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प्रशासन सहयोग देता तो दो साल पहले खाली हो जाता हिंदी भवन

Mon, 22 Apr 2019 02:11 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 22 Apr 2019 02:11 AM IST
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प्रशासन सहयोग देता तो दो साल पहले खाली हो जाता हिंदी भवन
प्रशासन सहयोग देता तो दो साल पहले खाली हो जाता हिंदी भवन
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अपर लघु वाद न्यायधीश कर चुके हैं दो साल पहले डेयरी हटाने का आदेश
इस दौरान सिर्फ सिविल डिफेंस से ही समिति खाली करा पाई हिंदी भवन
मेरठ। पुरुषोत्तम दास टंडन हिंदी भवन को बचाने और जीर्णोद्धार को लेकर समिति भले ही लगातार प्रयास कर रही हो। लेकिन नगर निगम और प्रशासन ने समय रहते सहयोग दिया होता, तो दो साल पहले हिंदी भवन परिसर से डेयरी को बाहर कर दिया गया होता। क्योंकि अपर लघु वाद न्यायालय से दो साल पहले डेयरी संचालक को जगह खाली करने के आदेश हो चुके हैं।
54 साल पहले समिति के नाम हुई रजिस्ट्री
पुरुषोत्तम दास टंडन हिंदी भवन को हिंदी भवन समिति (पंजीकृत) द्वारा संचालित किया जाता है। समिति द्वारा 27 फरवरी 1965 को इस भवन की रजिस्ट्री कराई गई थी। तब इस समिति में रामेश्वर दयाल एडवोकेट प्रधान, बिशंबर सहाय प्रेम सचिव और सुंदर लाल जैन कोषाध्यक्ष थे। समिति ने इस हिंदी भवन में लाइब्रेरी खोलने के साथ हिंदी साहित्य और साहित्यकारों को बढ़ावा देने के लिए न केवल हिंदी साहित्य की किताबों की संख्या लाइब्रेरी में बढ़ाई, बल्कि यहां पर हिंदी साहित्य पर गोष्ठी और कवि सम्मेलन आदि के साथ हिंदी के मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान समारोह आदि कार्यक्रम भी आयोजित कराने शुरू किए। यही नहीं अंतर स्कूल चल वैजयंती कविता प्रतियोगिता का भी आयोजन इस हिंदी भवन में हुआ करता था।
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समिति ने आय बढ़ाने के खोजे साधन
समिति ने हिंदी भवन संचालन में आने वाले खर्च को वहन करने के लिए इसकी आय बढ़ाने के साधन खोजे। जिसके तहत सिविल डिफेंस (नागरिक सुरक्षा कोर) को कार्यालय के लिए भवन का एक हिस्सा किराये पर दे दिया। साथ ही डेयरी संचालक से भी किराया वसूलना शुरू कर दिया।
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भवन जर्जर हुआ तो हुई खाली कराने की कवायद
इस बीच हिंदी भवन का बिल्डिंग जब जर्जर हुई तो नए सिरे से इसके जीर्णोद्धार की कवायद शुरू हुई। जिसमें डेयरी संचालक को डेयरी हटाने और सिविल डिफेंस को भी कार्यालय खाली करने के लिए कहा गया। लेकिन डेयरी संचालक ने जगह खाली करने से इंकार कर दिया।
डेयरी संचालक के खिलाफ किया वाद दायर
समिति की तरफ से डेयरी संचालक के खिलाफ अपर लघु वाद न्यायालय में वाद दायर किया गया। जिस पर 13 अप्रैल 2017 को मजिस्ट्रेट ने फैसला सुनाते हुए दो माह के भीतर डेयरी संचालक को जगह खाली करने का आदेश दिया। जिस पर जब काफी समय तक डेयरी संचालक ने जगह खाली नहीं की तो समिति की तरफ से 10 जनवरी 2018 को पत्र लिखते हुए डेयरी हटवाने की मांग की गई। इसके अलावा मौखिक रुप से जिला प्रशासन से भी इस मामले में गुहार लगाई गई। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
डेयरी संचालक ने दायर की हुई है अपील
इस मामले में हो रही देरी हिंदी भवन समिति के लिए भारी पड़ सकती है। क्योंकि अपर लघुवाद न्यायालय के आदेश के खिलाफ डेयरी संचालक ने ऊपर की कोर्ट में अपील दायर की हुई है। यह बात अलग है कि अभी तक इस पर सुनवाई नहीं हुई है। लेकिन समिति को आशंका है कि यदि स्टे आदि मिल गया तो मामला लंबा खिंच सकता है।
सिविल डिफेंस ने खाली कर दिया कार्यालय
इस दौरान सिविल डिफेंस ने अक्तूबर 2018 में हिंदी भवन से अपना कार्यालय टाउन हाल घंटाघर शिफ्ट करते हुए जगह खाली कर दी। जिसके बाद समिति ने इस जर्जर भवन को गिरा दिया।

ऑडिटोरियम और ई-लाइब्रेरी का है प्रस्ताव
हिंदी भवन समिति द्वारा पुराने भवन को गिराने के बाद नक्शा तैयार कराकर एमडीए में उसे स्वीकृति के लिए जमा किया गया। जिसमें भूतल पर करीब 500 सीटों का एक ऑडिटोरियम और प्रथम तल पर ई-लाइब्रेरी सहित पुराने हिंदी साहित्य की किताबों से युक्त बड़ी लाइब्रेरी बनाने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया। लेकिन एमडीए ने 12 मीटर चौड़ी सड़क के विपरीत 10.70 मीटर चौड़ी सड़क होने पर नक्शा स्वीकृत करने में अड़ंगा लगा दिया। हालांकि समिति लगातार एमडीए में नक्शा स्वीकृत कराने का प्रयास कर रही है।
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