फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   विरासत में मिलने वाली बीमारी है हीमोफिलिया

विरासत में मिलने वाली बीमारी है हीमोफिलिया

Wed, 17 Apr 2019 02:10 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 17 Apr 2019 02:10 AM IST
विज्ञापन
विरासत में मिलने वाली बीमारी है हीमोफिलिया
विरासत में मिलने वाली बीमारी है हीमोफिलिया
विज्ञापन

माता-पिता से बच्चों में पहुंचती है, चोट लगने पर जल्दी नहीं रुकता खून
मेडिकल में मिलता है निशुल्क इलाज, निजी अस्पतालों में बहुत महंगा
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
हीमोफिलिया बच्चों को माता-पिता से विरासत में मिलने वाली बीमारी है। इसमें अगर शरीर से खून बहने लगता है तो फिर रुकता नहीं है। इस कारण चोट या दुर्घटना में यह जानलेवा साबित होती है। निजी अस्पतालों या डाक्टरों के यहां इसका इलाज काफी महंगा है, लेकिन मेडिकल कॉलेज में यह निशुल्क है। अगर किसी को यह बीमारी है तो वह मेडिकल की इमरजेंसी में जाकर अपना पंजीकरण करा सकता है। इस बीमारी के मरीज को इंजेक्शन, दवा के अलावा खून भी निशुल्क मिलता है।
लोगों में हीमोफिलिया (पैतृक रक्तस्राव) के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल 17 अप्रैल को विश्व हीमोफिलिया दिवस मनाया जाता है। जब दोषपूर्ण जीन, बच्चों के अंदर आता है तो बच्चा, इस बीमारी का शिकार हो जाता है। यह बीमारी रक्त में थ्राम्बोप्लास्टिन नामक पदार्थ की कमी से होती है। थ्राम्बोप्लास्टिक में खून को शीघ्र थक्का कर देने की क्षमता होती है। खून में इसके न होने से खून का बहना बंद नहीं होता है। इसके इलाज केलिए पहले विदेश से आने वाले इंजेक्शन की डोज बाजार में आठ से दस हजार की मिलती थी। निशुल्क लगवाने के लिए दिल्ली जाना पड़ता था। हीमोफिलिया बीमारी में फैक्टर 8 और नौ की डोज दी जाती है। मेडिकल में अधिकांश फैक्टर 8 के मरीज हैं। यह डोज मरीज को कभी-कभी महीनों तक नहीं देनी पड़ती, लेकिन कभी-कभी हर सप्ताह देनी पड़ती है। मेडिकल में मेरठ समेत दूसरे जनपदों के मरीजों को भी लाभ मिल रहा है। बिजनौर, मुजफ्फरनगर, बागपत, हापुड़ के मरीज तक आते हैं।
विज्ञापन

---
गंभीर चोट लगने पर ही जाता है ध्यान
हीमोफिलिया बीमारी दो तरह की होती है, हीमोफिलिया ए और हीमोफिलिया बी। इस बीमारी पर तब तक लोगों का ध्यान नहीं जाता जब तक कि उन्हें किसी कारण से गंभीर चोट न लगे या उसमें रक्त न रुके। ए के मरीज 10 हजार में से एक होते हैं, जबकि बी का मरीज 40 हजार में एक होता है। मेडिकल में पंजीकृत हीमोफीलिया के मरीजों में 20 बच्चे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

- डॉ. विजय जायसवाल, बाल रोग विशेषज्ञ मेडिकल कॉलेज
900 वायल होते हैं हर माह खर्च
मेडिकल कॉलेज में इस समय करीब 137 मरीज पंजीकृत हैं। हर माह करीब 900 वायल खर्च होतेे हैं। काफी लोग ऐसे हैं, जिन्हें जानकारी नहीं है कि मेडिकल में हीमोफिलिया का उपचार होता है। इसके लिए जागरूकता फैलाई जा रही है। - डॉ. योगिता सिंह, प्रभारी, मेडिकल हीमोफिलिया विभाग

यह है हीमोफिलिया
यह एक अनुवांशिक बीमारी है, जो आमतौर पर पुरुषों में होती है और महिलाएं द्वारा फैलती है। इसे पैतृक रक्तस्राव भी कहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस रोग का कारण एक रक्त प्रोटीन की कमी होती है, जिसे क्लॉटिंग फैक्टर कहा जाता है। इस फैक्टर की विशेषता यह है कि यह बहते हुए रक्त के थक्के जमाकर उसका बहना रोकता है। यह बीमारी रक्त में थ्राम्बोप्लास्टिन नामक पदार्थ की कमी से होती है।
लक्षण
- शरीर में नीले-नीले निशानों का बनना
- नाक से खून का बहना
- आंख के अंदर खून का निकलना
बचाव
- उचित चिकित्सक से सलाह और दवाइयां लें
- मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती के लिए व्यायाम करें
- ऐसे बच्चों को खेलते समय हेलमेट, एल्बो और जूते पहनाकर रखें
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed