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संस्कृत के छात्र भी छोड़ गए राष्ट्रोदय में अलग छाप
Updated Mon, 26 Feb 2018 02:28 AM IST
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संस्कृत के छात्र भी छोड़ गए राष्ट्रोदय में अलग छाप
मेरठ। आरएसएस के राष्ट्रोदय कार्यक्रम में गुरुकुल प्रभात आश्रम में पढ़ाई कर रहे संस्कृत के छात्रों ने भी अनुशासन की छाप छोड़ी। पीले वस्त्र धारण कर ये सभी छात्र कार्यक्रम स्थल पर कतारबद्ध होकर पहुंचे और एक जगह ही बैठकर संघ प्रमुख का संबोधन सुनते रहे। सभी छात्र 11 से 15 साल की आयु के रहे।
गुरुकुल प्रभात आश्रम टीकरी के छात्रों ने बताया कि सौ से अधिक बच्चे आश्रम में रहकर संस्कृत की पढ़ाई कर रहे हैं। आठवीं के छात्र राजदीप ने बताया कि आश्रम में संस्कृत के अलावा अनुशासन का पाठ पढ़ाया जाता है। उन्हें गुरुजी कई दिनों से बता रहे थे कि 25 फरवरी को राष्ट्रोदय के कार्यक्रम में सभी बच्चे चलेंगे।
कक्षा छह के वंश और सात के छात्र प्रभात ने बताया कि यहां बहुत भीड़ है। लेकिन ऐसा अनुशासन तो उन्होंने कभी देखा सुना भी नहीं था। लंबी कतारों में सब अपने स्थान पर एक से वस्त्रों में बैठे हैं। उन्होंने इस कार्यक्रम से सिर्फ अनुशासन की सीख लेनी है। यहां बच्चे और बड़ी उम्र के लोग भी लोग जमीन पर बैठे हैं। ऐसे ही लोग होने चाहिए, जहां सभी में समानता होनी चाहिए।
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छात्र रितेश, अंकित, विष्णु, केशव ने बताया कि उन्हें आश्रम में भारतीय संस्कृति की शिक्षा दी जाती है। यहां जहां ऊंचा झंडा फहराया गया और उसको सभी ने खडे़ होकर प्रणाम किया तो उन्हें लगा कि यही राष्ट्रोदय है। कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने साथ आए गुरुकुल प्रभात आश्रम के आचार्य राममुनि वैद्य से भी पूछा कि गुरु जी क्या यही राष्ट्रोदय है। आचार्य ने छात्रों से कहा कि यही हमारे राष्ट्र की संस्कृति का ज्ञान है। जहां सब बराबर हैं। कार्यक्रम समाप्ति के बाद भी आश्रम से आए यह सभी छात्र कतारबद्ध होकर बस तक पहुंचे। छात्रों ने भारत मां की जय बोलते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा कार्यक्रम कहीं नहीं देखा। यहां तो अनगिनत लोग आए थे।
खास बातें
- गुरुकुल प्रभात आश्रम टीकरी से पहुंचे संस्कृत पढ़ रहे छात्र
- कतारबद्ध होकर पहुंचे, अनुशासन में बैठे, कतारबद्ध होकर किया प्रस्थान
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मेरठ। आरएसएस के राष्ट्रोदय कार्यक्रम में गुरुकुल प्रभात आश्रम में पढ़ाई कर रहे संस्कृत के छात्रों ने भी अनुशासन की छाप छोड़ी। पीले वस्त्र धारण कर ये सभी छात्र कार्यक्रम स्थल पर कतारबद्ध होकर पहुंचे और एक जगह ही बैठकर संघ प्रमुख का संबोधन सुनते रहे। सभी छात्र 11 से 15 साल की आयु के रहे।
गुरुकुल प्रभात आश्रम टीकरी के छात्रों ने बताया कि सौ से अधिक बच्चे आश्रम में रहकर संस्कृत की पढ़ाई कर रहे हैं। आठवीं के छात्र राजदीप ने बताया कि आश्रम में संस्कृत के अलावा अनुशासन का पाठ पढ़ाया जाता है। उन्हें गुरुजी कई दिनों से बता रहे थे कि 25 फरवरी को राष्ट्रोदय के कार्यक्रम में सभी बच्चे चलेंगे।
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कक्षा छह के वंश और सात के छात्र प्रभात ने बताया कि यहां बहुत भीड़ है। लेकिन ऐसा अनुशासन तो उन्होंने कभी देखा सुना भी नहीं था। लंबी कतारों में सब अपने स्थान पर एक से वस्त्रों में बैठे हैं। उन्होंने इस कार्यक्रम से सिर्फ अनुशासन की सीख लेनी है। यहां बच्चे और बड़ी उम्र के लोग भी लोग जमीन पर बैठे हैं। ऐसे ही लोग होने चाहिए, जहां सभी में समानता होनी चाहिए।
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छात्र रितेश, अंकित, विष्णु, केशव ने बताया कि उन्हें आश्रम में भारतीय संस्कृति की शिक्षा दी जाती है। यहां जहां ऊंचा झंडा फहराया गया और उसको सभी ने खडे़ होकर प्रणाम किया तो उन्हें लगा कि यही राष्ट्रोदय है। कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने साथ आए गुरुकुल प्रभात आश्रम के आचार्य राममुनि वैद्य से भी पूछा कि गुरु जी क्या यही राष्ट्रोदय है। आचार्य ने छात्रों से कहा कि यही हमारे राष्ट्र की संस्कृति का ज्ञान है। जहां सब बराबर हैं। कार्यक्रम समाप्ति के बाद भी आश्रम से आए यह सभी छात्र कतारबद्ध होकर बस तक पहुंचे। छात्रों ने भारत मां की जय बोलते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा कार्यक्रम कहीं नहीं देखा। यहां तो अनगिनत लोग आए थे।
खास बातें
- गुरुकुल प्रभात आश्रम टीकरी से पहुंचे संस्कृत पढ़ रहे छात्र
- कतारबद्ध होकर पहुंचे, अनुशासन में बैठे, कतारबद्ध होकर किया प्रस्थान