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मंदी के चलते पायदान उद्योग से दूर हुए दो सौ परिवार

Thu, 03 Oct 2019 02:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Oct 2019 02:15 AM IST
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200 families far from notch industry due to recession
लावड़-लावड़ में पायदान की बुनाई करते हुनरमंद। - फोटो : LAWARD
कंबल उद्योग के बाद लावड़ कस्बे की पहचान बना पायदान उद्योग भी मंदी की मार झेलने को मजबूर है। जिसके चलते इस उद्योग से किनारा कर कई परिवार बाहर नौकरी करने चले गए हैं। लावड़ कस्बे का कंबल उद्योग पूरे भारत वर्ष में मशहूर था। यहां के हरिद्वारी कंबल को खादी ग्राम उद्योग खरीदता था। यह कंबल देश की सरहद पर तैनात जवानों एवं जेल में कैदियों के लिए भेजा जाता था। विदेशों से हल्के एवं मखमली कंबल आ जाने के बाद खादी ग्राम उद्योग ने इस कंबल को खरीदना बंद कर दिया। जिस कारण मोमीन अंसार बिरादरी के परिवारों को खाने के लाले पड़ गए थे।
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कंबल के बाद पायदान उद्योग ने बनाई जगह

हरिद्वारी कंबल उद्योग बंद होने के बाद यहां के हुनरमंदों ने पायदान उद्योग को रोजी-रोटी का साधन बनाया। पानीपत से आने वाले कच्चे माल को तैयार कर इस बिरादरी के सैकड़ों लोग अपने परिवार का भरण पोषण करने लगे। इस कारोबार से पुरुष से लेकर महिलाएं भी जुड़ीं। जिससे देखते ही देखते इस उद्योग ने कस्बे को नई पहचान दी।
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हुनरमंद रईस ने की थी शुरुआत

कस्बा निवासी रईस ने सबसे पहले इस कारोबार की शुरूआत की। उस दौरान उनके साथ मात्र 4-5 परिवार जुड़े। इस उद्योग को बढ़ाने एवं बिरादरी के लोगों को इससे जोड़ने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। उनकी मेहनत रंग लाई और देखते ही देखते बिरादरी का हर परिवार से उद्योग से जुड़ गया। पुरुषों ने ताना एवं बुनाई का कार्य संभाला तो महिलाओं ने सिलाई का जिम्मा उठाकर पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने का कार्य किया।
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मंदी एवं जीएसटी से उद्योग पर पड़ा असर

पिछले वर्ष तक यह उद्योग काफी मजबूत स्थिति में था। इस वर्ष यह मंदी के दौर से गुजर रहा है। कस्बा निवासी रमीज, आरिफ फैजी ने बताया कि पानीपत से आने वाले कच्चे माल पर जीएसटी लगता है। वहीं, तैयार माल पर भी जीएसटी लगता है। जिससे उद्योग पर काफी असर पड़ा है। वहीं, मंदी भी इस उद्योग के आड़े आई है। हुनरमंदों ने बताया कि पिछले वर्ष दीपावली तक उनके पास काफी आर्डर था। हालांकि इस बार कम ही आर्डर आया है। जिस कारण आज इस कारोबार से जुड़े 300 परिवार में से मात्र 100 ही पायदान बना रहे हैं। इसे छोड़ने वाले परिवार पंजाब एवं अन्य राज्यों में जाकर नौकरी एवं अन्य कारोबार करने के लिए मजबूर हैं।
नाम दाम
बिंदी पट्टा 17.50
कोटन बिंदी 22.00
चेन पट्टा रंगीला 22.00
चैन 15.00
पेपर 16.00
नोट- सभी के दाम रुपये में
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