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टपक सिंचाई विधि से बचेंगे किसान
Updated Sat, 20 Jan 2018 02:40 AM IST
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नंगलामल मिल की पहल
टपक सिंचाई से बचेगा पानी और बढ़ेगा उत्पादन
- शुगर मिल ने सीसीएस विश्वविद्यालय में कराई गोष्ठी, टपक सिंचाई के लिए एक हजार हेक्टेयर रखा लक्ष्य
मेरठ। टपक सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन) विधि से किसानों को लाभांवित कर रहे नंगलामल शुगर मिल ने शुक्रवार को इस तकनीक को लेकर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के बृहस्पति भवन में किसान गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी में न केवल किसानों को टपक सिंचाई के महत्व की जानकारी दी गई बल्कि इस विधि के जरिए बेतरतीब जल दोहन को रोककर परंपरागत सिंचाई के मुकाबले डेढ़ गुणा उत्पादन लेने की अपील की गई। मवाना शुगर मिल के ऑपरेशन हेड आर के गंगवार ने बताया कि कंपनी ने इस साल टपक सिंचाई विधि का एक हजार हेक्टेयर लक्ष्य निर्धारित किया है। महाराष्ट्र से आए नेटाफिम कंपनी के वरिष्ठ गन्ना वैज्ञानिक अरुण देशमुख ने बताया कि तेजी से डार्क जोन में बदलते जा रहे ब्लाकों में यह विधि किसी रामबाण से कम नहीं हैं। आने वाले समय में किसानों को टपक सिंचाई ही बचाएगी। इस विधि से किसान कम खर्च में बंपर फसल प्राप्त कर सकते हैं। नंगलामल मिल के यूनिट हेड वाईडी शर्मा और महाप्रबंधक केन एलडी शर्मा ने भी अपने विचार रखें। जिला कृषि अधिकारी प्रमोद सिरोही ने बताया टपक सिंचाई विधि के जरिए किसान खाद का भी उचित प्रबंधन कर सकते हैं। गोष्ठी में पहुंचे किसान अंकुर चौहान, रवींद्र सिंह, सत्यप्रकाश, ओमपाल सिंह आदि ने भी योजना के बारे में सवाल किए।
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टपक सिंचाई से बचेगा पानी और बढ़ेगा उत्पादन
- शुगर मिल ने सीसीएस विश्वविद्यालय में कराई गोष्ठी, टपक सिंचाई के लिए एक हजार हेक्टेयर रखा लक्ष्य
मेरठ। टपक सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन) विधि से किसानों को लाभांवित कर रहे नंगलामल शुगर मिल ने शुक्रवार को इस तकनीक को लेकर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के बृहस्पति भवन में किसान गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी में न केवल किसानों को टपक सिंचाई के महत्व की जानकारी दी गई बल्कि इस विधि के जरिए बेतरतीब जल दोहन को रोककर परंपरागत सिंचाई के मुकाबले डेढ़ गुणा उत्पादन लेने की अपील की गई। मवाना शुगर मिल के ऑपरेशन हेड आर के गंगवार ने बताया कि कंपनी ने इस साल टपक सिंचाई विधि का एक हजार हेक्टेयर लक्ष्य निर्धारित किया है। महाराष्ट्र से आए नेटाफिम कंपनी के वरिष्ठ गन्ना वैज्ञानिक अरुण देशमुख ने बताया कि तेजी से डार्क जोन में बदलते जा रहे ब्लाकों में यह विधि किसी रामबाण से कम नहीं हैं। आने वाले समय में किसानों को टपक सिंचाई ही बचाएगी। इस विधि से किसान कम खर्च में बंपर फसल प्राप्त कर सकते हैं। नंगलामल मिल के यूनिट हेड वाईडी शर्मा और महाप्रबंधक केन एलडी शर्मा ने भी अपने विचार रखें। जिला कृषि अधिकारी प्रमोद सिरोही ने बताया टपक सिंचाई विधि के जरिए किसान खाद का भी उचित प्रबंधन कर सकते हैं। गोष्ठी में पहुंचे किसान अंकुर चौहान, रवींद्र सिंह, सत्यप्रकाश, ओमपाल सिंह आदि ने भी योजना के बारे में सवाल किए।