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देश के संसाधनों पर पहला अधिकार किसान और जवान का: जयंत चौधरी
Updated Sun, 17 Dec 2017 02:21 AM IST
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मेरठ। देश के संसाधनों पर पहला अधिकार जवान और किसानों का है। देश में दोनों को ही हक पूरी तरह नहीं मिल रहा है। यह बात पूर्व सांसद एवं रालोद के राष्ट्रीय महासचिव जयंत चौधरी ने चौ. चरण सिंह विवि के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कही।
उन्होंने कहा कि सरकारों को चाहिए कि वह विकास की योजनाओं के नाम शहीदों के नाम से हो। यदि सरकार शहीद स्मृति ग्राम विकास योजना शुरू करें तो शहीद सम्मान के साथ-साथ युवा पीढ़ी में जोश, राष्ट्र प्रेम और देश रक्षा का जज्बा पैदा होगा। उन्होंने कहा कि एक्स सर्विस मैन हेल्थ कंट्रीब्यूटरी स्कीम के पॉलिक्लीनिक सभी जनपदों में नहीं खुल पाए हैं। युवा अवस्था में सेवानिवृत्त से रोजगार संकट बढ़ता है। सरकारों को इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 1971 की लड़ाई के बाद से शहीदों के बच्चों की शिक्षा व हॉस्टल आदि का खर्च केंद्र सरकार वहन करती थीं, लेकिन अब उसकी सीमा 10 हजार रुपये तय कर दी है। विशिष्ट अतिथि मेजर जनरल बीएस पंवार ने 1971 के युद्ध के योद्धा फील्ड मार्शल जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा, कर्नल होशियार सिंह दहिया, लांसनायक अलबर्ट इक्का आदि के जीवन परिचय और योगदान पर प्रकाश डाला। कर्नल एसपी सिंह ने उपस्थित पूर्व सैनिकों से अपने अनुभव साझा किए। पूर्व मंत्री डॉ. मेराजुद्दीन अहमद, किसान नेता राममेहर सिंह गुर्जर, मंडल अध्यक्ष योगेश फौजी, रालोद प्रदेश प्रवक्ता सुनील रोहटा ने भी विचार रखे। अध्यक्षता जिला अध्यक्ष राहुल देव ने की और संचालन डॉ. विक्रांत जावला ने किया। अलख संस्था का विशेष सहयोग रहा ।
राष्ट्रीय लोकदल के चौ. यशवीर सिंह डॉ. राजकुमार सांगवान, चौ. रतन सिंह, विकास सिंह भैंसा, रणवीर दहिया, पप्पू गुर्जर, राजेंद्र चिकारा, हरेंद्र ढढरा, विनय मल्लापुर आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि सरकारों को चाहिए कि वह विकास की योजनाओं के नाम शहीदों के नाम से हो। यदि सरकार शहीद स्मृति ग्राम विकास योजना शुरू करें तो शहीद सम्मान के साथ-साथ युवा पीढ़ी में जोश, राष्ट्र प्रेम और देश रक्षा का जज्बा पैदा होगा। उन्होंने कहा कि एक्स सर्विस मैन हेल्थ कंट्रीब्यूटरी स्कीम के पॉलिक्लीनिक सभी जनपदों में नहीं खुल पाए हैं। युवा अवस्था में सेवानिवृत्त से रोजगार संकट बढ़ता है। सरकारों को इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 1971 की लड़ाई के बाद से शहीदों के बच्चों की शिक्षा व हॉस्टल आदि का खर्च केंद्र सरकार वहन करती थीं, लेकिन अब उसकी सीमा 10 हजार रुपये तय कर दी है। विशिष्ट अतिथि मेजर जनरल बीएस पंवार ने 1971 के युद्ध के योद्धा फील्ड मार्शल जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा, कर्नल होशियार सिंह दहिया, लांसनायक अलबर्ट इक्का आदि के जीवन परिचय और योगदान पर प्रकाश डाला। कर्नल एसपी सिंह ने उपस्थित पूर्व सैनिकों से अपने अनुभव साझा किए। पूर्व मंत्री डॉ. मेराजुद्दीन अहमद, किसान नेता राममेहर सिंह गुर्जर, मंडल अध्यक्ष योगेश फौजी, रालोद प्रदेश प्रवक्ता सुनील रोहटा ने भी विचार रखे। अध्यक्षता जिला अध्यक्ष राहुल देव ने की और संचालन डॉ. विक्रांत जावला ने किया। अलख संस्था का विशेष सहयोग रहा ।
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राष्ट्रीय लोकदल के चौ. यशवीर सिंह डॉ. राजकुमार सांगवान, चौ. रतन सिंह, विकास सिंह भैंसा, रणवीर दहिया, पप्पू गुर्जर, राजेंद्र चिकारा, हरेंद्र ढढरा, विनय मल्लापुर आदि मौजूद रहे।
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