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जिला सदस्यों की शिकायत पर मंडलायुक्त ने बैठायी जांच
Updated Fri, 12 Jan 2018 02:01 AM IST
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जिला पंचायत सदस्यों की शिकायत पर जांच बैठी
मेरठ। जिला पंचायत में स्वीकृत विकास कार्यों को लेकर चल रहे विवाद के मामले में जांच बैठ गई है। मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने जिलाधिकारी समीर वर्मा को जांच सौंपते हुए रिपोर्ट मांगी है। वहीं एएमए से भी रिकार्ड तलब किया है।
जिला पंचायत सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए जिला पंचायत बोर्ड में प्रस्ताव भेजे थे। करीब 17.50 करोड़ रुपये के प्रस्तावोें के विपरीत लगभग 15.25 करोड़ के प्रस्ताव स्वीकृत हुए। लेकिन जब इन स्वीकृत प्रस्तावों को जिला पंचायत सदस्यों ने देखा तो वह चौंक गये। क्योंकि आधा दर्जन सदस्यों के प्रस्तावों में न केवल भारी कांट छांट की गई, बल्कि उनके ही वार्ड में दूसरे सदस्यों या अन्य लोगों के प्रस्तावों पर काम स्वीकृत कर दिए गए।
इस मामले को लेकर मंगलवार को जिला पंचायत सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला, रोहताश पहलवान, ललित चौहान, सतपाल सिंह आदि मंडलायुक्त से मिले और शिकायती पत्र सौंपते हुए पूरी बात बताई। इस पर मंडलायुक्त ने इस मामले की जांच जिलाधिकारी समीर वर्मा को सौंपी है। वहीं मंडलायुक्त ने जिला पंचायत के एएमए से भी बोर्ड बैठक, उसका एजेंडा, बैठक में रखे गये प्रस्ताव, सदस्यों को द्वारा सौंपे गये विकास कार्यों के प्रस्तावों के विपरीत स्वीकृत प्रस्ताव आदि का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।
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फिर शुरू हुआ घमासान
जिला पंचायत में एक बार फिर घमासान शुरू हो गया है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान का सवा साल का कार्यकाल जहां पूरी तरह हंगामे में बीता तो अब उपचुनाव में जीतकर आए कुलविंदर सिंह भी सदस्यों को साध नहीं पा रहे हैं। उनके खुद के समर्थक भी दूर होने लगे हैं। विकास कार्यों के स्वीकृत प्रस्तावों को लेकर जो विवाद शुरू हुआ है, उसमें एक तरफ जहां प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू हुई तो दूसरी तरफ कुछ सदस्य हाईकोर्ट का भी रुख कर रहे हैं। जबकि शासन स्तर पर भी इस मामले में शिकायतें और दबाव शुरू हो गया है। जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर सिंह इन दिनों लखनऊ में हैं। वहीं उनके विरोधी भी लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं।
खास बात
मंडलायुक्त ने सौंपी डीएम को जांच, एएमए से भी तलब की तमाम अभिलेख
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मेरठ। जिला पंचायत में स्वीकृत विकास कार्यों को लेकर चल रहे विवाद के मामले में जांच बैठ गई है। मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने जिलाधिकारी समीर वर्मा को जांच सौंपते हुए रिपोर्ट मांगी है। वहीं एएमए से भी रिकार्ड तलब किया है।
जिला पंचायत सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए जिला पंचायत बोर्ड में प्रस्ताव भेजे थे। करीब 17.50 करोड़ रुपये के प्रस्तावोें के विपरीत लगभग 15.25 करोड़ के प्रस्ताव स्वीकृत हुए। लेकिन जब इन स्वीकृत प्रस्तावों को जिला पंचायत सदस्यों ने देखा तो वह चौंक गये। क्योंकि आधा दर्जन सदस्यों के प्रस्तावों में न केवल भारी कांट छांट की गई, बल्कि उनके ही वार्ड में दूसरे सदस्यों या अन्य लोगों के प्रस्तावों पर काम स्वीकृत कर दिए गए।
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इस मामले को लेकर मंगलवार को जिला पंचायत सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला, रोहताश पहलवान, ललित चौहान, सतपाल सिंह आदि मंडलायुक्त से मिले और शिकायती पत्र सौंपते हुए पूरी बात बताई। इस पर मंडलायुक्त ने इस मामले की जांच जिलाधिकारी समीर वर्मा को सौंपी है। वहीं मंडलायुक्त ने जिला पंचायत के एएमए से भी बोर्ड बैठक, उसका एजेंडा, बैठक में रखे गये प्रस्ताव, सदस्यों को द्वारा सौंपे गये विकास कार्यों के प्रस्तावों के विपरीत स्वीकृत प्रस्ताव आदि का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।
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फिर शुरू हुआ घमासान
जिला पंचायत में एक बार फिर घमासान शुरू हो गया है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान का सवा साल का कार्यकाल जहां पूरी तरह हंगामे में बीता तो अब उपचुनाव में जीतकर आए कुलविंदर सिंह भी सदस्यों को साध नहीं पा रहे हैं। उनके खुद के समर्थक भी दूर होने लगे हैं। विकास कार्यों के स्वीकृत प्रस्तावों को लेकर जो विवाद शुरू हुआ है, उसमें एक तरफ जहां प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू हुई तो दूसरी तरफ कुछ सदस्य हाईकोर्ट का भी रुख कर रहे हैं। जबकि शासन स्तर पर भी इस मामले में शिकायतें और दबाव शुरू हो गया है। जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर सिंह इन दिनों लखनऊ में हैं। वहीं उनके विरोधी भी लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं।
खास बात
मंडलायुक्त ने सौंपी डीएम को जांच, एएमए से भी तलब की तमाम अभिलेख