{"_id":"5c6f0dc0bdec22738004ffca","slug":"201550781888-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फिल्टर क्लीनिक का ट्रायल सफल, 36 जिलों के लिए बनेगा नजीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फिल्टर क्लीनिक का ट्रायल सफल, 36 जिलों के लिए बनेगा नजीर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महिला अस्पताल में फिल्टर क्लीनिक व्यवस्था लागू
51 सरकारी अस्पतालों में लागू करने की तैयारी
मेरठ। महिला जिला अस्पताल प्रदेश के अन्य अस्पतालों के लिए नजीर बनने जा रहा है। यहां फिल्टर क्लीनिक का ट्र्रायल सफल रहा है। अब इसे प्रदेश के 36 जिलों के 51 सरकारी चिकित्सालयों में लागू करने की तैयारी है।
लखनऊ से आई उत्तर प्रदेश हेल्थ सिस्टम स्ट्रेटनिंग प्रोजेक्ट (यूपीएचएसएसपी) की नौ लोगों की दो टीमों ने पिछले दिनों महिला जिला अस्पताल में फिल्टर क्लीनिक का ट्रायल किया था। इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई थी। महिला जिला अस्पताल में तीन फिल्टर क्लीनिक बनाए गए हैं। फिलहाल 15 से 20 प्रतिशत मरीज फिल्टर किए जा रहे हैं। करीब एक साल में 50 प्रतिशत मरीज फिल्टर करने की तैयारी है।
शासन द्वारा कराई गई सरकारी अस्पतालों की समीक्षा में यह बात सामने आई थी कि कई बार सामान्य खांसी, जुकाम और बुखार आदि के मरीजों को भी विशेषज्ञ चिकित्सक को देखना पड़ता है। अगर ऐसा किया जाए कि पर्चा काउंटर के बाद ऐसे मरीजों को फिल्टर क्लीनिक पर भेजा जाए, जहां दो चिकित्सक ऐसे मरीजों का परीक्षण करें, अगर वह जरूरी समझें तो उन्हें विशेषज्ञ के पास भेज दें और अगर जरूरी नहीं समझें तो उन्हें वहीं से परामर्श और दवाइयां लिख दें। इससे विशेषज्ञ मरीजों से अतिरिक्त मरीजों का बोझ हट जाएगा।
विज्ञापन
यह है मकसद
महिला जिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. मनीषा वर्मा ने बताया कि इसका मकसद यह है कि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण विशेषज्ञों के पास सिर्फ जरूरी मरीज ही भेजे जाएं, न कि मामूली रोग वाले मरीज, मसलन बुखार, खांसी-जुकाम आदि के। फिल्टर क्लीनिक के जरिये यह व्यवस्था की जा रही है कि ऐसे मरीज सामान्य एमबीबीएस चिकित्सकों को ही दिखाए जाएं।
हर साल आते हैं एक लाख मरीज
महिला जिला चिकित्सालय में हर साल करीब एक लाख मरीज आते हैं। रोजाना की ओपीडी 350 से 400 रहती है। महीने में इनकी संख्या साढ़े आठ से नौ हजार पहुंच जाती है। इससे पहले प्यारेलाल शर्मा जिला अस्पताल में फिल्टर क्लीनिक व्यवस्था लागू की गई थी। हालांकि वहां यह व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन ने अपनी तरफ से की थी। अब यह व्यवस्था प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से करने की तैयारी है।
यह है फिल्टर क्लीनिक
अभी तक होता यह है कि पर्चा काउंटर से सीधे पर्चे पर विशेषज्ञ चिकित्सक की ओपीडी का रूम नंबर लिख दिया जाता है। फिल्टर क्लीनिक के तहत मरीजों की छंटनी की जाएगी। फिल्टर का मतलब होता है छानना। छंटनी के बाद ही मरीज को संबंधित चिकित्सक के पास भेजा जाएगा।
विज्ञापन
51 सरकारी अस्पतालों में लागू करने की तैयारी
मेरठ। महिला जिला अस्पताल प्रदेश के अन्य अस्पतालों के लिए नजीर बनने जा रहा है। यहां फिल्टर क्लीनिक का ट्र्रायल सफल रहा है। अब इसे प्रदेश के 36 जिलों के 51 सरकारी चिकित्सालयों में लागू करने की तैयारी है।
लखनऊ से आई उत्तर प्रदेश हेल्थ सिस्टम स्ट्रेटनिंग प्रोजेक्ट (यूपीएचएसएसपी) की नौ लोगों की दो टीमों ने पिछले दिनों महिला जिला अस्पताल में फिल्टर क्लीनिक का ट्रायल किया था। इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई थी। महिला जिला अस्पताल में तीन फिल्टर क्लीनिक बनाए गए हैं। फिलहाल 15 से 20 प्रतिशत मरीज फिल्टर किए जा रहे हैं। करीब एक साल में 50 प्रतिशत मरीज फिल्टर करने की तैयारी है।
विज्ञापन
शासन द्वारा कराई गई सरकारी अस्पतालों की समीक्षा में यह बात सामने आई थी कि कई बार सामान्य खांसी, जुकाम और बुखार आदि के मरीजों को भी विशेषज्ञ चिकित्सक को देखना पड़ता है। अगर ऐसा किया जाए कि पर्चा काउंटर के बाद ऐसे मरीजों को फिल्टर क्लीनिक पर भेजा जाए, जहां दो चिकित्सक ऐसे मरीजों का परीक्षण करें, अगर वह जरूरी समझें तो उन्हें विशेषज्ञ के पास भेज दें और अगर जरूरी नहीं समझें तो उन्हें वहीं से परामर्श और दवाइयां लिख दें। इससे विशेषज्ञ मरीजों से अतिरिक्त मरीजों का बोझ हट जाएगा।
विज्ञापन
यह है मकसद
महिला जिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. मनीषा वर्मा ने बताया कि इसका मकसद यह है कि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण विशेषज्ञों के पास सिर्फ जरूरी मरीज ही भेजे जाएं, न कि मामूली रोग वाले मरीज, मसलन बुखार, खांसी-जुकाम आदि के। फिल्टर क्लीनिक के जरिये यह व्यवस्था की जा रही है कि ऐसे मरीज सामान्य एमबीबीएस चिकित्सकों को ही दिखाए जाएं।
हर साल आते हैं एक लाख मरीज
महिला जिला चिकित्सालय में हर साल करीब एक लाख मरीज आते हैं। रोजाना की ओपीडी 350 से 400 रहती है। महीने में इनकी संख्या साढ़े आठ से नौ हजार पहुंच जाती है। इससे पहले प्यारेलाल शर्मा जिला अस्पताल में फिल्टर क्लीनिक व्यवस्था लागू की गई थी। हालांकि वहां यह व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन ने अपनी तरफ से की थी। अब यह व्यवस्था प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से करने की तैयारी है।
यह है फिल्टर क्लीनिक
अभी तक होता यह है कि पर्चा काउंटर से सीधे पर्चे पर विशेषज्ञ चिकित्सक की ओपीडी का रूम नंबर लिख दिया जाता है। फिल्टर क्लीनिक के तहत मरीजों की छंटनी की जाएगी। फिल्टर का मतलब होता है छानना। छंटनी के बाद ही मरीज को संबंधित चिकित्सक के पास भेजा जाएगा।