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नूरपुर चुनाव की खबर
Updated Sat, 28 Apr 2018 12:24 AM IST
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बिजनौर। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल, एमएलसी आनंद भदौरिया, परवेज अली, अमित यादव और शशांक यादव कई दिनों तक इलाके में वोटरों की नब्ज टटोलने के बाद लौट गए हैं। इन्होंने प्रत्याशी के चयन से पहले नूरपुर के जातीय व धार्मिक समीकरणों की जानकारी ली। सपा में दावेदारों की लिस्ट लगातार लंबी हो रही हैै। सपा से मुस्लिम बिरादरी से नईमुलइसन, रफी सैफी, इरशाद अहमद टिकट मांग रहे हैं। इनके अलावा पूर्व मंत्री मूलचंद चौहान के बेटे अमित चौहान, महीपाल चौहान, वैश्य समाज से वीरेंद्र रस्तोगी, राधा सैनी, मंशाराम सैनी, मदन सैनी, कुंतेश सैनी टिकट मांग रहे हैं। पूर्व विधायक रुचि वीरा के खेेमे ने सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम से मुलाकात के दौरान नईमुल हसन के साथ पूर्व मंत्री स्वामी ओमवेश नूरपुर नाम भी सुझाया। पूर्व मंत्री मूलचंद चौहान का खेमा उनके पुत्र अमित चौहान तो टिकट देने की वकालत कर रहा है। सपा गठबंधन के तहत इस सीट पर चुनाव लड़ना चाहती हैं। बसपा, कांग्रेस और रालोद इस सीट से प्रत्याशी नहीं उतार रहे हैं। इस बात के संकेत इन दलों के नेता पहले ही दे चुके हैं।
रमजान में मुस्लिम मतदाताओं को
बूथों तक ले जाना भी होगी चुनौती
सहारनपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा में उप चुनाव रमजान के पवित्र माह के बीच हो रहा है। ऐसे में पहला रोजा 17 मई का बताया गया है। दोनों सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की काफी तादाद है। रोजा और ऊपर से गर्मी में रोजेदारों को बूथ तक लाना राजनीतिक पार्टी के लोगों के लिए बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में शत-प्रतिशत रोजेदारों के बूथ तक पहुंचने में अभी से सवाल उठने लगे हैं। यह भी उस स्थिति में, जब निर्वाचन आयोग मतदान प्रतिशत बढ़ाने को जी-जान से जुटा है। बृहस्पतिवार को सहारनपुर आए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने उम्मीद जताई थी कि पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार मतदान प्रतिशत बढ़ेगा। राजनीतिक दलों में हलचल तो जरूर है, मगर अभी कही से उप चुनाव की तिथि को लेकर कोई आवाज नहीं उठी है, मगर मतदान प्रतिशत प्रभावित होने की आशंकाओं से इंकार नहीं किया जा रहा है।
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रमजान में मुस्लिम मतदाताओं को
बूथों तक ले जाना भी होगी चुनौती
सहारनपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा में उप चुनाव रमजान के पवित्र माह के बीच हो रहा है। ऐसे में पहला रोजा 17 मई का बताया गया है। दोनों सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की काफी तादाद है। रोजा और ऊपर से गर्मी में रोजेदारों को बूथ तक लाना राजनीतिक पार्टी के लोगों के लिए बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में शत-प्रतिशत रोजेदारों के बूथ तक पहुंचने में अभी से सवाल उठने लगे हैं। यह भी उस स्थिति में, जब निर्वाचन आयोग मतदान प्रतिशत बढ़ाने को जी-जान से जुटा है। बृहस्पतिवार को सहारनपुर आए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने उम्मीद जताई थी कि पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार मतदान प्रतिशत बढ़ेगा। राजनीतिक दलों में हलचल तो जरूर है, मगर अभी कही से उप चुनाव की तिथि को लेकर कोई आवाज नहीं उठी है, मगर मतदान प्रतिशत प्रभावित होने की आशंकाओं से इंकार नहीं किया जा रहा है।
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