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इतिहास विभाग की टीम को ग्रामीणों ने नहीं ले जाने दी मूर्ति
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ग्रामीणों ने इतिहास विभाग की टीम को नहीं ले जाने दी मूर्ति
भावनपुर (मेरठ)। गांव औरंगाबाद में 1800 साल पुरानी सूर्यदेव की मूर्ति मिलने की जानकारी पर चौ. चरण सिंह विवि के इतिहास विभाग की टीम हस्तिनापुर पहुंची। टीम ने पुरातात्विक महत्व की इस मूर्ति को अपनी सुपुर्दगी में लेने का प्रयास किया। लेकिन ग्रामीणों ने मूर्ति देने से इनकार कर दिया। मामला पुलिस तक पहुंचा तो ग्रामीण हंगामा करने लगे। बाद में पुलिस ने प्राचीन मूर्ति को गांव के युवक संदीप की सुपुर्दगी में रखवा दिया।
ग्राम प्रधान एवं भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष मोहित ने बताया कि विवि से आई इतिहासकारों की टीम का शुभम पंवार, चेतन पंवार, संदीप शर्मा, महेश शर्मा, राकेश चौहान, अमन पाल, सोनू पाल, राहुल आदि ने विरोध किया। विवि की टीम ने ग्रामीणों को समझाया कि प्राचीन धरोहर को अगर सही जगह नहीं पहुंचाया गया तो उसके चोरी होने का डर है। अगर यह मूर्ति विवि के इतिहास संग्रहालय में रखी जाए तो शोध विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा। इस पर भी ग्रामीण नहीं माने। उन्होंने विरोध जताया तो विवि की टीम लौट गई।
विवि के इतिहास विभाग के प्रोफेसर विघ्नेश त्यागी ने कहा कि मूर्ति के पत्थर की जांच के बाद ही उसकी सही उम्र का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रथमदृष्टया यह राजा कनिष्क के काल की समझ आ रही है। उस काल में बहुत से मंदिरों का निर्माण हुआ था। मूर्ति का अर्किटेक्चर भी इसी ओर इशारा कर रहा है।
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पुरातत्व विभाग कराए खुदाई
हस्तिनापुर में मूर्ति का ठीक कराने पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि यह मूर्ति कई सालों पहले काली नदी के किनारे खुदाई में मिली थी। बुजुर्ग बताते हैं कि पुराने समय में नदी के किनारे बहुत बड़ा मंदिर था। अगर पुरातत्व विभाग गांव के पुराने टीलों की खुदाई कराए तो यहां और भी प्राचीन धरोहरें मिल सकती हैं।
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भावनपुर (मेरठ)। गांव औरंगाबाद में 1800 साल पुरानी सूर्यदेव की मूर्ति मिलने की जानकारी पर चौ. चरण सिंह विवि के इतिहास विभाग की टीम हस्तिनापुर पहुंची। टीम ने पुरातात्विक महत्व की इस मूर्ति को अपनी सुपुर्दगी में लेने का प्रयास किया। लेकिन ग्रामीणों ने मूर्ति देने से इनकार कर दिया। मामला पुलिस तक पहुंचा तो ग्रामीण हंगामा करने लगे। बाद में पुलिस ने प्राचीन मूर्ति को गांव के युवक संदीप की सुपुर्दगी में रखवा दिया।
ग्राम प्रधान एवं भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष मोहित ने बताया कि विवि से आई इतिहासकारों की टीम का शुभम पंवार, चेतन पंवार, संदीप शर्मा, महेश शर्मा, राकेश चौहान, अमन पाल, सोनू पाल, राहुल आदि ने विरोध किया। विवि की टीम ने ग्रामीणों को समझाया कि प्राचीन धरोहर को अगर सही जगह नहीं पहुंचाया गया तो उसके चोरी होने का डर है। अगर यह मूर्ति विवि के इतिहास संग्रहालय में रखी जाए तो शोध विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा। इस पर भी ग्रामीण नहीं माने। उन्होंने विरोध जताया तो विवि की टीम लौट गई।
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विवि के इतिहास विभाग के प्रोफेसर विघ्नेश त्यागी ने कहा कि मूर्ति के पत्थर की जांच के बाद ही उसकी सही उम्र का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रथमदृष्टया यह राजा कनिष्क के काल की समझ आ रही है। उस काल में बहुत से मंदिरों का निर्माण हुआ था। मूर्ति का अर्किटेक्चर भी इसी ओर इशारा कर रहा है।
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पुरातत्व विभाग कराए खुदाई
हस्तिनापुर में मूर्ति का ठीक कराने पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि यह मूर्ति कई सालों पहले काली नदी के किनारे खुदाई में मिली थी। बुजुर्ग बताते हैं कि पुराने समय में नदी के किनारे बहुत बड़ा मंदिर था। अगर पुरातत्व विभाग गांव के पुराने टीलों की खुदाई कराए तो यहां और भी प्राचीन धरोहरें मिल सकती हैं।