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असल जिंदगी में भी किरदार का प्रभाव
Updated Sat, 16 Sep 2017 03:07 AM IST
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मेरठ। श्रीराम के चरित्र के बाद भरत का चरित्र बड़ा माना जाता है। श्री रामलीला में भरत और श्रीराम का किरदार निभाने वाले स्थानीय कलाकार अपने वास्तविक जीवन में भी आदर्श स्थापित कर रहे हैं। मंचन से पूर्व ये कलाकार घंटों प्रैक्टिस करते हैं। वहीं, पुस्तक से श्लोक याद कर उसकी रिहर्सल करते हैं। शहर में मुख्य रूप से जेल चुंगी, प्रह्लाद नगर और रजबन फुटबॉल ग्राउंड में स्थानीय कलाकारों द्वारा वर्षों से रामलीला मंचन किया जाता रहा है। ज्यादातर कलाकार श्रीराम के साथ भरत के चरित्र को भी अपना आदर्श मानते हैं। वहीं, रावण का किरदार निभाने वाले कलाकारों का कहना है कि वह मंचन के दौरान अपने किरदार में ढलने का प्रयास करते हैं।
रामलीला ने समझाया मर्यादा में जीना
जेल चुंगी रामलीला में हनुमान का किरदार निभाने वाले योगराज ठाकुर ने बताया कि पिता की प्रेरणा से उन्हें रामलीला में हनुमान का किरदार निभाने का अवसर प्राप्त हुआ। योगराज ने बताया कि उनके पिता पैरालाइसिस के शिकार हो गए थे, लेकिन सेवा से वे पूर्ण स्वस्थ हो गए। वहीं, श्रीराम नाटक क्लब में हनुमान का किरदार निभा रहे अशोक मलाई ने बताया कि असल जिंदगी में वह दूध की डेयरी चलाते हैं। दो बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने आस्था को बड़ी शक्ति बताया।
समझा संयुक्त परिवार का महत्व
लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले दिनेश कुमार ने बताया कि वह अपने बड़े भई रमेश ठाकुर की आज्ञा अनुसार कार्य करते है। साथ ही वह संयुक्त परिवार में रहते हैं। वह ड्राईक्लीनिंग की दुकान चलाते हैं। श्रीराम नाटक क्लब में लक्ष्मण का किरदार निभा रहे करण भोला ने बताया कि लक्ष्मण के स्वरूप में उन्हें स्वयं ही सेवा का भाव जागृत हो जाता है।
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पूरे परिवार की जिम्मेदारी
रामलीला में भरत का किरदार निभा रहे सचिन कुमार ने बताया कि असल जिंदगी में भी पूरी जिम्मेदारी के साथ परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह 15 साल से भरत का किरदार निभा रहे हैं। भरत का रोल निभा रहे गौरव गुंबर ने बताया कि वह टेलीकॉम की दुकान चलाते हैं। किरदार में वह पूरी तरह डूब जाते हैं। माता-पिता की सेवा को ही उन्होंने अपना प्रथम कर्तव्य बताया।
नियमों का करते हैं पालन
कलाकारों ने बताया कि वह अपने मंचन के दौरान सभी नियमों का पालन करते हैं। सभी कलाकार मंचन से पूर्व नियमित रूप से पूजा अर्चना करते हैं। कलाकार लगभग 13 दिन तक सन्यासी की तरह जीवन जीते हैं। कुछ कलाकार मंचन के समय अवधि में व्रत भी रखते हैं।
दर्शक भी कर देते हैं भावुक
लीला मंचन देख रहे लोग कलाकारों को ही अपने इष्ट का स्वरूप मानते हैं। कई प्रसंगों को देखते हुए दर्शक भी भावुक हो जाते हैं। कलाकारों ने बताया कि कई वृद्ध महिलाएं भी उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेती हैं। महिला श्रीराम, सीता, भरत और हनुमान का रोल कर रहे कलाकारों में भी अपने ईश्वर का दर्शन प्राप्त करती हैं।
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रामलीला ने समझाया मर्यादा में जीना
जेल चुंगी रामलीला में हनुमान का किरदार निभाने वाले योगराज ठाकुर ने बताया कि पिता की प्रेरणा से उन्हें रामलीला में हनुमान का किरदार निभाने का अवसर प्राप्त हुआ। योगराज ने बताया कि उनके पिता पैरालाइसिस के शिकार हो गए थे, लेकिन सेवा से वे पूर्ण स्वस्थ हो गए। वहीं, श्रीराम नाटक क्लब में हनुमान का किरदार निभा रहे अशोक मलाई ने बताया कि असल जिंदगी में वह दूध की डेयरी चलाते हैं। दो बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने आस्था को बड़ी शक्ति बताया।
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समझा संयुक्त परिवार का महत्व
लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले दिनेश कुमार ने बताया कि वह अपने बड़े भई रमेश ठाकुर की आज्ञा अनुसार कार्य करते है। साथ ही वह संयुक्त परिवार में रहते हैं। वह ड्राईक्लीनिंग की दुकान चलाते हैं। श्रीराम नाटक क्लब में लक्ष्मण का किरदार निभा रहे करण भोला ने बताया कि लक्ष्मण के स्वरूप में उन्हें स्वयं ही सेवा का भाव जागृत हो जाता है।
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पूरे परिवार की जिम्मेदारी
रामलीला में भरत का किरदार निभा रहे सचिन कुमार ने बताया कि असल जिंदगी में भी पूरी जिम्मेदारी के साथ परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह 15 साल से भरत का किरदार निभा रहे हैं। भरत का रोल निभा रहे गौरव गुंबर ने बताया कि वह टेलीकॉम की दुकान चलाते हैं। किरदार में वह पूरी तरह डूब जाते हैं। माता-पिता की सेवा को ही उन्होंने अपना प्रथम कर्तव्य बताया।
नियमों का करते हैं पालन
कलाकारों ने बताया कि वह अपने मंचन के दौरान सभी नियमों का पालन करते हैं। सभी कलाकार मंचन से पूर्व नियमित रूप से पूजा अर्चना करते हैं। कलाकार लगभग 13 दिन तक सन्यासी की तरह जीवन जीते हैं। कुछ कलाकार मंचन के समय अवधि में व्रत भी रखते हैं।
दर्शक भी कर देते हैं भावुक
लीला मंचन देख रहे लोग कलाकारों को ही अपने इष्ट का स्वरूप मानते हैं। कई प्रसंगों को देखते हुए दर्शक भी भावुक हो जाते हैं। कलाकारों ने बताया कि कई वृद्ध महिलाएं भी उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेती हैं। महिला श्रीराम, सीता, भरत और हनुमान का रोल कर रहे कलाकारों में भी अपने ईश्वर का दर्शन प्राप्त करती हैं।