1971 के युद्ध में पाइन डिवीजन ने रचा था इतिहास, इनके सामने पाकिस्तानी सेना का पड़ा था झुकना
जैसोर की जीत का जश्न सेना की तरफ से 16 और 17 दिसंबर को विजय दिवस के रूप में मनाया जाएगा। युद्ध के जांबाजों की याद में इंडिया गेट के वार मेमोरियल से 16 दिसंबर को मोदीनगर के एमएम कॉलेज में विजय मशाल आएगी। इसके बाद 17 दिसंबर को मेरठ छावनी में विजय दिवस मनाया जाएगा।
प्रत्येक वर्ष 16 दिसंबर को सन 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की जीत के कारण विजय दिवस मनाया जाता है। इस युद्ध के अंत में पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी बलों के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एके नियाजी ने भारत के पूर्वी सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जगत सिंह अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद 17 दिसंबर को 93000 पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बनाया गया।
3900 भारतीय सैनिक हुए थे शहीद
साल 1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी, जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान आजाद हो गया और बांग्लादेश का निर्माण हुआ। इस युद्ध में लगभग 3900 भारतीय सैनिक शहीद हो गए। 9851 के करीब बुरी तरह से घायल हो गए थे। युद्ध में सेना की नाइन डिवीजन की अहम भूमिका थी।
14 दिन तक चले युद्ध के बाद सेना की नाइन डिवीजन जैसोर पहुंची तो लड़ाई में भारतीय सेना हावी होती चली गई। पांच दिसंबर को भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के दांत खट्टे कर दिए। यहीं की ताकत के बूते भारतीय सेना को जीत हासिल हुई। हर साल पाइन डिव में जीत के योद्धाओं के पराक्रम की कहानियां सुनाई जाती हैं। शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए जाते हैं। वीर नारियों को सम्मानित किया जाता है।
भारत-पाक युद्ध 1971 में मेरठ के शहीद
ले. कर्नल प्रभात कुमार, कैप्टन मदन पाल, ले. वीके सहगल, ले. पुष्पेंद्र वेद, नायक सूबेदार मामचंद, हवलदार हरपाल सिंह, लांस नायक अलबेल सिंह, सिपाही रामपाल सिंह, सिपाही राजेंद्र सिंह, सिपाही महेंद्र सिंह, सिपाही सीताराम, सीमेन ओम प्रकाश, सिपाही हुसैन सिंह, सिपाही भोपाल सिंह, सिपाही जय प्रकाश, सिपाही सेवाराम, सिपाही राजबीर सिंह, सिपाही ओमपाल सिंह, पाल सिंह।