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बिजनौर में छेड़छाड़ की घटनाओं में आई कमी

Tue, 19 Dec 2017 12:22 AM IST
Updated Tue, 19 Dec 2017 12:22 AM IST
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बिजनौर में छेड़छाड़ की घटनाओं में आई कमी
दुष्कर्म- छेड़खानी की घटनाओं में आई कमी
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घरों में बने शौचालय, खुले में शौच जाने के दौरान होने वाली घटनाएं कम हुई
अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर। जिला खुले में शौच से मुक्त होने के सार्थक परिणाम भी सामने आए और इस साल शौच जाने के दौरान महिलाओं और लड़कियों के साथ होने वाली छेड़खानी और दुष्कर्म की घटनाओं में क ाफी कमी आई है। इस साल दुष्कर्म की एक भी घटना नहीं हुई है। इससे पहले हर साल औसतन चार घटनाएं होती थी। इसके लिए केंद्र ने जिला प्रशासन की पीठ थपथपाई है।
केंद्र खुले में शौच से मुक्त घोषित हुए गांवों से आंकड़े जुटाकर यह जानने का प्रयास कर रहा है कि घरों में शौचालय बनने से महिलाओं के यौन उत्पीड़न की घटनाओं में कितनी कमी आई है। इसके तहत जिलों से रिपोर्ट मांगी गई थी। जिला प्रशासन द्वारा पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि खुले में शौच जाने वाली महिलाओं और लड़कियों के साथ होने वाली दुष्कर्म और छेड़खानी की घटनाओं में कमी आई है। हर साल औसतन चार महिलाएं खुले में जाने के दौरान दुष्कर्म की शिकार होती थी। छेड़खानी के मामले करीब दो दर्जन हो जाते थे।
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बता दें, जिले में ओडीएफ अभियान वर्ष 2015 में शुरू हुआ। केंद्र ने जिले का खुले में शौच मुक्त अभियान अर्थात ओडीएफके लिए चयन किया। जिले में 1128 ग्राम पंचायत , 2329 गांव तथा करीब पांच लाख ग्रामीण हैं। तत्कालीन डीएम एवं वर्तमान निदेशक स्वच्छता भारत मिशन विजय किरण आनंद ने ओडीएफ की कमान संभाली। गांव-गांव जाकर बैठक की। उनके बाद डीएम चंद्रकला महिलाओं को अभियान से जोड़ने का प्रयास किया। सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी और डीपीआरओ मनीष कुमार ने डोर टू डोर जाकर सर्वे किया और लोगों को जागरूक किया। लोगों के करीब डेढ़ लाख शौचालय पंचायतीराज विभाग व करीब एक लाख शौचालय लोगों ने स्वयं बनवाए। अगस्त माह में जिले पूर्ण ओडीएफ घोषित कर दिया गया। केंद्र ने इसके लिए जिला प्रशासन की पीठ ठोंकी है और माना है कि ओडीएफ का सकारात्मक प्रभाव हुआ है।
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वित्तीय वर्षवार विवरण
रेप की घटनाएं
वर्ष रेप की संख्या छेड़छाड़ की संख्या
2014-2015 04 23
2015-2016 04 21
20116-2017 04 20
2017-2018 शून्य 13
सभी आंकडे़ डीपीआरओ कार्यालय से प्राप्त ।
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