{"_id":"5c76f5e2bdec22737548c4e5","slug":"181551300066-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"55 मिनट में 595 करोड़ 30 लाख का पुनरीक्षित बजट पास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
55 मिनट में 595 करोड़ 30 लाख का पुनरीक्षित बजट पास
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- महापौर के शहर से बाहर होने पर बसपा पार्षदों ने बैठक का किया बहिष्कार
- निगम एक्ट की धारा 90-3 के तहत नगरायुक्त ने विशेष अधिकार अपनाए
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। नगर निगम कार्यकारिणी बैठक जहां बिना महापौर और कार्यकारिणी उपाध्यक्ष के आयोजित की गई, वहीं 55 मिनट में 595 करोड़ 30 लाख रुपये का पुनरीक्षित बजट पास हो गया। महापौर ने कार्यकारिणी की बैठक को अवैध ठहराते हुए दो मार्च को फिर से बैठक बुलाने की बात कही है। वहीं निगम प्रशासन कार्य कार्यकारिणी की बैठक की रिपोर्ट शासन को भेज रहा है।
महापौर सुनीता वर्मा ने बुधवार को टाउन हॉल में निगम कार्यकारिणी की बैठक बुलाई थी। सुबह 11 बजे तक नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी संतोष शर्मा, अपर नगरायुक्त अमित सिंह सहित सभी अधिकारी और बसपा व भाजपा कार्यकारिणी सदस्य सदन में पहुंच गए। इसी दौरान महापौर के अचानक शहर से बाहर जाने की सूचना सदन को मिली। निगम अधिकारियों ने कार्यकारिणी में पुनरीक्षित बजट की बैठक को जरूरी बताते हुए निगम एक्ट खंगालना शुरू किया। निगम की एक्ट की धारा 90-3 का हवाला देते हुए नगरायुक्त के अधिकार के तहत बिना महापौर के ही कार्यकारिणी बैठक करने का निर्णय लिया गया। वंदेमातरम के बाद शहीदों को श्रद्धांजलि और सैनिकों को धन्यवाद ज्ञापित दिया गया। इसके बाद नगरायुक्त के निर्देश पर कार्यकारिणी सदस्य ललित नागदेव, राजेश रोहेला, विजय सोनकर, समीर चौहान, कासिम, धर्मवीर ने सदस्य पंकज गोयल को सभापति चुना। इनको डायस पर स्थान दिया गया। वहीं सभापति का चुनाव कराने के बाद ही बसपा पार्षद धर्मवीर और कासिम सदन छोड़कर चले गए। इसके उपरांत सभापति की अध्यक्षता में पुनरीक्षित बजट पर चर्चा की गई। प्रस्तावों में आंशिक संशोधन के साथ 595 करोड़ 30 लाख 18 हजार का पुनरीक्षित बजट पास हो गया।
कंगाल नगर निगम से न करें विकास की उम्मीद
शहर की जनता निगम से विकास की उम्मीद छोड़ दे, क्योंकि जितनी निगम की आय है उससे कहीं अधिक कर्ज में डूबा है। इसलिए आगामी छह माह तो किसी भी कीमत पर नगर निगम बोर्ड फंड से कोई विकास कार्य हो ही नहीं सकता है। नौबत यह है कि अगर आपके घर के सामने पुलिया टूटी है उसमें दुर्घटनाएं हो रही हैं या फिर नाला टूट गया है। पानी आपके घर में भरने वाला है तो ऐसी स्थिति में भी काम कराने के लिए नगर में पैसा नहीं है। नगर निगम की पूरे साल में अपनी निजी कमाई केवल 40 करोड़ रुपये है। हाउस टैक्स से मात्र 22 करोड़ मिला है। अकेले निगम की गाड़ियों के डीजल पर ही आठ करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस समय नगर निगम के खजाने में 70 लाख रुपये हैं। जबकि डीजल भुगतान के लिए 80 लाख रुपये के बिल नगर निगम में जमा है।
विज्ञापन
राज्य वित्त, टीएफसी, अमृत योजना के भरोसे शहर का विकास
शहर के विकास को अगर राज्य वित्त आयोग, 14वें वित्त आयोग, अमृत योजना, अवस्थापना से धन मिलना बंद हो जाए तो शहर में कोई विकास नहीं होगा। हम 15 फरवरी 2019 तक समस्त आय की बात करें तो 200 करोड़ हुई है। जिसमें सभी मदों से धन मिला है। जबकि निगम ने 270 करोड़ खर्च कर दिए हैं। हालांकि नगर निगम के अधिकारियों ने आय से अधिक खर्च किए गए 70 करोड़ रुपये पुराने अवशेष बताए हैं।
------------
कार्यकारिणी की बैठक अवैध
बैठक बुलाने का अधिकार महापौर का होता है। हमने 10.45 बजे पत्र भेजकर बैठक स्थगित कर दी थी। यदि किसी धारा का हवाला देकर बैठक करने की बात कही जा रही है तो वह अवैध है। वैसे भी दोपहर को ही नगरायुक्त की तरफ से हमें एक पत्र मिला है। जिसमें उन्होंने अगली बार कार्यकारिणी बैठक बुलाने की तिथि निर्धारित करने की बात कही है। जिसमें हमने 02 मार्च की तिथि तय कर दी है। -सुनीता वर्मा, महापौर
विज्ञापन
- निगम एक्ट की धारा 90-3 के तहत नगरायुक्त ने विशेष अधिकार अपनाए
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। नगर निगम कार्यकारिणी बैठक जहां बिना महापौर और कार्यकारिणी उपाध्यक्ष के आयोजित की गई, वहीं 55 मिनट में 595 करोड़ 30 लाख रुपये का पुनरीक्षित बजट पास हो गया। महापौर ने कार्यकारिणी की बैठक को अवैध ठहराते हुए दो मार्च को फिर से बैठक बुलाने की बात कही है। वहीं निगम प्रशासन कार्य कार्यकारिणी की बैठक की रिपोर्ट शासन को भेज रहा है।
महापौर सुनीता वर्मा ने बुधवार को टाउन हॉल में निगम कार्यकारिणी की बैठक बुलाई थी। सुबह 11 बजे तक नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी संतोष शर्मा, अपर नगरायुक्त अमित सिंह सहित सभी अधिकारी और बसपा व भाजपा कार्यकारिणी सदस्य सदन में पहुंच गए। इसी दौरान महापौर के अचानक शहर से बाहर जाने की सूचना सदन को मिली। निगम अधिकारियों ने कार्यकारिणी में पुनरीक्षित बजट की बैठक को जरूरी बताते हुए निगम एक्ट खंगालना शुरू किया। निगम की एक्ट की धारा 90-3 का हवाला देते हुए नगरायुक्त के अधिकार के तहत बिना महापौर के ही कार्यकारिणी बैठक करने का निर्णय लिया गया। वंदेमातरम के बाद शहीदों को श्रद्धांजलि और सैनिकों को धन्यवाद ज्ञापित दिया गया। इसके बाद नगरायुक्त के निर्देश पर कार्यकारिणी सदस्य ललित नागदेव, राजेश रोहेला, विजय सोनकर, समीर चौहान, कासिम, धर्मवीर ने सदस्य पंकज गोयल को सभापति चुना। इनको डायस पर स्थान दिया गया। वहीं सभापति का चुनाव कराने के बाद ही बसपा पार्षद धर्मवीर और कासिम सदन छोड़कर चले गए। इसके उपरांत सभापति की अध्यक्षता में पुनरीक्षित बजट पर चर्चा की गई। प्रस्तावों में आंशिक संशोधन के साथ 595 करोड़ 30 लाख 18 हजार का पुनरीक्षित बजट पास हो गया।
विज्ञापन
कंगाल नगर निगम से न करें विकास की उम्मीद
शहर की जनता निगम से विकास की उम्मीद छोड़ दे, क्योंकि जितनी निगम की आय है उससे कहीं अधिक कर्ज में डूबा है। इसलिए आगामी छह माह तो किसी भी कीमत पर नगर निगम बोर्ड फंड से कोई विकास कार्य हो ही नहीं सकता है। नौबत यह है कि अगर आपके घर के सामने पुलिया टूटी है उसमें दुर्घटनाएं हो रही हैं या फिर नाला टूट गया है। पानी आपके घर में भरने वाला है तो ऐसी स्थिति में भी काम कराने के लिए नगर में पैसा नहीं है। नगर निगम की पूरे साल में अपनी निजी कमाई केवल 40 करोड़ रुपये है। हाउस टैक्स से मात्र 22 करोड़ मिला है। अकेले निगम की गाड़ियों के डीजल पर ही आठ करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस समय नगर निगम के खजाने में 70 लाख रुपये हैं। जबकि डीजल भुगतान के लिए 80 लाख रुपये के बिल नगर निगम में जमा है।
विज्ञापन
राज्य वित्त, टीएफसी, अमृत योजना के भरोसे शहर का विकास
शहर के विकास को अगर राज्य वित्त आयोग, 14वें वित्त आयोग, अमृत योजना, अवस्थापना से धन मिलना बंद हो जाए तो शहर में कोई विकास नहीं होगा। हम 15 फरवरी 2019 तक समस्त आय की बात करें तो 200 करोड़ हुई है। जिसमें सभी मदों से धन मिला है। जबकि निगम ने 270 करोड़ खर्च कर दिए हैं। हालांकि नगर निगम के अधिकारियों ने आय से अधिक खर्च किए गए 70 करोड़ रुपये पुराने अवशेष बताए हैं।
------------
कार्यकारिणी की बैठक अवैध
बैठक बुलाने का अधिकार महापौर का होता है। हमने 10.45 बजे पत्र भेजकर बैठक स्थगित कर दी थी। यदि किसी धारा का हवाला देकर बैठक करने की बात कही जा रही है तो वह अवैध है। वैसे भी दोपहर को ही नगरायुक्त की तरफ से हमें एक पत्र मिला है। जिसमें उन्होंने अगली बार कार्यकारिणी बैठक बुलाने की तिथि निर्धारित करने की बात कही है। जिसमें हमने 02 मार्च की तिथि तय कर दी है। -सुनीता वर्मा, महापौर