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नानक सब किछ तुमरे हाथ में
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गुरुद्वारा कीर्तनगढ़ साहिब लेखा नगर में हुआ अरदास समागम
शिरोमणि रागी भाई जसबीर सिंह और पुलवामा के शहीदों को दी श्रद्धांजलि
मेरठ। गुरुद्वारा कीर्तनगढ़ साहिब लेखा नगर में रविवार को विशेष अरदास समागम का आयोजन किया गया। जिसमें शिरोमणि रागी भाई जसबीर सिंह (पठानकोट) और पुलवामा के शहीद जवानों की आत्मिक शांति के लिए मेरठ की समूह संगत ने अरदास की।
सर्वप्रथम ज्ञानी गुरविंद्र सिंह ने रहिरास साहिब का पाठ किया। इसके उपरांत श्री आनंदपुर साहिब के रागी भाई सुखविंद्र सिंह ने ‘अरदास सुनो अरदास’ शबद गायन किया। देहरादून के रागी भाई अनुज सिंह ने वैराग भई कीर्तन द्वारा संगत को निहाल किया। अरदास समागम में मुख्य रूप से प्रसिद्ध रागी भाई अमरजीत सिंह (पटियाला वाले) रागी जत्थे ने शबद गायन कर संगत को निहाल किया। रागी भाई अमरजीत सिंह ने ‘जगजीवन ऐस सुपने जैसा’, ‘नानक सब किछ तुमरे हाथ में’, ‘सबना का मां प्यो आप हैं’ आदि शबद गायन किए। शहीदों की याद में शबद सुनकर समूह संगत रो पड़ी। साथ ही संगत ने रागी भाई जसबीर सिंह और शहीदों के लिए विशेष अरदास की। इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में गुरुद्वारा प्रबंधक गुरविंद्र सिंह, आज्ञापाल सिंह, जसबीर सिंह नय्यर, अमरजीत बिहारी, हरमीत सिंह ‘मीत’ सन्नी, संदीप, कुंदन आदि का सहयोग रहा।
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गुरुद्वारा कीर्तनगढ़ साहिब लेखा नगर में हुआ अरदास समागम
शिरोमणि रागी भाई जसबीर सिंह और पुलवामा के शहीदों को दी श्रद्धांजलि
मेरठ। गुरुद्वारा कीर्तनगढ़ साहिब लेखा नगर में रविवार को विशेष अरदास समागम का आयोजन किया गया। जिसमें शिरोमणि रागी भाई जसबीर सिंह (पठानकोट) और पुलवामा के शहीद जवानों की आत्मिक शांति के लिए मेरठ की समूह संगत ने अरदास की।
सर्वप्रथम ज्ञानी गुरविंद्र सिंह ने रहिरास साहिब का पाठ किया। इसके उपरांत श्री आनंदपुर साहिब के रागी भाई सुखविंद्र सिंह ने ‘अरदास सुनो अरदास’ शबद गायन किया। देहरादून के रागी भाई अनुज सिंह ने वैराग भई कीर्तन द्वारा संगत को निहाल किया। अरदास समागम में मुख्य रूप से प्रसिद्ध रागी भाई अमरजीत सिंह (पटियाला वाले) रागी जत्थे ने शबद गायन कर संगत को निहाल किया। रागी भाई अमरजीत सिंह ने ‘जगजीवन ऐस सुपने जैसा’, ‘नानक सब किछ तुमरे हाथ में’, ‘सबना का मां प्यो आप हैं’ आदि शबद गायन किए। शहीदों की याद में शबद सुनकर समूह संगत रो पड़ी। साथ ही संगत ने रागी भाई जसबीर सिंह और शहीदों के लिए विशेष अरदास की। इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में गुरुद्वारा प्रबंधक गुरविंद्र सिंह, आज्ञापाल सिंह, जसबीर सिंह नय्यर, अमरजीत बिहारी, हरमीत सिंह ‘मीत’ सन्नी, संदीप, कुंदन आदि का सहयोग रहा।
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