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मेडिकल में लिक्विड ऑक्सीजन टैंक के लिए करें इंतजार
Updated Fri, 24 Nov 2017 02:18 AM IST
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मेरठ। मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन टैंक के लिए अभी और इंतजार करना होगा। यूपी सरकार ने मेडिकल कॉलेज में तैयार किए जा रहे लिक्विड ऑक्सीजन टैंक प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। अब नए सिरे से सरकार टेंडर जारी करेगी, जिसके बाद लिक्विड टैंक व्यवस्था शुरू हो पाएगी। इसके लिए अगले महीने दिसंबर में टेंडर निकाले जाने की तैयारी है।
मेडिकल अस्पताल में 80-90 ऑक्सीजन सिलेंडर रोजाना खर्च होते हैं। इन्हें बदलने के लिए मैन पावर की जरूरत पड़ती है। साथ ही ऑक्सीजन खत्म होने का खतरा भी बना रहता है। लिहाजा इस व्यवस्था को खत्म करने केलिए मेडिकल में करीब 10 टन का लिक्विड ऑक्सीजन टैंक लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया। इसके लिए टैंक भी लगवा दिए गए थे। मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. सुभाष दहिया ने बताया कि जो लिक्विड ऑक्सीजन टैंक लगे हुए हैं, उन्हें हटाया जाएगा। मेडिकल कॉलेज स्तर पर शुरू की गई पुरानी प्रक्रिया को यूपी सरकार ने निरस्त कर दिया है। नए सिरे से लिक्विड ऑक्सीजन के लिए जो व्यवस्था होगी, वह प्रदेश सरकार करेगी।
यह होगा फायदा
मेडिकल कॉलेज के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी ने बताया कि 10 टन के लिक्विड ऑक्सीजन टैंक का फायदा यह होगा कि ऑक्सीजन के लिए बार-बार सिलेंडर नहीं बदलने पड़ेंगे। 10 टन के इस लिक्विड टैंक के जरिए करीब 15 से 20 दिन की जरूरत पूरी हो जाएगी। इससे अचानक ऑक्सीजन खत्म होने का खतरा भी नहीं रहेगा। यह मरीजों के लिए भी काफी बेहतर रहेगा।
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खास बात
- हटाया जाएगा मेडिकल अस्पताल में तैयार किया जा रहा सेटअप
- उत्तर प्रदेश सरकार ने निरस्त किया पुराना प्रोजेक्ट
- अब दिसंबर में टेंडर निकाले जाने की संभावना
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मेडिकल अस्पताल में 80-90 ऑक्सीजन सिलेंडर रोजाना खर्च होते हैं। इन्हें बदलने के लिए मैन पावर की जरूरत पड़ती है। साथ ही ऑक्सीजन खत्म होने का खतरा भी बना रहता है। लिहाजा इस व्यवस्था को खत्म करने केलिए मेडिकल में करीब 10 टन का लिक्विड ऑक्सीजन टैंक लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया। इसके लिए टैंक भी लगवा दिए गए थे। मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. सुभाष दहिया ने बताया कि जो लिक्विड ऑक्सीजन टैंक लगे हुए हैं, उन्हें हटाया जाएगा। मेडिकल कॉलेज स्तर पर शुरू की गई पुरानी प्रक्रिया को यूपी सरकार ने निरस्त कर दिया है। नए सिरे से लिक्विड ऑक्सीजन के लिए जो व्यवस्था होगी, वह प्रदेश सरकार करेगी।
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यह होगा फायदा
मेडिकल कॉलेज के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी ने बताया कि 10 टन के लिक्विड ऑक्सीजन टैंक का फायदा यह होगा कि ऑक्सीजन के लिए बार-बार सिलेंडर नहीं बदलने पड़ेंगे। 10 टन के इस लिक्विड टैंक के जरिए करीब 15 से 20 दिन की जरूरत पूरी हो जाएगी। इससे अचानक ऑक्सीजन खत्म होने का खतरा भी नहीं रहेगा। यह मरीजों के लिए भी काफी बेहतर रहेगा।
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खास बात
- हटाया जाएगा मेडिकल अस्पताल में तैयार किया जा रहा सेटअप
- उत्तर प्रदेश सरकार ने निरस्त किया पुराना प्रोजेक्ट
- अब दिसंबर में टेंडर निकाले जाने की संभावना