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पॉलिथीन पर सख्त हुआ प्रशासन तो दिखने लगा असर
Updated Thu, 26 Jul 2018 02:24 AM IST
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पॉलिथीन के खिलाफ छापेमारी का दिख रहा असर
मेरठ। पॉलिथीन के खिलाफ शहर भर में छापेमारी की जा रही है। हालांकि अभी तक छह क्विंटल पॉलिथीन ही जब्त की गई हैं। 12 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। डीएम ने सभी विभागों के अधिकारियों को छापेमारी में लगाया हुआ है। ऐसे में छोटी दुकानों और ठेलों पर पॉलिथीन गायब होने लगी है।
डीएम ने दो स्तरीय कमेटी गठित की हुई है। जहां एक कमेटी में नगर निगम, प्रदूषण विभाग, डूडा, आवास विकास, स्वास्थ्य विभाग सहित कई विभागों के अधिकारियों को शामिल किया है। वहीं दूसरी कमेटी में एक एक मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी और नगर निगम सहित कई विभागों के अधिकारी शामिल हैं। छापेमारी का असर शहर भर में दिखाई दे रहा है। छोटे दुकानदार, फल, सब्जी ठेले वालों के पास से पॉलिथीन गायब होती दिख रही है। जबकि बड़े कुछ दुकानदार 50 माइक्रोन से अधिक की पॉलिथीन में सामान दे रहे हैं। वहीं अपर नगरायुक्त अलीहसन कर्नी ने बताया कि निगम के वाहन डिपो पर पॉलिथीन को जमा किया जाएगा। ताकि भविष्य में पॉलिथीन का रिकॉर्ड रखा जा सके।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल
अपर नगरायुक्त डॉ. नितिन मदान का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में है। अभियान में शामिल रहे सहायक वैज्ञानिक अरुण कुमार मिश्रा न तो पॉलिथीन बनाने वाली कंपनियों का उचित स्थान बताने को तैयार हैं और न ही कार्रवाई करने को। आरोप है कि सहायक वैज्ञानिक की कार्यप्रणाली संदिग्ध है। सिटी मजिस्ट्रेट ने इनकी कार्यप्रणाली से जिलाधिकारी को अवगत करा दिया है।
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मेरठ। पॉलिथीन के खिलाफ शहर भर में छापेमारी की जा रही है। हालांकि अभी तक छह क्विंटल पॉलिथीन ही जब्त की गई हैं। 12 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। डीएम ने सभी विभागों के अधिकारियों को छापेमारी में लगाया हुआ है। ऐसे में छोटी दुकानों और ठेलों पर पॉलिथीन गायब होने लगी है।
डीएम ने दो स्तरीय कमेटी गठित की हुई है। जहां एक कमेटी में नगर निगम, प्रदूषण विभाग, डूडा, आवास विकास, स्वास्थ्य विभाग सहित कई विभागों के अधिकारियों को शामिल किया है। वहीं दूसरी कमेटी में एक एक मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी और नगर निगम सहित कई विभागों के अधिकारी शामिल हैं। छापेमारी का असर शहर भर में दिखाई दे रहा है। छोटे दुकानदार, फल, सब्जी ठेले वालों के पास से पॉलिथीन गायब होती दिख रही है। जबकि बड़े कुछ दुकानदार 50 माइक्रोन से अधिक की पॉलिथीन में सामान दे रहे हैं। वहीं अपर नगरायुक्त अलीहसन कर्नी ने बताया कि निगम के वाहन डिपो पर पॉलिथीन को जमा किया जाएगा। ताकि भविष्य में पॉलिथीन का रिकॉर्ड रखा जा सके।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल
अपर नगरायुक्त डॉ. नितिन मदान का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में है। अभियान में शामिल रहे सहायक वैज्ञानिक अरुण कुमार मिश्रा न तो पॉलिथीन बनाने वाली कंपनियों का उचित स्थान बताने को तैयार हैं और न ही कार्रवाई करने को। आरोप है कि सहायक वैज्ञानिक की कार्यप्रणाली संदिग्ध है। सिटी मजिस्ट्रेट ने इनकी कार्यप्रणाली से जिलाधिकारी को अवगत करा दिया है।
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