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गांधीगीरी से समझाएंगे, यह पूर्व जन्म का पाप नहीं

Tue, 29 Jan 2019 08:14 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 29 Jan 2019 08:14 PM IST
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गांधीगीरी से समझाएंगे, यह पूर्व जन्म का पाप नहीं
फोटो
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कुष्ठ रोग निवारण दिवस आज

‘गांधीगीरी’ से समझाएंगे, यह पूर्व जन्म का पाप नहीं

- अंधविश्वास और अफवाहों से रहे दूर
- इलाज है संभव, निशुल्क मिलती है दवा

अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता लाने और लोगों में इस बीमारी को लेकर पैदा हुए भ्रम को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ‘गांधीगीरी’ का सहारा लेगा। बच्चों और व्यस्कों को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का शुभंकर बनाया जाएगा। वे बताएंगे कि कुष्ठ रोग न तो छूने से फैलता है और न ही यह पूर्वजन्म के पाप या व्यवहार का फल है। यह अनुवांशिक भी नहीं है। इसका इलाज संभव है और इसकी दवा भी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क मिलती है। कुष्ठ रोग केबारे में कई अंधविश्वास और अफवाहे हैं। पर इन ध्यान न देकर इसका इलाज कराना चाहिए।
30 जनवरी से 13 फरवरी तक स्पर्श कुष्ठ निवारण जागरूकता अभियान को पखवाड़े के रूप में आयोजित किया जाएगा। इसमें फोटो केजरिए के जरिये यह भी बताया और दिखाया जाएगा कि राष्ट्रपिता के अभियान ने कुष्ठ रोगियों के जीवन को बेहतर बनाया था। कार्यक्रम की शुरुआत सभी ग्राम पंचायतों, ग्राम सभाओं, नगरीय क्षेत्रों में मलिन बस्तियों, धार्मिक, शिक्षण और स्वयंसेवी संस्थाओं में किया जाएगा। सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि कार्यक्रम में लापरवाही बरतने पर कार्रवाई की जाएगी।
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कुष्ठ रोग को दूर करने के लिए दी जाती है मल्टी ड्रग थेरेपी
जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. सुधीर अग्रवाल ने बताया कि इस बीमारी को दूर करने के लिए मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) दवा दी जाती है, जिसके इस्तेमाल से यह बीमारी ठीक हो जाती है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक कविता भी बनाई है- ‘जो जल्दी जांच कराएगा, पूरी औषधि खाएगा, कुष्ठ मुक्त हो जाएगा, विकृति से बच जाएगा, कभी नहीं पछताएगा।’ उन्होंने बताया कि इस बीमारी केलक्षण लंबे समय बाद दिखाई देते हैं। कुष्ठ रोग के बनने में (इन्कूबेशन अवधि) कुछ हफ्तों से 20 साल या उससे अधिक का समय लगता है। बीमारी की औसत अवधि पांच से सात साल होती है।
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घट रहे कुष्ठ रोगी
वर्ष मरीज पुरुष महिला बच्चे
2015-16 358 207 131 20
2016-17 293 178 98 17
2017-18 225 139 81 05
2018-19 212 119 88 05
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जीवाणु से फैलता है कुष्ठ रोग
यह कुष्ठ रोग ग्रस्ति व्यक्ति द्वारा जीवाणु से फैलता है। संक्रमण व्यक्तियों के नाक व मुंह, विशेष रूप से नाक के रास्ते शरीर से बाहर निकलता है। यह कीटाणु खांसने, थूकने एवं छींकने से नाक व मुंह के माध्यम से सामान्य रूप से शरीर में प्रवेश करता है। - डॉ. सुधीर अग्रवाल, जिला कुष्ठ रोग अधिकारी

कुष्ठ रोग के लक्षण
हल्केरंग या तांबई रंग के दाग-धब्बे हो सकते हैं
त्वचा के दाग-धब्बों में सुन्नपन, हाथ या पैरों में अस्थिरता या झुनझुनी
हाथ, पैर या पलकों की कमजोरी, नसों में दर्द
चेहरे या आंखों में सूजन या लालिमा
हाथों या पैरों पर घाव या जलन

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