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अक्तूबर से बढ़ सकते हैं दवाओं के दाम
Updated Fri, 07 Jul 2017 02:39 AM IST
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- अक्तूबर से बढ़ सकते हैं दवाओं के दाम
- जीएसटी से पहले देते थे 5-10 प्रतिशत की छूट
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
अक्तूबर से दवाओं के दाम बढ़ सकते हैं, ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं। दरअसल, कंपनियां और दवा विक्रेता सितंबर तक पिछला स्टॉक निकालेंगे। इस स्टॉक को वे एमआरपी से ज्यादा नहीं बेच सकते, जबकि जीएसटी के बाद दवाओं के मुनाफे में 5 से 7 प्रतिशत की कमी आएगी। अभी मुनाफे में आने वाली इस कमी को कंपनियां वहन कर रही हैं, लेकिन आने वाले दिनों में वे दवा के रेट में थोड़ी बढ़ोतरी कर अपने मुनाफे को पहले की तरह बराबर करने की कोशिश कर सकती हैं।
पहले रिटेलर दवाओं के बिल में 5 से 10 प्रतिशत की छूट कर देते थे, लेकिन अब जीएसटी के बाद छूट लगभग बंद कर दी गई है। दूसरी तरफ, बृहस्पतिवार को भी कई दवा कंपनियों ने अपनी रेट लिस्ट जारी की, वे भी मुनाफे की कमी को खुद ही वहन करेंगी। इसे थोक और खुदरा दवा विक्रेताओं को नहीं झेलना पड़ेगा। ऐसे में दवा विक्रेता कयास लगा रहे हैं कि कंपनियां अक्तूबर से दवाओं की कीमत बढ़ा सकती हैं। यदि कंपनियों ने दवाओं का खुदरा मूल्य बढ़ाया तो यह ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। दवा विक्रेता मनोज अग्रवाल ने बताया कि कई दवा कंपनियों की रेट लिस्ट आ गई है। कंपनियां नुकसान की भरपाई कर रही हैं।
एमबीबीएस डॉक्टर के नाम ही काट सकेंगे बिल
दवा विक्रेता मनोज अग्रवाल ने बताया कि यह भी आदेश आया है कि थोक विक्रेता एमबीबीएस डॉक्टरों के नाम ही बिल काटे। उन्होंने बताया कि यह नियम पहले से था, लेकिन अब इसे सख्ती से अमल में लाने की हिदायत दी गई है।
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- जीएसटी से पहले देते थे 5-10 प्रतिशत की छूट
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
अक्तूबर से दवाओं के दाम बढ़ सकते हैं, ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं। दरअसल, कंपनियां और दवा विक्रेता सितंबर तक पिछला स्टॉक निकालेंगे। इस स्टॉक को वे एमआरपी से ज्यादा नहीं बेच सकते, जबकि जीएसटी के बाद दवाओं के मुनाफे में 5 से 7 प्रतिशत की कमी आएगी। अभी मुनाफे में आने वाली इस कमी को कंपनियां वहन कर रही हैं, लेकिन आने वाले दिनों में वे दवा के रेट में थोड़ी बढ़ोतरी कर अपने मुनाफे को पहले की तरह बराबर करने की कोशिश कर सकती हैं।
पहले रिटेलर दवाओं के बिल में 5 से 10 प्रतिशत की छूट कर देते थे, लेकिन अब जीएसटी के बाद छूट लगभग बंद कर दी गई है। दूसरी तरफ, बृहस्पतिवार को भी कई दवा कंपनियों ने अपनी रेट लिस्ट जारी की, वे भी मुनाफे की कमी को खुद ही वहन करेंगी। इसे थोक और खुदरा दवा विक्रेताओं को नहीं झेलना पड़ेगा। ऐसे में दवा विक्रेता कयास लगा रहे हैं कि कंपनियां अक्तूबर से दवाओं की कीमत बढ़ा सकती हैं। यदि कंपनियों ने दवाओं का खुदरा मूल्य बढ़ाया तो यह ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। दवा विक्रेता मनोज अग्रवाल ने बताया कि कई दवा कंपनियों की रेट लिस्ट आ गई है। कंपनियां नुकसान की भरपाई कर रही हैं।
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एमबीबीएस डॉक्टर के नाम ही काट सकेंगे बिल
दवा विक्रेता मनोज अग्रवाल ने बताया कि यह भी आदेश आया है कि थोक विक्रेता एमबीबीएस डॉक्टरों के नाम ही बिल काटे। उन्होंने बताया कि यह नियम पहले से था, लेकिन अब इसे सख्ती से अमल में लाने की हिदायत दी गई है।
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