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कैसे लगेगी 7 हजार अवैध ई-रिक् शाओं पर लगाम
Updated Thu, 28 Dec 2017 02:33 AM IST
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मेरठ। ट्रैफिक पुलिस ने एक जनवरी से ई-रिक्शाओं के लिए शहर में रूट सिस्टम लागू कर दिया है। विभाग का दावा है कि केवल आरटीओ में पंजीकृत ई-रिक्शा ही चलने दिए जाएंगे। लेकिन सवाल है कि शहर की सड़कों पर दौड़ रहे करीब सात हजार अवैध ई रिक्शाओं पर लगाम कैसे लगेगी।
शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने ये व्यवस्था लागू की है। दावा है कि इस व्यवस्था में केवल आरटीओ में पंजीकृत ई-रिक्शा ही शहर में चलेंगे। शहर में दौड़ रहे अवैध ई-रिक्शा बंद हो जाएंगे। जो भी चलता मिलेगा उसे सीज किया जाएगा। जुर्माने के साथ शपथ पत्र लेकर उसके पुर्जे अलग करने के बाद ही दिया जाएगा।
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार आरटीओ में वर्तमान में करीब 35 सौ ई-रिक्शाओं का रजिस्ट्रेशन है, जबकि शहर में 10 हजार से अधिक ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। ऐसे में करीब 7 हजार ई-रिक्शा अवैध रूप से दौड़ रहे हैं। इन रिक्शाओं से बहुत से लोगों की रोजी रोटी भी चल रही है, ऐसे में ये लोग इतनी आसानी से अपने ई-रिक्शा बंद नहीं करेंगे। ट्रैफिक पुलिस पर इतनी बड़ी संख्या में ई-रिक्शाओं पर कार्रवाई भी आसान नहीं होगी।
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ट्रैफिक पुलिस के पास पहले से ही स्टाफ कम है। विभाग में केवल 107 सिपाही हैं। जिन पर ट्रैफिक संचालन के साथ 7 हजार ई-रिक्शाओं को पकड़ने की जिम्मेदारी होगी। इन ई-रिक्शाओं के खड़ी करने के लिए इतनी जगह भी नहीं है। इन्हें पकड़कर पुर्जे अलग करने के लिए भी विभाग के पास कोई तकनीकी स्टाफ नहीं है और न ही इसके लिए कोई बजट है।
वहीं, ई-रिक्शा कटान के नाम पर भी फिलहाल खानापूरी ही होती है। कुछ दिन बाद ही लोग ई-रिक्शा के पार्ट्स जुड़वाकर फिर से चलाने लगते हैं। एक बार एक ई-रिक्शा काटा गया था तो परिवार की महिला एसपी ट्रैफिक कार्यालय पर ही फूट पड़ी थी। ऐसे में सात हजार अवैध ई-रिक्शाओं पर कार्रवाई ट्रैफिक पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
1000 ने लिए रूट नंबर
एसपी ट्रैफिक कार्यालय में चल रहे ई-रिक्शाओं के रूट आवंटन काम में कुछ तेजी आई है। टीएसआई के अनुसार बुधवार तक करीब एक हजार ई-रिक्शाओं को रूट नंबर आवंटित किए गए हैं। उम्मीद है कि 31 दिसंबर तक सभी पंजीकृत ई-रिक्शा चालक रूट नंबर ले लेंगे। एसपी ट्रैफिक के अनुसार आरटीओ में पंजीकृत ई-रिक्शाओं को ही चलने दिया जाएगा। अवैध ई-रिक्शाओं के पार्ट्स अलग किए जाएंगे। ई रिक्शाओं को पुलिस लाइन के मैदान में खड़े करने की भी पर्याप्त जगह है। पब्लिक के सहयोग से पुलिस इसमें सफल होगी।
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शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने ये व्यवस्था लागू की है। दावा है कि इस व्यवस्था में केवल आरटीओ में पंजीकृत ई-रिक्शा ही शहर में चलेंगे। शहर में दौड़ रहे अवैध ई-रिक्शा बंद हो जाएंगे। जो भी चलता मिलेगा उसे सीज किया जाएगा। जुर्माने के साथ शपथ पत्र लेकर उसके पुर्जे अलग करने के बाद ही दिया जाएगा।
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ट्रैफिक पुलिस के अनुसार आरटीओ में वर्तमान में करीब 35 सौ ई-रिक्शाओं का रजिस्ट्रेशन है, जबकि शहर में 10 हजार से अधिक ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। ऐसे में करीब 7 हजार ई-रिक्शा अवैध रूप से दौड़ रहे हैं। इन रिक्शाओं से बहुत से लोगों की रोजी रोटी भी चल रही है, ऐसे में ये लोग इतनी आसानी से अपने ई-रिक्शा बंद नहीं करेंगे। ट्रैफिक पुलिस पर इतनी बड़ी संख्या में ई-रिक्शाओं पर कार्रवाई भी आसान नहीं होगी।
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ट्रैफिक पुलिस के पास पहले से ही स्टाफ कम है। विभाग में केवल 107 सिपाही हैं। जिन पर ट्रैफिक संचालन के साथ 7 हजार ई-रिक्शाओं को पकड़ने की जिम्मेदारी होगी। इन ई-रिक्शाओं के खड़ी करने के लिए इतनी जगह भी नहीं है। इन्हें पकड़कर पुर्जे अलग करने के लिए भी विभाग के पास कोई तकनीकी स्टाफ नहीं है और न ही इसके लिए कोई बजट है।
वहीं, ई-रिक्शा कटान के नाम पर भी फिलहाल खानापूरी ही होती है। कुछ दिन बाद ही लोग ई-रिक्शा के पार्ट्स जुड़वाकर फिर से चलाने लगते हैं। एक बार एक ई-रिक्शा काटा गया था तो परिवार की महिला एसपी ट्रैफिक कार्यालय पर ही फूट पड़ी थी। ऐसे में सात हजार अवैध ई-रिक्शाओं पर कार्रवाई ट्रैफिक पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
1000 ने लिए रूट नंबर
एसपी ट्रैफिक कार्यालय में चल रहे ई-रिक्शाओं के रूट आवंटन काम में कुछ तेजी आई है। टीएसआई के अनुसार बुधवार तक करीब एक हजार ई-रिक्शाओं को रूट नंबर आवंटित किए गए हैं। उम्मीद है कि 31 दिसंबर तक सभी पंजीकृत ई-रिक्शा चालक रूट नंबर ले लेंगे। एसपी ट्रैफिक के अनुसार आरटीओ में पंजीकृत ई-रिक्शाओं को ही चलने दिया जाएगा। अवैध ई-रिक्शाओं के पार्ट्स अलग किए जाएंगे। ई रिक्शाओं को पुलिस लाइन के मैदान में खड़े करने की भी पर्याप्त जगह है। पब्लिक के सहयोग से पुलिस इसमें सफल होगी।