर ही उसे ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। ऐसा ही हाल जिला अस्पताल का रहा। तीमारदारों को मरीज को हाथों पर उठाकर ले जाना पड़ा। दोनों अस्पतालों का यह हर रोज का हाल है। अक्सर ठेले, रिक्शा और हाथों पर मरीज को ले जाना पड़ता है। यही वजह है कि यहां अक्सर हंगामे होते रहते हैं। इस संबंध में मेडिकल अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी और जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. पीके बंसल का कहना है कि उनकी कोशिश रहती है कि मरीजों को बेहतर इलाज मिले। कई बार जल्दबाजी में तीमारदार मरीजों को बिना स्ट्रेचर के ही ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल में हर रोज 2500 से 3000 की ओपीडी रहती है, जबकि जिला अस्पताल की ओपीडी में 1500 से 2000 मरीज आते हैं।
इलाज के लिए दिल्ली ले जाने की सलाह
मेरठ। जिला अस्पताल में शनिवार को नौ वर्षीय बालक को इलाज के लिए लाया गया तो अस्पताल स्टाफ ने उसे दिल्ली गुरुतेग बहादुर ले जाने की सलाह दे डाली। बाद में मामला प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके बंसल के संज्ञान में आने पर उन्होंने बच्चे को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाया। परिजनों को आश्वासन दिया कि उन्हें दिल्ली जाने की जरूरत नहीं है।
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शनिवार को मेडिकल अस्पताल में एक मरीज दर्द से कराहता हुआ ओपीडी परिसर में ही गिर गया। तीमारदार उसका पर्चा बनवाने गया हुआ था। इस दौरान मेडिकल स्टाफ वहां से गुजरता रहा, लेकिन किसी ने उसकी सुध नहीं ली। तीमारदार के आने पर ही उसे वहां से ले जाया जा सका। वहीं एक महिला को ले जाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिला तो तीमारदारों को बिना पहियों वाले स्ट्रेचर पर ही उसे ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। ऐसा ही हाल जिला अस्पताल का रहा। तीमारदारों को मरीज को हाथों पर उठाकर ले जाना पड़ा। दोनों अस्पतालों का यह हर रोज का हाल है। अक्सर ठेले, रिक्शा और हाथों पर मरीज को ले जाना पड़ता है। यही वजह है कि यहां अक्सर हंगामे होते रहते हैं। इस संबंध में मेडिकल अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी और जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. पीके बंसल का कहना है कि उनकी कोशिश रहती है कि मरीजों को बेहतर इलाज मिले। कई बार जल्दबाजी में तीमारदार मरीजों को बिना स्ट्रेचर के ही ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल में हर रोज 2500 से 3000 की ओपीडी रहती है, जबकि जिला अस्पताल की ओपीडी में 1500 से 2000 मरीज आते हैं।
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इलाज के लिए दिल्ली ले जाने की सलाह
मेरठ। जिला अस्पताल में शनिवार को नौ वर्षीय बालक को इलाज के लिए लाया गया तो अस्पताल स्टाफ ने उसे दिल्ली गुरुतेग बहादुर ले जाने की सलाह दे डाली। बाद में मामला प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके बंसल के संज्ञान में आने पर उन्होंने बच्चे को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाया। परिजनों को आश्वासन दिया कि उन्हें दिल्ली जाने की जरूरत नहीं है।
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