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राष्ट्रादय में आधी आबादी में दिखा जोश
Updated Mon, 26 Feb 2018 02:32 AM IST
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राष्ट्रनिर्माण संदेश के आगे आराम नतमस्तक
मेरठ। राष्ट्रनिर्माण व एकता के संदेश के आगे रविवार क ी छुट्टी, घर का काम भी पीछे छूट गया। नौकरीपेशा महिलाओं को घर के काम के लिए रविवार की छुट्टी का इंतजार नहीं था। न ही घरेलू महिलाएं बच्चों की छुट्टी के कारण आराम की तलाश में थीं। महिलाएं जल्दी-जल्दी घर के काम खत्म कर समागम स्थल पहुंच गईं। देहात और दूरदराज के इलाकों से महिलाएं भी सफेद सलवार-सूट पहनकर आयोजन में शामिल हुईं। सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत को सुनने के लिए छात्राओं, युवतियों व हर आयु वर्ग की महिलाओं में उत्साह दिखा। महिलाएं सहेली, बेटी, सास, बहू के साथ समागम स्थल पर नजर आईं। सुबह 11 बजे से ही महिलाओं की भीड़ स्थल पर पहुंचने लगी। आयोजन को पूर्णविराम देने के बाद ही वह कुर्सी से उठीं। सेविका समिति की कार्यकर्ताओं ने महिला लॉबी की पूरी व्यवस्था संभाली।
मिली बधाई तो जताई खुशी
मंच से सर संघचालक ने अपने भाषण में महिलाओं, युवतियों को आयोजन में पूरा सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया तो महिला लॉबी में बैठी महिलाओं के चेहरे पर सफलता की मुस्कुराहट छा गई। डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि पूरे समागम में माताओं व भगिनियों ने पूर्ण सहयोग दिया। तीन लाख स्वयंसेवकों के भोजन की व्यवस्था के लिए हर घर से सस्नेह भोजन बनकर आया। आयोजन स्थल को सुंदर रंगोली सज्जा से सजाने में माताओं ने निस्वार्थ भाव से श्रम किया है।
कुलपति की पत्नी भी पहुंचीं
राष्ट्रोदय समागम में चौ. चरण सिंह विवि के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की पत्नी सविता तनेजा वरिष्ठ स्वयं सेविकाओं के साथ समागम स्थल पर पहुंचीं। आम महिलाओं की तरह उन्होंने पंक्ति में बैठकर भाषण सुना। सविता तनेजा ने क हा कि बचपन से ही मैंने संघ के अनुशासन को परिवार में देखा है। पिताजी व परिवार के अन्य पुरुष लंबे समय से संघ की शाखाओं में जाते रहे हैं। आज पहली बार संघ प्रमुख को सुनने का अवसर मिला। संघ के प्रति महिलाओं में भी रुचि बढ़ रही है।
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तीन पीढ़ियां संघ में शामिल
शास्त्रीनगर निवासी ऊषा के परिवार की तीन पीढ़ियां संघ में शामिल हैं। 73 वर्षीय ऊषा बहू और सहेलियों के साथ आयोजन में पहुंचीं। ऊषा स्वयं सेविका समिति की वरिष्ठ सदस्य हैं। समिति के पथ संचलन में भी शामिल होती हैं। उषा ने बताया संघ हमें एकता, राष्ट्रनिर्माण का संदेश देता है। यहां धर्म की जंग नहीं हैं, बल्कि यह एक विचारधारा है।
आयोजन देख मिली खुशी
शहर की हजारों महिलाओं ने जब टीवी पर राष्ट्रोदय समागम को देखा तो खुश हुईं। स्वयंसेवकों के लिए महिलाओं ने पूड़ी, परांठे बनाकर भेजे थे। जब उन्होेंने टीवी पर स्वयंसेवकों की इतनी बड़ी संख्या देखी तो लगा कि हमारी मेहनत सफल हो गई।
ये महिलाएं भी रहीं शामिल
भाजपा नेता कांता कर्दम अपनी दोनों बेटियों के साथ आयोजन में पहुंचीं। एमएलसी डॉ. सरोजनी अग्रवाल, ज्योत्सना गुर्जर, पूर्व महापौर मधु गुर्जर, ममता त्यागी, अंजू वारियर, सोनिका तोमर, प्रीति रस्तोगी सहित स्वयं सेविकाएं व महिला मोर्चा की अन्य महिलाएं शामिल रहीं।
हापुड़ से आई हूं शामिल होने
हापुड़ से केवल इस आयोजन में शामिल होने आई हूं। पिछले पांच सालों से सेविका समिति में सक्रिय हूं। आयोजन में महिला विंग में व्यवस्था बनाने का प्रभार मिला है। बीए सेकेंड ईयर की छात्रा हूं। आगे भी देशसेवा में सक्रिय रहूंगी। आज पहली बार मोहन भागवत जी को सुनने का अवसर मिला है। -ज्योति चड्डा
तीन साल से हूं सक्रिय
किला परीक्षितगढ़ से आयोजन में आई हूं। पिछले तीन सालों से सेविका समिति से जुड़ी हूं। मेरे कॉलेज की कुछ छात्राएं सेविका समिति से जुड़ी हैं। उनको देखकर मैंने भी सेविका समिति में भाग लिया। राष्ट्रनिर्माण और एकता का संदेश इतना अच्छा लगा कि मैं इससे अलग नहीं हो पाई। आगे भी जुड़ी रहूंगी। -आरती
छह साल से जुड़ी हूं
मवाना से आई हूं। छह सालों से सेविका समिति से जुड़ी हूं। संघ एक राष्ट्र का संदेश देता है, जो एकता का प्रतीक है। आज डॉ. मोहन भागवत को सुनने आई हूं। शिविर में भी भाग लेती हूं। परिवार के अन्य सदस्य भी शाखा में जाते हैं। -ज्योति मलिक
परिवार के साथ लिया भाग
कंकरखेड़ा से आयोजन में शामिल होने आई हूं। परिवार से अन्य लोग भी आए हैं। संघ हमेशा समाजसेवा और धर्मसेवा का संदेश देता है। यहां जाति वर्ग का कोई भेद नहीं। पहली बार सर संघचालक को सुनने का अवसर मिला है। -मानसी
संगठन का अनुशासन है पसंद
सेविका समिति से लंबे समय से जुड़ी हूं। संगठन का अनुशासन मुझे काफी पसंद है। आयोजन स्थल पर रंगोली बनाने में सहयोग दिया। परिवार से स्वयंसेवकों के लिए भोजन भी दिया है। हर परिवार को संघ आयोजन में शामिल होना चाहिए। -वर्षा
खास बातें
- महिलाओं ने भी निभाई भूमिका, छुट्टी का आराम छोड़ डॉ. मोहन भागवत को सुनने पहुंची
- राष्ट्रोदय में सेविका समिति और महिला मोर्चा की महिलाएं भी हुईं शामिल
मेरठ। राष्ट्रनिर्माण व एकता के संदेश के आगे रविवार क ी छुट्टी, घर का काम भी पीछे छूट गया। नौकरीपेशा महिलाओं को घर के काम के लिए रविवार की छुट्टी का इंतजार नहीं था। न ही घरेलू महिलाएं बच्चों की छुट्टी के कारण आराम की तलाश में थीं। महिलाएं जल्दी-जल्दी घर के काम खत्म कर समागम स्थल पहुंच गईं। देहात और दूरदराज के इलाकों से महिलाएं भी सफेद सलवार-सूट पहनकर आयोजन में शामिल हुईं। सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत को सुनने के लिए छात्राओं, युवतियों व हर आयु वर्ग की महिलाओं में उत्साह दिखा। महिलाएं सहेली, बेटी, सास, बहू के साथ समागम स्थल पर नजर आईं। सुबह 11 बजे से ही महिलाओं की भीड़ स्थल पर पहुंचने लगी। आयोजन को पूर्णविराम देने के बाद ही वह कुर्सी से उठीं। सेविका समिति की कार्यकर्ताओं ने महिला लॉबी की पूरी व्यवस्था संभाली।
मिली बधाई तो जताई खुशी
मंच से सर संघचालक ने अपने भाषण में महिलाओं, युवतियों को आयोजन में पूरा सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया तो महिला लॉबी में बैठी महिलाओं के चेहरे पर सफलता की मुस्कुराहट छा गई। डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि पूरे समागम में माताओं व भगिनियों ने पूर्ण सहयोग दिया। तीन लाख स्वयंसेवकों के भोजन की व्यवस्था के लिए हर घर से सस्नेह भोजन बनकर आया। आयोजन स्थल को सुंदर रंगोली सज्जा से सजाने में माताओं ने निस्वार्थ भाव से श्रम किया है।
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कुलपति की पत्नी भी पहुंचीं
राष्ट्रोदय समागम में चौ. चरण सिंह विवि के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की पत्नी सविता तनेजा वरिष्ठ स्वयं सेविकाओं के साथ समागम स्थल पर पहुंचीं। आम महिलाओं की तरह उन्होंने पंक्ति में बैठकर भाषण सुना। सविता तनेजा ने क हा कि बचपन से ही मैंने संघ के अनुशासन को परिवार में देखा है। पिताजी व परिवार के अन्य पुरुष लंबे समय से संघ की शाखाओं में जाते रहे हैं। आज पहली बार संघ प्रमुख को सुनने का अवसर मिला। संघ के प्रति महिलाओं में भी रुचि बढ़ रही है।
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तीन पीढ़ियां संघ में शामिल
शास्त्रीनगर निवासी ऊषा के परिवार की तीन पीढ़ियां संघ में शामिल हैं। 73 वर्षीय ऊषा बहू और सहेलियों के साथ आयोजन में पहुंचीं। ऊषा स्वयं सेविका समिति की वरिष्ठ सदस्य हैं। समिति के पथ संचलन में भी शामिल होती हैं। उषा ने बताया संघ हमें एकता, राष्ट्रनिर्माण का संदेश देता है। यहां धर्म की जंग नहीं हैं, बल्कि यह एक विचारधारा है।
आयोजन देख मिली खुशी
शहर की हजारों महिलाओं ने जब टीवी पर राष्ट्रोदय समागम को देखा तो खुश हुईं। स्वयंसेवकों के लिए महिलाओं ने पूड़ी, परांठे बनाकर भेजे थे। जब उन्होेंने टीवी पर स्वयंसेवकों की इतनी बड़ी संख्या देखी तो लगा कि हमारी मेहनत सफल हो गई।
ये महिलाएं भी रहीं शामिल
भाजपा नेता कांता कर्दम अपनी दोनों बेटियों के साथ आयोजन में पहुंचीं। एमएलसी डॉ. सरोजनी अग्रवाल, ज्योत्सना गुर्जर, पूर्व महापौर मधु गुर्जर, ममता त्यागी, अंजू वारियर, सोनिका तोमर, प्रीति रस्तोगी सहित स्वयं सेविकाएं व महिला मोर्चा की अन्य महिलाएं शामिल रहीं।
हापुड़ से आई हूं शामिल होने
हापुड़ से केवल इस आयोजन में शामिल होने आई हूं। पिछले पांच सालों से सेविका समिति में सक्रिय हूं। आयोजन में महिला विंग में व्यवस्था बनाने का प्रभार मिला है। बीए सेकेंड ईयर की छात्रा हूं। आगे भी देशसेवा में सक्रिय रहूंगी। आज पहली बार मोहन भागवत जी को सुनने का अवसर मिला है। -ज्योति चड्डा
तीन साल से हूं सक्रिय
किला परीक्षितगढ़ से आयोजन में आई हूं। पिछले तीन सालों से सेविका समिति से जुड़ी हूं। मेरे कॉलेज की कुछ छात्राएं सेविका समिति से जुड़ी हैं। उनको देखकर मैंने भी सेविका समिति में भाग लिया। राष्ट्रनिर्माण और एकता का संदेश इतना अच्छा लगा कि मैं इससे अलग नहीं हो पाई। आगे भी जुड़ी रहूंगी। -आरती
छह साल से जुड़ी हूं
मवाना से आई हूं। छह सालों से सेविका समिति से जुड़ी हूं। संघ एक राष्ट्र का संदेश देता है, जो एकता का प्रतीक है। आज डॉ. मोहन भागवत को सुनने आई हूं। शिविर में भी भाग लेती हूं। परिवार के अन्य सदस्य भी शाखा में जाते हैं। -ज्योति मलिक
परिवार के साथ लिया भाग
कंकरखेड़ा से आयोजन में शामिल होने आई हूं। परिवार से अन्य लोग भी आए हैं। संघ हमेशा समाजसेवा और धर्मसेवा का संदेश देता है। यहां जाति वर्ग का कोई भेद नहीं। पहली बार सर संघचालक को सुनने का अवसर मिला है। -मानसी
संगठन का अनुशासन है पसंद
सेविका समिति से लंबे समय से जुड़ी हूं। संगठन का अनुशासन मुझे काफी पसंद है। आयोजन स्थल पर रंगोली बनाने में सहयोग दिया। परिवार से स्वयंसेवकों के लिए भोजन भी दिया है। हर परिवार को संघ आयोजन में शामिल होना चाहिए। -वर्षा
खास बातें
- महिलाओं ने भी निभाई भूमिका, छुट्टी का आराम छोड़ डॉ. मोहन भागवत को सुनने पहुंची
- राष्ट्रोदय में सेविका समिति और महिला मोर्चा की महिलाएं भी हुईं शामिल