{"_id":"5a68f5724f1c1b80268b6464","slug":"201516828018-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपनों पर सितम, बागियों पर करम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपनों पर सितम, बागियों पर करम
Updated Thu, 25 Jan 2018 02:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपनों पर सितम, बागियों पर करम
मेरठ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में भी असंतोष के स्वर फूटने शुरू हो गए हैं। प्रांतीय अधिवेशन में दिए गए दायित्व के बाद यह आक्रोश बढ़ने लगा है। परिषद के निष्ठावान कार्यकर्ताओें का कहना है कि परिषद के वरिष्ठ नेता काम नहीं बल्कि परिक्रमा और चापलूसी को देख दायित्व दे रहे हैं। इस बार ऐसे कई युवाओं को दायित्व दिया गया है, जिन्होंने छात्र संघ चुनाव में विपक्षी प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाते हुए भितरीघात किया।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का 58वां प्रांतीय अधिवेशन मेरठ में हुआ, जिसका सोमवार को समापन हुआ। इस अधिवेशन में प्रांतीय कार्यकारिणी से लेकर महानगर तक संगठन का पुनर्गठन करते हुए दायित्व सौंपे गये। इस गठन के बाद से ही असंतोष पैदा होना शुरू हो गया है। आरोप है कि डीएन कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में रालोद प्रत्याशी को खुलकर चुनाव लड़ाने वाले एक कार्यकर्ता को प्रदेश कार्यकारिणी में सदस्य बनाया। ऐसे ही 2016 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में रालोद से संयुक्त सचिव का चुनाव लड़े युवक को भी दायित्व दिया गया है। वहीं एक युवक जो कि इस बार छात्र संघ चुनाव में विश्वविद्यालय से टिकट मांग रहा था और न दिये जाने पर पार्टी प्रत्याशी के विरोध में काम किया, उसे भी प्रांत का सह प्रमुख बना दिया गया।
परिषद कार्यकर्ताओं का कहना है कि पिछले चार साल से लगातार संगठन में यही होता आ रहा है। इस सबके चलते ही इस बार छात्र संघ चुनाव में विद्यार्थी परिषद को हार झेलनी पड़ी। इन कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब पूरे मामले को शंकर आश्रम में संघ परिवार के बीच रखा जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
मेरठ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में भी असंतोष के स्वर फूटने शुरू हो गए हैं। प्रांतीय अधिवेशन में दिए गए दायित्व के बाद यह आक्रोश बढ़ने लगा है। परिषद के निष्ठावान कार्यकर्ताओें का कहना है कि परिषद के वरिष्ठ नेता काम नहीं बल्कि परिक्रमा और चापलूसी को देख दायित्व दे रहे हैं। इस बार ऐसे कई युवाओं को दायित्व दिया गया है, जिन्होंने छात्र संघ चुनाव में विपक्षी प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाते हुए भितरीघात किया।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का 58वां प्रांतीय अधिवेशन मेरठ में हुआ, जिसका सोमवार को समापन हुआ। इस अधिवेशन में प्रांतीय कार्यकारिणी से लेकर महानगर तक संगठन का पुनर्गठन करते हुए दायित्व सौंपे गये। इस गठन के बाद से ही असंतोष पैदा होना शुरू हो गया है। आरोप है कि डीएन कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में रालोद प्रत्याशी को खुलकर चुनाव लड़ाने वाले एक कार्यकर्ता को प्रदेश कार्यकारिणी में सदस्य बनाया। ऐसे ही 2016 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में रालोद से संयुक्त सचिव का चुनाव लड़े युवक को भी दायित्व दिया गया है। वहीं एक युवक जो कि इस बार छात्र संघ चुनाव में विश्वविद्यालय से टिकट मांग रहा था और न दिये जाने पर पार्टी प्रत्याशी के विरोध में काम किया, उसे भी प्रांत का सह प्रमुख बना दिया गया।
विज्ञापन
परिषद कार्यकर्ताओं का कहना है कि पिछले चार साल से लगातार संगठन में यही होता आ रहा है। इस सबके चलते ही इस बार छात्र संघ चुनाव में विद्यार्थी परिषद को हार झेलनी पड़ी। इन कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब पूरे मामले को शंकर आश्रम में संघ परिवार के बीच रखा जाएगा।
विज्ञापन