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10 लोगों को मिले गनर, तीन पात्रता से बाहर
Updated Tue, 16 Jan 2018 02:57 AM IST
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मेरठ। गनर लेने के आवेदनों का निस्तारण करते हुए शासन ने 13 में से तीन के आवेदन निरस्त कर दिए। 10 लोगों को छह माह के लिए सुरक्षाकर्मी प्रदान करने की स्वीकृति दी है। निरस्त आवेदनों में पूर्व सांसद शाहिद अखलाक का आवेदन भी शामिल है।
जान को खतरा बताते हुए शहर के नेताओं, व्यापारियों और गणमान्य लोगों द्वारा आवेदन किए गए थे। जिस पर पुलिस-प्रशासन के साथ ही एलआईयू की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने जिलाधिकारी और एसएसपी को सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराने संबंधी पत्र जारी किया है। उपसचिव सुनील कुमार के पत्र में बताया गया कि शाहिद अखलाक के पास शस्त्र लाइसेंस है और उनके जीवन को कोई खतरा महसूस नहीं हो रहा है। इसलिए सुरक्षाकर्मी प्रदान नहीं किया जाएगा। इसी तरह सपा नेता सुधाकर कश्यप का आवेदन भी उनके जीवन को खतरा न मानते हुए निरस्त कर दिया गया। जबकि शहर के एक बड़े बिल्डर का आवेदन भी इसी तर्ज पर निरस्त कर दिया गया, क्योंकि उनके खुद के नाम पर दो शस्त्र लाइसेंस होने के कारण गनर उपलब्ध न कराने का निर्णय शासन ने लिया।
वहीं, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके तनेजा को 10 प्रतिशत निजी व्यय पर एक सुरक्षाकर्मी, ग्राम अतराडा के पूर्व ग्राम प्रधान देवेंद्र त्यागी को 10 प्रतिशत निजी खर्च पर एक सुरक्षाकर्मी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामजीवन लाल को 10 प्रतिशत निजी व्यय पर एक सुरक्षाकर्मी, पूर्व एमएलसी हरपाल सैनी को नि:शुल्क एक सुरक्षाकर्मी, शिक्षक एमएलसी ओमप्रकाश शर्मा को एक अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी नि:शुल्क देने की स्वीकृति दी गयी है।
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इनके अलावा व्यापारी नीरज मित्तल को 25 प्रतिशत निजी व्यय पर एक सुरक्षाकर्मी, उद्यमी राजेश दीवान को 10 प्रतिशत निजी व्यय पर एक सुरक्षाकर्मी, एडवोकेट ओपी शर्मा को 10 प्रतिशत निजी व्यय पर एक सुरक्षाकर्मी, व्यापारी सतीश चंद तेवतिया को 25 प्रतिशत निजी व्यय पर एक सुरक्षाकर्मी तथा पूर्व एमएलसी डॉ. सरोजनी अग्रवाल को एक सुरक्षाकर्मी नि:शुल्क प्रदान करने के निर्देश शासन ने दिए हैं।
- 13 लोगों ने भेजे थे शासन को आवेदन, पूर्व सांसद शाहिद अखलाक को भी नहीं मिला सुरक्षाकर्मी
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जान को खतरा बताते हुए शहर के नेताओं, व्यापारियों और गणमान्य लोगों द्वारा आवेदन किए गए थे। जिस पर पुलिस-प्रशासन के साथ ही एलआईयू की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने जिलाधिकारी और एसएसपी को सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराने संबंधी पत्र जारी किया है। उपसचिव सुनील कुमार के पत्र में बताया गया कि शाहिद अखलाक के पास शस्त्र लाइसेंस है और उनके जीवन को कोई खतरा महसूस नहीं हो रहा है। इसलिए सुरक्षाकर्मी प्रदान नहीं किया जाएगा। इसी तरह सपा नेता सुधाकर कश्यप का आवेदन भी उनके जीवन को खतरा न मानते हुए निरस्त कर दिया गया। जबकि शहर के एक बड़े बिल्डर का आवेदन भी इसी तर्ज पर निरस्त कर दिया गया, क्योंकि उनके खुद के नाम पर दो शस्त्र लाइसेंस होने के कारण गनर उपलब्ध न कराने का निर्णय शासन ने लिया।
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वहीं, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके तनेजा को 10 प्रतिशत निजी व्यय पर एक सुरक्षाकर्मी, ग्राम अतराडा के पूर्व ग्राम प्रधान देवेंद्र त्यागी को 10 प्रतिशत निजी खर्च पर एक सुरक्षाकर्मी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामजीवन लाल को 10 प्रतिशत निजी व्यय पर एक सुरक्षाकर्मी, पूर्व एमएलसी हरपाल सैनी को नि:शुल्क एक सुरक्षाकर्मी, शिक्षक एमएलसी ओमप्रकाश शर्मा को एक अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी नि:शुल्क देने की स्वीकृति दी गयी है।
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इनके अलावा व्यापारी नीरज मित्तल को 25 प्रतिशत निजी व्यय पर एक सुरक्षाकर्मी, उद्यमी राजेश दीवान को 10 प्रतिशत निजी व्यय पर एक सुरक्षाकर्मी, एडवोकेट ओपी शर्मा को 10 प्रतिशत निजी व्यय पर एक सुरक्षाकर्मी, व्यापारी सतीश चंद तेवतिया को 25 प्रतिशत निजी व्यय पर एक सुरक्षाकर्मी तथा पूर्व एमएलसी डॉ. सरोजनी अग्रवाल को एक सुरक्षाकर्मी नि:शुल्क प्रदान करने के निर्देश शासन ने दिए हैं।
- 13 लोगों ने भेजे थे शासन को आवेदन, पूर्व सांसद शाहिद अखलाक को भी नहीं मिला सुरक्षाकर्मी