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स्थान निश्चित नहीं, कैसे विकसित होगी कैटल कालोनी
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स्थान निश्चित नहीं, कहां विकसित होगी कैटल कॉलोनी
- एमडीए के पास नहीं है जमीन, फिर भी डेयरी संचालकों से आवेदन मांगे
- हवा में ही चल रहा है डेयरियों को बाहर करने का मामला
- मंगलवार को मुख्य सचिव ने लखनऊ में बुलाई थी अधिकारियों की बैठक
- प्रमुखा सचिव ने शीघ्र डेयरियों को शहर से बाहर कर कैटल कालोनी विकसित करने के दिए निर्देश
- काशी अछरोंडा और अलीपुर जिजमाना में निगम प्रबंधन की भूमि पर है प्रशासन की नजर
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। शहर से डेयरियों को बाहर करने के लिए एमडीए, नगर निगम, जिला प्रशासन फाइलों में आंख मिचौनी का खेल खेल रहे हैं। न तो एमडीए ने कैटल कॉलोनी के लिए भूमि निर्धारित की है और न ही नगर निगम ने डेयरियों को शहर से बाहर करने की ठोस रणनीति तैयार की है, लेकिन इसके बावजूद डेयरी संचालकों से भूमि के लिए आवेदन मांग लिए गए हैं। डेयरी संचालक भूमि के लिए आवेदन करना तो चाहते हैं, लेकिन आवेदन में भूमि के स्थान पर क्या लिखेंगे। यानि विभागीय अधिकारी इस मुद्दे पर जरा भी गंभीर नहीं है, सिर्फ हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई से बचने के लिए यह खेल किया जा रहा है।
शहर में 500 से अधिक डेयरी संचालित हैं, जिनसे निकलने वाले गोबर से पूरे शहर में गंदगी रहती है। नालियां-नाले चोक हैं। हर समय जलभराव की स्थिति रहती है। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना की पीआईएल पर हाईकोर्ट ने एक सप्ताह पहले निगम प्रशासन को जून के अंतिम सप्ताह तक हर कीमत पर सभी डेयरियों को शहर से बाहर करने का आदेश जारी किया। जिस पर निगम और एमडीए प्रशासन को कार्रवाई करनी है।
जिम्मेदारी से बच रहा है एमडीए
शहर से डेयरियों को बाहर कर कैटल कॉलोनी विकसित करने की जिम्मेदारी एमडीए की है, लेकिन एमडीए अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। क्योंकि डेयरी संचालक एमडीए की भूमि के रेट ही नहीं दे पाएंगे। एमडीए कैटल कॉलोनी के लिए भूमि अधिग्रहण की भी पहल नहीं कर रहा है। जिससे साफ है कि बगैर भूमि के न तो कैटल कॉलोनी विकसित होगी और न ही शहर से डेयरियां बाहर हो सकेंगी।
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हाईकोर्ट के आदेशानुसार करें कैटल कालोनी विकसित
हाईकोर्ट के आदेश पर मंगलवार को मुख्य सचिव अनूप पांडेय ने नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान, एडीएम ई, एमडीए वीसी की लखनऊ में बैठक बुलाई थी। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समय से हाईकोर्ट के आदेशानुसार सभी डेयरियों को शहर बाहर करें, साथ ही कैटल कालोनी विकसित की जाए। इस संबंध में नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान और एमडीए अधिकारियों ने कहा कि सभी डेयरी संचालकों से भूमि के लिए आवेदन मांगे जा रहे हैं। दोनों ही विभागों के अधिकारियों ने काशी अछरोंडा और अलीपुर जिजमाना में सरकारी भूमि पर कैटल कॉलोनी विकसित करने का प्रस्ताव रखा। एमडीए अधिकारियों ने कैटल कॉलोनी के लिए अपने पास कोई भूमि न होने की बात कही।
जब जमीन ही नहीं तो क्यों मांगे आवेदन
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना का कहना है कि एमडीए वीसी ने जमीन देने से हाथ खड़े कर दिए। अब सवाल है कि अगर इनके पास जमीन ही नहीं है तो फिर डेयरी संचालकों से भूमि के लिए आवेदन क्यों मांगे जा रहे हैं। दोनों विभाग मिलकर हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना कर रहे हैं।
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- एमडीए के पास नहीं है जमीन, फिर भी डेयरी संचालकों से आवेदन मांगे
- हवा में ही चल रहा है डेयरियों को बाहर करने का मामला
- मंगलवार को मुख्य सचिव ने लखनऊ में बुलाई थी अधिकारियों की बैठक
- प्रमुखा सचिव ने शीघ्र डेयरियों को शहर से बाहर कर कैटल कालोनी विकसित करने के दिए निर्देश
- काशी अछरोंडा और अलीपुर जिजमाना में निगम प्रबंधन की भूमि पर है प्रशासन की नजर
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। शहर से डेयरियों को बाहर करने के लिए एमडीए, नगर निगम, जिला प्रशासन फाइलों में आंख मिचौनी का खेल खेल रहे हैं। न तो एमडीए ने कैटल कॉलोनी के लिए भूमि निर्धारित की है और न ही नगर निगम ने डेयरियों को शहर से बाहर करने की ठोस रणनीति तैयार की है, लेकिन इसके बावजूद डेयरी संचालकों से भूमि के लिए आवेदन मांग लिए गए हैं। डेयरी संचालक भूमि के लिए आवेदन करना तो चाहते हैं, लेकिन आवेदन में भूमि के स्थान पर क्या लिखेंगे। यानि विभागीय अधिकारी इस मुद्दे पर जरा भी गंभीर नहीं है, सिर्फ हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई से बचने के लिए यह खेल किया जा रहा है।
शहर में 500 से अधिक डेयरी संचालित हैं, जिनसे निकलने वाले गोबर से पूरे शहर में गंदगी रहती है। नालियां-नाले चोक हैं। हर समय जलभराव की स्थिति रहती है। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना की पीआईएल पर हाईकोर्ट ने एक सप्ताह पहले निगम प्रशासन को जून के अंतिम सप्ताह तक हर कीमत पर सभी डेयरियों को शहर से बाहर करने का आदेश जारी किया। जिस पर निगम और एमडीए प्रशासन को कार्रवाई करनी है।
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जिम्मेदारी से बच रहा है एमडीए
शहर से डेयरियों को बाहर कर कैटल कॉलोनी विकसित करने की जिम्मेदारी एमडीए की है, लेकिन एमडीए अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। क्योंकि डेयरी संचालक एमडीए की भूमि के रेट ही नहीं दे पाएंगे। एमडीए कैटल कॉलोनी के लिए भूमि अधिग्रहण की भी पहल नहीं कर रहा है। जिससे साफ है कि बगैर भूमि के न तो कैटल कॉलोनी विकसित होगी और न ही शहर से डेयरियां बाहर हो सकेंगी।
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हाईकोर्ट के आदेशानुसार करें कैटल कालोनी विकसित
हाईकोर्ट के आदेश पर मंगलवार को मुख्य सचिव अनूप पांडेय ने नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान, एडीएम ई, एमडीए वीसी की लखनऊ में बैठक बुलाई थी। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समय से हाईकोर्ट के आदेशानुसार सभी डेयरियों को शहर बाहर करें, साथ ही कैटल कालोनी विकसित की जाए। इस संबंध में नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान और एमडीए अधिकारियों ने कहा कि सभी डेयरी संचालकों से भूमि के लिए आवेदन मांगे जा रहे हैं। दोनों ही विभागों के अधिकारियों ने काशी अछरोंडा और अलीपुर जिजमाना में सरकारी भूमि पर कैटल कॉलोनी विकसित करने का प्रस्ताव रखा। एमडीए अधिकारियों ने कैटल कॉलोनी के लिए अपने पास कोई भूमि न होने की बात कही।
जब जमीन ही नहीं तो क्यों मांगे आवेदन
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना का कहना है कि एमडीए वीसी ने जमीन देने से हाथ खड़े कर दिए। अब सवाल है कि अगर इनके पास जमीन ही नहीं है तो फिर डेयरी संचालकों से भूमि के लिए आवेदन क्यों मांगे जा रहे हैं। दोनों विभाग मिलकर हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना कर रहे हैं।