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आधुनिकीकरण नहीं होने पर पर बंद होंगे ईंट भट्ठे
Updated Mon, 28 Aug 2017 02:23 AM IST
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मोदीपुरम (मेरठ)। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मेरठ और बागपत सहित एनसीआर के सभी ईंट भट्टों का आधुनिकीकरण अनिवार्य करते हुए नोटिस जारी किए हैं। कहा है कि सिस्टम अपग्रेड न करने पर बोर्ड और जिला प्रशासन ऐसे ईंट भट्ठों को बंद कराने की कार्रवाई करेगा।
ईंट भट्ठे बदलें प्रारूप
एनजीटी के आदेश के बाद बोर्ड ने जारी निर्देशों में कहा है कि सभी ईंट भट्ठा संचालक अपने भट्ठों को नेचुरल ड्राट से इन्डयूज्ड ड्राट क्लीन में परिवर्तित करें। सभी संचालक सीजन 2017-18 शुरू करने से पहले अपने ईंट भट्टे जिगजैग विधि में परिवर्तित करा लें। बताया गया कि इस विधि से ईंट भट्टे से निकलने वाली राख वातावरण में नहीं फैलेगी, जिस कारण प्रदूषण कम होगा। यह विधि अनिवार्य कर दी गई है। ऐसा न करने पर भट्टा संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
खनन से पहले लें अनुमति
इसके अलावा ईंट निर्माण के लिए मिट्टी खनन करने से पहले अनुमति लेनी होगी। इस अनुमति के बाद बोर्ड से नियमानुसार जल और वायु की सहमति प्राप्त करनी होगी। एनओसी लेने के बाद ही ईंट भट्टे का संचालन किया जा सकता है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जाएगी।
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फरमान से मचा हड़कंप
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इस फरमान से ईंट भट्टा संचालकों में हड़कंप मचा है। संचालकों की मानें तो सीजन शुरू होने में अधिक समय नहीं है। ऐसे में इस प्रणाली को स्थापित करना बेहद मुश्किल काम है। लेकिन फिर भी प्रयास करेंगे कि जो मानक है, उन्हें पूरा किया जाए।
मेरठ और बागपत में यह स्थिति
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार मेरठ और बागपत में करीब 750 ईंट भट्ठे हैं। जिनमें मेरठ में करीब 230 तो बागपत में सबसे ज्यादा करीब 520 भट्ठे हैं।
15 लाख तक होते हैं खर्च
बोर्ड के अनुसार एनजीटी के निर्देशों के बाद इस संबंध में मौखिक रुप से भी सभी भट्ठा संचालकों को यह सिस्टम लगाने के लिए कहा गया था। लेकिन अभी तक मेरठ में सिर्फ एक और बागपत में 12 भट्ठों में ही यह सिस्टम लग पाया। इस सिस्टम की लागत करीब 12-15 लाख रुपये तक आती है। बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने यह सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया है।
एनजीटी के आदेश पर कदम
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी आरके त्यागी का कहना है कि एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए एनजीटी के आदेश पर यह कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसे में नियमों में ढील नहीं दी जा सकती। मेरठ और बागपत के भट्ठा संचालकों को पहले ही मौखिक सूचना दी गई थी। जल्द ही टीम सर्वे करेेंगी। जो इन सिस्टम को नहीं लगाएगा उन पर कार्रवाई होगी।
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ईंट भट्ठे बदलें प्रारूप
एनजीटी के आदेश के बाद बोर्ड ने जारी निर्देशों में कहा है कि सभी ईंट भट्ठा संचालक अपने भट्ठों को नेचुरल ड्राट से इन्डयूज्ड ड्राट क्लीन में परिवर्तित करें। सभी संचालक सीजन 2017-18 शुरू करने से पहले अपने ईंट भट्टे जिगजैग विधि में परिवर्तित करा लें। बताया गया कि इस विधि से ईंट भट्टे से निकलने वाली राख वातावरण में नहीं फैलेगी, जिस कारण प्रदूषण कम होगा। यह विधि अनिवार्य कर दी गई है। ऐसा न करने पर भट्टा संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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खनन से पहले लें अनुमति
इसके अलावा ईंट निर्माण के लिए मिट्टी खनन करने से पहले अनुमति लेनी होगी। इस अनुमति के बाद बोर्ड से नियमानुसार जल और वायु की सहमति प्राप्त करनी होगी। एनओसी लेने के बाद ही ईंट भट्टे का संचालन किया जा सकता है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जाएगी।
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फरमान से मचा हड़कंप
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इस फरमान से ईंट भट्टा संचालकों में हड़कंप मचा है। संचालकों की मानें तो सीजन शुरू होने में अधिक समय नहीं है। ऐसे में इस प्रणाली को स्थापित करना बेहद मुश्किल काम है। लेकिन फिर भी प्रयास करेंगे कि जो मानक है, उन्हें पूरा किया जाए।
मेरठ और बागपत में यह स्थिति
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार मेरठ और बागपत में करीब 750 ईंट भट्ठे हैं। जिनमें मेरठ में करीब 230 तो बागपत में सबसे ज्यादा करीब 520 भट्ठे हैं।
15 लाख तक होते हैं खर्च
बोर्ड के अनुसार एनजीटी के निर्देशों के बाद इस संबंध में मौखिक रुप से भी सभी भट्ठा संचालकों को यह सिस्टम लगाने के लिए कहा गया था। लेकिन अभी तक मेरठ में सिर्फ एक और बागपत में 12 भट्ठों में ही यह सिस्टम लग पाया। इस सिस्टम की लागत करीब 12-15 लाख रुपये तक आती है। बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने यह सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया है।
एनजीटी के आदेश पर कदम
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी आरके त्यागी का कहना है कि एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए एनजीटी के आदेश पर यह कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसे में नियमों में ढील नहीं दी जा सकती। मेरठ और बागपत के भट्ठा संचालकों को पहले ही मौखिक सूचना दी गई थी। जल्द ही टीम सर्वे करेेंगी। जो इन सिस्टम को नहीं लगाएगा उन पर कार्रवाई होगी।