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ब्लू व्हेल से कर रहे बच्चों की निगरानी
Updated Thu, 31 Aug 2017 02:55 AM IST
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मेरठ। मोबाइल पर इन दिनों चल रहे आनलाइन ब्लू व्हेल गेम ने अभिभावकों को परेशान कर दिया है। अभिभावक ों ने बच्चों की निगरानी बढ़ा दी है। वहीं स्कूलों में भी बच्चों को ब्लू व्हेल गेम के नुकसानों, खतरनाक टास्क की जानकारी दी जा रही है। बच्चे इस तरह के खतरनाक गेम्स से दूर रहें। इसलिए अभिभावकों को बच्चों के गैजेट हैबिट पर पूरा ध्यान देना होगा। साथ ही उनकी गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है।
अभिभावक, शिक्षक ऐसे रखें बच्चों पर निगरानी
साइकलोजिस्ट डॉ. पूनम देवदत्त कहती हैं ब्लू व्हेल बच्चों को दिमागी रूप से इतना अक्षम बना देता है कि बच्चा सही-गलत का अंतर भूल जाता है। गेम क्यूरेटर खिलाड़ी को भावनात्मक तौर पर कमजोर कर देता है। इसलिए अभिभावकों, शिक्षकों की अहम भूमिका है। बच्चा खतरनाक खेल का शिकार न बने इसलिए अभिभावक बच्चों पर पूरा ध्यान देकर इन बातों क ा ख्याल रखें। ब्लू व्हेल के किसी भी टास्क के लक्षण मिले तो फौरन बच्चे को मोबाइल से दूर करके साइकलॉजिस्ट की मदद लें।
इस तरह करें बच्चों की निगरानी
1. अभिभावक बच्चों पर पूरी नजर रखें, बच्चों के साथ एक दोस्त की तरह वक्त बिताएं।
2. बच्चे मोबाइल या गैजेट में क्या देख रहे हैं इसको चेक करें।
3. बेवजह के गेम्स व एप डाउनलोड न करने दें।
4. बच्चे की मोबाइल, गैजेट गतिविधियां क्या हैं इस पर ज्यादा से ज्यादा नजर रखें।
5. बच्चा गुमसुम, शांत या चिड़चिड़ा तो नहीं हो रहा इस पर ध्यान दें।
6. बच्चे के व्यवहार, उठने, सोने के वक्त या गतिविधियों में कोई परिवर्तन तो नहीं इसक ा ध्यान दें।
7. बच्चा स्कूल से आने के बाद क्या करता है, दिनभर की हर गतिविधि को चेक करें।
8. जरूरत न हो तो बच्चों के मोबाइल में इंटरनेट की सुविधा न दें।
9. बच्चे के साइबर यूज की हर जानकारी उससे लेते रहें।
10. शिक्षक ध्यान रखें कि स्कूल में बच्चे मोबाइल लाकर इस तरह की गतिविधि या गेम्स में मशगूल तो नहीं।
11. अभिभावक, शिक्षक बच्चे को इंटरनेट और ई गेम्स के लाभ नुकसान बताए।
12. बच्चे के स्वभाव या क्रियाकलापों में जरा भी अंतर दिखे फौरन मनोचिकित्सक की सलाह लें।
13 . मोबाइल के अच्छे प्रयोग व ज्ञानवर्द्धक एप व गेम्स की जानकारी बच्चों को दें।
ब्लू व्हेल का चक्रव्यूह तोड़ना मुश्किल
ब्लू व्हेल का चक्रव्यूह इतना जटिल है कि बच्चों का इससे निकलना बहुत मुश्किल होता है। बच्चा गुमसुम होकर चुपचाप इस व्यूह में फंसकर इसका शिकार हो जाता है। 50 दिन के इस खेल क ा अंतिम टास्क ऊंची छत से छलांग लगाना है। प्रतिदिन क्यूरेटर से मिलने वाले हर टास्क को पूरा करना और उसकी फोटो व वीडियो अपलोड करनी होती है। वीडियो, फोटो अपलोड करते ही आप व्हेल बनते जाते हैं, अतिरिक्त मार्क्स मिलते हैं।
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कहीं आपका बच्चा तो नहीं ब्लू व्हेल के इन 50 खतरनाक टास्क का शिकार
. सारे दिन हॉरर मूवी देखना।
. सुबह 4.20 पर उठकर मोबाइल पर स्कैरी वीडियो देखना।
. हाथ में रेजर से तीन कट लगाकर उसकी तस्वीर भेजना।
. प्लेन पेपर पर व्हेल की आकृति बनाकर फोटो खींचना।
. अगर आप व्हेल बनने क ो तैयार हैं तो पैर पर यस लिखना, अन्यथा खुद को सजा के तौर पर शरीर में कई स्थानों पर कट लगाकर फोटो भेजना
. हाथ में ब्लेड से 157 डिग्री का कट लगाकर व्हेल की आकृति बनाना।
. हाथ में ब्लेड से 140 डिग्री का कट लगाकर व्हेल की आकृति बनाना।
. सुबह 4.20 पर उठकर सबसे ऊंची छत पर जाना।
. क्यूरेटर से मिलने वाले ऑडियो को दिनभर सुनना।
. अपने होंठ को काटकर फोटो क्यूरेटर को भेजना।
. अपने हाथ में सुई को चुभाना।
. खुद को दर्द देकर बीमार बना लेना।
. ऊंचाई वाले पुल पर जाकर खड़े होना।
. क्रेन पर चढ़कर फोटो लेकर क्यूरेटर को भेजना।
. स्काइप पर किसी दूसरे ब्लू व्हेल खिलाड़ी से व्हेल की तरह चेटिंग करना।
. ऊंची छत पर जाकर नीचे की ओर पैर लटकाकर बैठना।
. दूसरे खिलाड़ी से व्हेल की तरह मिलना।
. क्यूरेटर आपको आपकी मौत की तिथि बताएगा और उसे स्वीकार करना होगा।
. सुबह 4.20 पर उठकर रेल की पटरियों पर जाना।
. दिनभर किसी से भी बात नहीं करना।
. हाथ पर एक व्रत बनाकर दिखाना कि आप एक व्हेल हैं।
. 30 से 49 वें टास्के में हर रोज सुबह 4.20 पर उठकर हॉरर फिल्में देखना, क्यूरेटर द्वारा भेजा संगीत सुनना हाथ में एक कट लगाना
. अंतिम 50वे ंदिन किसी ऊंची इमारत से नीचे छलांग लगाना।
. कुछ काम छिपकर करना, जो क्यूरेटर द्वारा दिए गए टास्क हैं।
ब्लू व्हेल खेलने से हुई प्रमुख दुर्घटनाएं
1. 26 जुलाई को केरला में 16 साल के बच्चे ने आत्महत्या कर ली।
2. 30 जुलाई को अंधेरी ईस्ट मुंबई में 14 साल के बच्चे ने इमारत की पांचवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी।
3. 10 अगस्त को मध्यप्रदेश इंदौर में सातवीं कक्षा के छात्र ने की आत्महत्या।
4. 10 अगस्त को ही सोलरपुर के 14 वर्षीय बच्चे ने आत्महत्या कर ली।
5. 12 अगस्त को आनंदपुर बंगाल निवासीा 10वीं के छात्र का शव बाथरूम में मिला। शव का चेहरा प्लास्टिक से ढका था हाथ में व्हेल की आकृति बनी थी।
6. 16 अगस्त केरला में 22 साल के युवा ने फ ांसी लगाकर आत्महत्या कर ली हाथ में व्हेल की आकृति मिली।
7. 27 अगस्त को 13 साल के छठवीं कक्षा में पढ़ने वाले हमीरपुर जिले के एक छात्र ने फांसी लगाकर जान दे दी हाथ में व्हेल की आकृति मिली।
वर्जन--
किशोर हो सकते हैं शिकार
9वीं से 11वीं कक्षा के छात्रों तक में ब्लू व्हेल खेलने का खतरा अधिक है। किशोर इस गेम का शिकार हो सकते हैं।किसी भी चीज को जानने, देखने की उत्सुकता उनमें बहुत ज्यादा होती है। इसी जिज्ञासा में बच्चे इस तरह के खतरनाक खेलों का शिकार हो जाते हैं। बच्चे इसका शिकार न हो पाएं इसलिए अभिभावक व शिक्षकों को बच्चों के साथ दोस्त की तरह पेश आना होगा। उन्हें पूरा वक्त दें। बच्चे की साइबर गतिविधियों पर पूरा ध्यान दें। -डॉ. पूनम देवदत्त, मनोचिकित्सक, सीबीएसई काउंसलर
इंटरनेट के प्रयोग की दे रहे जानकारी
स्कूल में बच्चों को मोबाइल लाना प्रतिबंधित है। शिक्षक भी स्कूल परिसर में मोबाइल का प्रयोग नहीं कर सकते। बच्चों क ो कक्षाओं में शिक्षकों के माध्यम से इंटरनेट के सही प्रयोग की जानकारी दे रहे हैं। इस तरह के खतरनाक गेम्स के नुकसान बता रहे हैं। -एचएम राउत, प्रिंसिपल दीवान पब्लिक स्कूल
अभिभावकों को करें सूचित
मोबाइल और इंटरनेट के फायदे, नुकसान बच्चों को असेंबली में बता रहे हैं। ताकि बच्चा इस तरह के गेम्स की शुरूआत ही नहीं कर पाए। बच्चे में जरा सा भी कोई परिवर्तन दिखता है तो तुरंत अभिभावकों को सूचित करें। -चंद्रलेखा जैन, प्रिंसिपल सेंट जोंस स्कूल
खास बातें
- अभिभावक बच्चों के गैजेट, गतिविधियों पर रखें कड़ी नजर
- स्कूलों में बताए जा रहे ब्लू व्हेल के नुकसान
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अभिभावक, शिक्षक ऐसे रखें बच्चों पर निगरानी
साइकलोजिस्ट डॉ. पूनम देवदत्त कहती हैं ब्लू व्हेल बच्चों को दिमागी रूप से इतना अक्षम बना देता है कि बच्चा सही-गलत का अंतर भूल जाता है। गेम क्यूरेटर खिलाड़ी को भावनात्मक तौर पर कमजोर कर देता है। इसलिए अभिभावकों, शिक्षकों की अहम भूमिका है। बच्चा खतरनाक खेल का शिकार न बने इसलिए अभिभावक बच्चों पर पूरा ध्यान देकर इन बातों क ा ख्याल रखें। ब्लू व्हेल के किसी भी टास्क के लक्षण मिले तो फौरन बच्चे को मोबाइल से दूर करके साइकलॉजिस्ट की मदद लें।
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इस तरह करें बच्चों की निगरानी
1. अभिभावक बच्चों पर पूरी नजर रखें, बच्चों के साथ एक दोस्त की तरह वक्त बिताएं।
2. बच्चे मोबाइल या गैजेट में क्या देख रहे हैं इसको चेक करें।
3. बेवजह के गेम्स व एप डाउनलोड न करने दें।
4. बच्चे की मोबाइल, गैजेट गतिविधियां क्या हैं इस पर ज्यादा से ज्यादा नजर रखें।
5. बच्चा गुमसुम, शांत या चिड़चिड़ा तो नहीं हो रहा इस पर ध्यान दें।
6. बच्चे के व्यवहार, उठने, सोने के वक्त या गतिविधियों में कोई परिवर्तन तो नहीं इसक ा ध्यान दें।
7. बच्चा स्कूल से आने के बाद क्या करता है, दिनभर की हर गतिविधि को चेक करें।
8. जरूरत न हो तो बच्चों के मोबाइल में इंटरनेट की सुविधा न दें।
9. बच्चे के साइबर यूज की हर जानकारी उससे लेते रहें।
10. शिक्षक ध्यान रखें कि स्कूल में बच्चे मोबाइल लाकर इस तरह की गतिविधि या गेम्स में मशगूल तो नहीं।
11. अभिभावक, शिक्षक बच्चे को इंटरनेट और ई गेम्स के लाभ नुकसान बताए।
12. बच्चे के स्वभाव या क्रियाकलापों में जरा भी अंतर दिखे फौरन मनोचिकित्सक की सलाह लें।
13 . मोबाइल के अच्छे प्रयोग व ज्ञानवर्द्धक एप व गेम्स की जानकारी बच्चों को दें।
ब्लू व्हेल का चक्रव्यूह तोड़ना मुश्किल
ब्लू व्हेल का चक्रव्यूह इतना जटिल है कि बच्चों का इससे निकलना बहुत मुश्किल होता है। बच्चा गुमसुम होकर चुपचाप इस व्यूह में फंसकर इसका शिकार हो जाता है। 50 दिन के इस खेल क ा अंतिम टास्क ऊंची छत से छलांग लगाना है। प्रतिदिन क्यूरेटर से मिलने वाले हर टास्क को पूरा करना और उसकी फोटो व वीडियो अपलोड करनी होती है। वीडियो, फोटो अपलोड करते ही आप व्हेल बनते जाते हैं, अतिरिक्त मार्क्स मिलते हैं।
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कहीं आपका बच्चा तो नहीं ब्लू व्हेल के इन 50 खतरनाक टास्क का शिकार
. सारे दिन हॉरर मूवी देखना।
. सुबह 4.20 पर उठकर मोबाइल पर स्कैरी वीडियो देखना।
. हाथ में रेजर से तीन कट लगाकर उसकी तस्वीर भेजना।
. प्लेन पेपर पर व्हेल की आकृति बनाकर फोटो खींचना।
. अगर आप व्हेल बनने क ो तैयार हैं तो पैर पर यस लिखना, अन्यथा खुद को सजा के तौर पर शरीर में कई स्थानों पर कट लगाकर फोटो भेजना
. हाथ में ब्लेड से 157 डिग्री का कट लगाकर व्हेल की आकृति बनाना।
. हाथ में ब्लेड से 140 डिग्री का कट लगाकर व्हेल की आकृति बनाना।
. सुबह 4.20 पर उठकर सबसे ऊंची छत पर जाना।
. क्यूरेटर से मिलने वाले ऑडियो को दिनभर सुनना।
. अपने होंठ को काटकर फोटो क्यूरेटर को भेजना।
. अपने हाथ में सुई को चुभाना।
. खुद को दर्द देकर बीमार बना लेना।
. ऊंचाई वाले पुल पर जाकर खड़े होना।
. क्रेन पर चढ़कर फोटो लेकर क्यूरेटर को भेजना।
. स्काइप पर किसी दूसरे ब्लू व्हेल खिलाड़ी से व्हेल की तरह चेटिंग करना।
. ऊंची छत पर जाकर नीचे की ओर पैर लटकाकर बैठना।
. दूसरे खिलाड़ी से व्हेल की तरह मिलना।
. क्यूरेटर आपको आपकी मौत की तिथि बताएगा और उसे स्वीकार करना होगा।
. सुबह 4.20 पर उठकर रेल की पटरियों पर जाना।
. दिनभर किसी से भी बात नहीं करना।
. हाथ पर एक व्रत बनाकर दिखाना कि आप एक व्हेल हैं।
. 30 से 49 वें टास्के में हर रोज सुबह 4.20 पर उठकर हॉरर फिल्में देखना, क्यूरेटर द्वारा भेजा संगीत सुनना हाथ में एक कट लगाना
. अंतिम 50वे ंदिन किसी ऊंची इमारत से नीचे छलांग लगाना।
. कुछ काम छिपकर करना, जो क्यूरेटर द्वारा दिए गए टास्क हैं।
ब्लू व्हेल खेलने से हुई प्रमुख दुर्घटनाएं
1. 26 जुलाई को केरला में 16 साल के बच्चे ने आत्महत्या कर ली।
2. 30 जुलाई को अंधेरी ईस्ट मुंबई में 14 साल के बच्चे ने इमारत की पांचवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी।
3. 10 अगस्त को मध्यप्रदेश इंदौर में सातवीं कक्षा के छात्र ने की आत्महत्या।
4. 10 अगस्त को ही सोलरपुर के 14 वर्षीय बच्चे ने आत्महत्या कर ली।
5. 12 अगस्त को आनंदपुर बंगाल निवासीा 10वीं के छात्र का शव बाथरूम में मिला। शव का चेहरा प्लास्टिक से ढका था हाथ में व्हेल की आकृति बनी थी।
6. 16 अगस्त केरला में 22 साल के युवा ने फ ांसी लगाकर आत्महत्या कर ली हाथ में व्हेल की आकृति मिली।
7. 27 अगस्त को 13 साल के छठवीं कक्षा में पढ़ने वाले हमीरपुर जिले के एक छात्र ने फांसी लगाकर जान दे दी हाथ में व्हेल की आकृति मिली।
वर्जन--
किशोर हो सकते हैं शिकार
9वीं से 11वीं कक्षा के छात्रों तक में ब्लू व्हेल खेलने का खतरा अधिक है। किशोर इस गेम का शिकार हो सकते हैं।किसी भी चीज को जानने, देखने की उत्सुकता उनमें बहुत ज्यादा होती है। इसी जिज्ञासा में बच्चे इस तरह के खतरनाक खेलों का शिकार हो जाते हैं। बच्चे इसका शिकार न हो पाएं इसलिए अभिभावक व शिक्षकों को बच्चों के साथ दोस्त की तरह पेश आना होगा। उन्हें पूरा वक्त दें। बच्चे की साइबर गतिविधियों पर पूरा ध्यान दें। -डॉ. पूनम देवदत्त, मनोचिकित्सक, सीबीएसई काउंसलर
इंटरनेट के प्रयोग की दे रहे जानकारी
स्कूल में बच्चों को मोबाइल लाना प्रतिबंधित है। शिक्षक भी स्कूल परिसर में मोबाइल का प्रयोग नहीं कर सकते। बच्चों क ो कक्षाओं में शिक्षकों के माध्यम से इंटरनेट के सही प्रयोग की जानकारी दे रहे हैं। इस तरह के खतरनाक गेम्स के नुकसान बता रहे हैं। -एचएम राउत, प्रिंसिपल दीवान पब्लिक स्कूल
अभिभावकों को करें सूचित
मोबाइल और इंटरनेट के फायदे, नुकसान बच्चों को असेंबली में बता रहे हैं। ताकि बच्चा इस तरह के गेम्स की शुरूआत ही नहीं कर पाए। बच्चे में जरा सा भी कोई परिवर्तन दिखता है तो तुरंत अभिभावकों को सूचित करें। -चंद्रलेखा जैन, प्रिंसिपल सेंट जोंस स्कूल
खास बातें
- अभिभावक बच्चों के गैजेट, गतिविधियों पर रखें कड़ी नजर
- स्कूलों में बताए जा रहे ब्लू व्हेल के नुकसान