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निगम की कार्रवाई से बीओटी को जीवनदान

Sat, 14 Jul 2018 02:16 AM IST
Updated Sat, 14 Jul 2018 02:16 AM IST
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निगम की कार्रवाई से बीओटी को जीवनदान
ठेकेदार बोले, हमारे पास ही रहेगा बीओटी ठेका
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मेरठ। नगर निगम प्रशासन की मंशा से बीओटी को जीवनदान मिलता नजर आ रहा है। जहां 2013 में बीओटी ठेकेदारों के साथ अनुबंध के दौरान निगम अधिकारियों ने खेल कर दिया था वहीं अब भी लगभग उसी तरह के खेल को दोहराया जा रहा है। ठेकेदार चार साल पहले स्थानीय न्यायालय से प्राप्त स्टे ऑर्डर और एक माह पहले नगर निगम कोष में जमा धनराशि के आधार पर अगले पांच साल बीओटी ठेके को चलाने की बात बोल रहे हैं।
नगर निगम और कंपनी के बीच 2013 में हुए बीओटी ठेके के अनुबंध की बात करें तो मई 2018 में पांच साल पूरे हो गए। पिछले पांच साल में बीओटी ठेकों को लेकर सड़क से लेकर न्यायालय तक लड़ाई लड़ी गई। खूब हंगामे हुए। लेकिन मई 2018 में नगर निगम द्वारा बीओटी ठेकों का नवीनीकरण कर लिया गया। इतना ही नहीं नगर निगम प्रशासन ने बीओटी ठेकेदारों से एडवांस में होर्डिंग किराया भी जमा करा लिया। जिसके आधार पर ठेकेदारों ने डिवाइडरों की रंगाई पुताई भी शुरू करा दी।
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स्टे खारिज नहीं करा पाया निगम
2013 में नगर निगम ने अभिनव एडवरटाइजिंग कंपनी, हीरा एडवरटाइजिंग कंपनी को 17 चौराहे और छह मार्ग बीओटी पर दिए थे। नगर निगम अधिकारियों ने ठेकेदारों को आरटीआई डालने का रास्ता दिखाया। आरटीआई में दी गयी सूचना के आधार पर ठेकेदारों ने न्यायालय से स्टे ले लिया। यहां नगर निगम 29 स्थानों पर डायरेक्शन बोर्ड लगाने की अनुमति की बात करता रहा, वहीं ठेकेदार ने 120 स्थानों पर डायरेक्शन लगाने की अनुमति मिलने की बात कही। ठेकेदारों ने अपने आपको सत्य साबित करने केलिए नगर निगम द्वारा दी गयी आरटीआई को न्यायालय में हथियार बनाया। जिसके आधार पर मिला स्टे ऑर्डर आज भी ठेकेदारों के पास है। पूरे पांच साल ठेकेदारों ने उसी स्टे ऑर्डर के आधार पर मनमर्जी से यूनिपोल लगाए। लेकिन नगर निगम प्रशासन स्टे आर्डर को खारिज नहीं करा पाया।
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ठेकेदार बोले, निगम के पास नहीं अधिकार
अभिनव एडवरटाइजिंग के डायरेक्टर सचिन चौधरी ने बताया कि बीओटी नियमावली और अनुबंध में दस साल ठेका चलना निर्धारित है। जिसमें साफ है कि पांच साल के बाद ठेके का नवीनीकरण करके पांच साल बढ़ाया जाएगा। वहीं नगर निगम प्रशासन ने किया है। हमारा ठेका समाप्त हुआ ही नहीं था। मई माह में निगम प्रशासन ने होर्डिंग का एडवांस किराया जमा कराया था। अभी तो हमारे पास न्यायालय का स्टे ऑर्डर है। निगम को न तो हमारा ठेका निरस्त करने का अधिकार है और न ही हमारे कार्य में बाधा डालने का।

बीओटी मार्ग और चौराहों का ठेका ई-टेंडरिंग से करने के लिए नगरायुक्त द्वारा बनाई गई समिति अपना कार्य कर रही है। रिकॉर्ड ले लिया गया है। अब सत्यापन होना बाकी है। उसके बाद रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। न्यायालय के स्टे ऑर्डर की जानकारी नहीं है। अलीहसन कर्नी, अपर नगरायुक्त


एडीएम प्रशासन से मिले ठेकेदार
बीओटी ठेकेदारों के विरोध में अन्य होर्डिंग ठेकेदार उतरे हुए हैं। होर्डिंग ठेकेदार पप्पी गुर्जर, अलीशान, सौरभ सहित सभी ठेकेदार एडीएम प्रशासन से मिले। उन्होंने कहा कि नगर निगम प्रशासनिक अधिकारी बीओटी ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का काम कर रहे हैं। हीरा एडवरटाइजिंग न्यायालय से स्टे लेने की फिराक में हैं। नगर निगम की तरफ से सिविल न्यायालय में अभी तक केविएट भी नहीं डाली है। नगर निगम को कई करोड़ का नुकसान पहुंचाने की तैयारी है।
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