{"_id":"5b0db4844f1c1bfd6e8b534c","slug":"181527624836-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जांच जारी, सीएमए कार्यालय में जुटे अधिकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जांच जारी, सीएमए कार्यालय में जुटे अधिकारी
Updated Wed, 30 May 2018 01:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जांच जारी, सीएमओ कार्यालय में जुटे रहे अधिकारी
मेरठ। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में वर्ष 2014-15 और वर्ष 2015-16 में शासन से आए बजट के इस्तेमाल में हुए गड़बड़झाले की जांच मंगलवार को भी जारी रही। लखनऊ से आए परिवार कल्याण विभाग के डायरेक्टर डॉ. बद्री विशाल ने सीएमओ कार्यालय के अधिकारियों और स्टाफ से पूछताछ की। साथ ही पुराने प्रपत्र मंगाकर उनकी जांच की। जांच अधिकारी जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज भी गए। दरअसल स्वास्थ्य विभाग को जो बजट जारी होता है उसमें से कुछ पैसा जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में भी खर्च किया जाता है।
इस मामले में तीन पूर्व सीएमओ और दो एडिशनल सीएमओ जांच के घेरे में हैं। इस संबंध में शासन से शिकायत की गई थी। वर्ष 2014-15 और साल 2015-16 में शासन से जो बजट मेरठ में सीएमओ कार्यालय को दिया गया था, उस बजट के जरिए जो सामान, उपकरण, दवाइयां आदि खरीदी जानी थीं, उनमें अनियमितताएं बरती गई हैं। डॉ. बद्री विशाल का कहना है कि जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि अनियमितताएं किस तरह की गई। जांच जारी है।
खास बातें:
दवाओं और सामान की खरीद में लाखों रुपये की अनियमितताओं का है मामला
विज्ञापन
मेरठ। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में वर्ष 2014-15 और वर्ष 2015-16 में शासन से आए बजट के इस्तेमाल में हुए गड़बड़झाले की जांच मंगलवार को भी जारी रही। लखनऊ से आए परिवार कल्याण विभाग के डायरेक्टर डॉ. बद्री विशाल ने सीएमओ कार्यालय के अधिकारियों और स्टाफ से पूछताछ की। साथ ही पुराने प्रपत्र मंगाकर उनकी जांच की। जांच अधिकारी जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज भी गए। दरअसल स्वास्थ्य विभाग को जो बजट जारी होता है उसमें से कुछ पैसा जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में भी खर्च किया जाता है।
इस मामले में तीन पूर्व सीएमओ और दो एडिशनल सीएमओ जांच के घेरे में हैं। इस संबंध में शासन से शिकायत की गई थी। वर्ष 2014-15 और साल 2015-16 में शासन से जो बजट मेरठ में सीएमओ कार्यालय को दिया गया था, उस बजट के जरिए जो सामान, उपकरण, दवाइयां आदि खरीदी जानी थीं, उनमें अनियमितताएं बरती गई हैं। डॉ. बद्री विशाल का कहना है कि जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि अनियमितताएं किस तरह की गई। जांच जारी है।
विज्ञापन
खास बातें:
दवाओं और सामान की खरीद में लाखों रुपये की अनियमितताओं का है मामला