{"_id":"5c5208eebdec224e4507e613","slug":"181548880110-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आवारा पशुओं से ग्रामीणों को नहीं मिल रही राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आवारा पशुओं से ग्रामीणों को नहीं मिल रही राहत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खरखौदा। सरकार के फरमान के बाद जगह-जगह अस्थायी गोशालायें खोली जा रही हैं। इसके बाद भी गांवों में इन आवारा पशुओं से निजात नहीं मिल पा रही है। आवारा पशु किसानों की फसलों को खा रहे हैं।
क्षेत्र में आवारा पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। भाजपा सरकार बनते ही गोवंशों के कटान पर रोक लग गई। इससे आवारा पशुओं की संख्या में भी इजाफा हो गया। इनकी संख्या बढ़ी तो क्षेत्र में बनी गोशालाएं भर गईं। अब आवारा पशु किसानों की फसलों को खाने लगे। आजिज किसान इन पशुओं को सरकारी भवनों में बंधने लगे हैं। जिसमें प्रदेश सरकार ने इस समस्या से समाधान पाने के लिए शहरों एवं कस्बे में गोशालाएं बनाने का निर्णय किया। यहां अस्थायी गोशालाएं की बनाई गई थीं। इन पशुओं की संख्या ही इतनी थी कि गोशालाएं भर गईं। इन पशुओं से पूर्ण रूप से ग्रामीणों को छुटकारा नहीं मिल सका है। हापुड से मेरठ के बीच में पड़ने वाले करीब 30 गांवों में केवल खरखौदा कस्बा में ही गोशाला है। गोशाला बनते ही तीन दिन में क्षमता से अधिक पशु हो गए। अब इन तीस गांवों के आवारा पशुओं कहां ले जाया जाएं खरखौदा कस्बा, कैली, पांची, धीरखेड़ा, कूड़ी, बिजौली समेत सभी गांवों में आवारा पशुओं ने उत्पात मचा रखा है। पशु किसानों की फसलों को उजाड़ रहे हैं। इसलिए इन पशुओं का हल नहीं निकल पा रहा है।
विज्ञापन
क्षेत्र में आवारा पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। भाजपा सरकार बनते ही गोवंशों के कटान पर रोक लग गई। इससे आवारा पशुओं की संख्या में भी इजाफा हो गया। इनकी संख्या बढ़ी तो क्षेत्र में बनी गोशालाएं भर गईं। अब आवारा पशु किसानों की फसलों को खाने लगे। आजिज किसान इन पशुओं को सरकारी भवनों में बंधने लगे हैं। जिसमें प्रदेश सरकार ने इस समस्या से समाधान पाने के लिए शहरों एवं कस्बे में गोशालाएं बनाने का निर्णय किया। यहां अस्थायी गोशालाएं की बनाई गई थीं। इन पशुओं की संख्या ही इतनी थी कि गोशालाएं भर गईं। इन पशुओं से पूर्ण रूप से ग्रामीणों को छुटकारा नहीं मिल सका है। हापुड से मेरठ के बीच में पड़ने वाले करीब 30 गांवों में केवल खरखौदा कस्बा में ही गोशाला है। गोशाला बनते ही तीन दिन में क्षमता से अधिक पशु हो गए। अब इन तीस गांवों के आवारा पशुओं कहां ले जाया जाएं खरखौदा कस्बा, कैली, पांची, धीरखेड़ा, कूड़ी, बिजौली समेत सभी गांवों में आवारा पशुओं ने उत्पात मचा रखा है। पशु किसानों की फसलों को उजाड़ रहे हैं। इसलिए इन पशुओं का हल नहीं निकल पा रहा है।
विज्ञापन