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स्मार्ट सिटी के लिए राजस्व पर गंभीर हुआ नगर निगम
Updated Mon, 10 Jul 2017 03:03 AM IST
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- नगर निगम शहर के सभी भवनों की जीपीएस से कराएगा गणना
- सभी पर नियमानुसार हाउस टैक्स लगा तो निगम की आय होगी दोगुनी
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
स्मार्ट सिटी के लिए निगम की कम राजस्व वसूली अड़ंगा बनी हुई है। अब नगर निगम प्रशासन ने इसे बढ़ाने के लिए जीपीएस से शहर के भवनों की गणना कराने की कवायद शुरू कर दी है। भवनों की गिनती होने के बाद हाउस टैक्स वसूली कर राजस्व बढ़ाया जाएगा। इससे उन सभी भवन स्वामियों की जेब हल्की होगी जिन पर टैक्स ही नहीं लगा है।
नगर निगम की आय का सबसे बड़ा साधन हाउस टैक्स, पानी और सीवर टैक्स है। नगर निगम को हाल में तीनों टैक्स से प्रतिवर्ष लगभग 30 करोड़ की आय हो रही है। यदि मेरठ महानगर को स्मार्ट सिटी में शामिल कराना है तो इस आय को बढ़ाना होगा। जीपीएस ऐसे भवन भी सामने आएंगे जो बहुमंजिले हैं, लेकिन उन पर टैक्स एक या दो कमरों के बराबर ही लगा है। ऐसे सभी भवनों पर नई दरों से टैक्स लगाने की तैयारी है।
पहले भी कराया था जीपीएस से सर्वे
अब से पहले भी जीपीएस से भवनों की सर्वे कराया गया था, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही के कारण आज तक सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। इस कारण शहर में कम से कम 30 प्रतिशत भवन ऐसे हैं जिन पर हाउस टैक्स, सीवर और पानी का टैक्स लगा ही नहीं है। साथ ही 25 प्रतिशत भवन ऐसे भी हैं जिन पर मामूली हाउस टैक्स लगा है। काफी संख्या मेें भवन बहुमंजिले बने हैं। ऐसे भी भवन है जिन पर आवासीय हाउस टैक्स लगा है, लेकिन उपयोग कामर्शियल हो रहा है। निगम प्रशासन का मानना है कि यदि सभी भवनों पर नियमानुसार हाउस टैक्स लग जाए तो राजस्व वसूली कम से 60-70 करोड़ पहुंच जाएगी।
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राजस्व बढ़ेगा तो मिलेगा स्मार्ट सिटी
स्मार्ट सिटी योजना में शामिल होने के लिए नगर निगम का राजस्व बढ़ाया जाना जरूरी है। क्योंकि स्मार्ट सिटी की शर्तों के मुताबिक सरकार से मिलने वाली धनराशि के अलावा निगम के पास भी अपनी कुछ धनराशि होनी चाहिए। यदि नगर निगम के पास आय के साधन कम हैं तो उसको बढ़ाया जाना जरूरी है।
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वर्जन.....
नगर निगम की आय बढ़ाने के लिए कई बिंदुओं पर कार्य चल रहा है। जीपीएस से सभी भवनों की गणना होगी तो हाउस टैक्स बढ़ेगा। इसे लेकर पूरी तैयारी शुरू हो गई है। -मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त
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- सभी पर नियमानुसार हाउस टैक्स लगा तो निगम की आय होगी दोगुनी
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
स्मार्ट सिटी के लिए निगम की कम राजस्व वसूली अड़ंगा बनी हुई है। अब नगर निगम प्रशासन ने इसे बढ़ाने के लिए जीपीएस से शहर के भवनों की गणना कराने की कवायद शुरू कर दी है। भवनों की गिनती होने के बाद हाउस टैक्स वसूली कर राजस्व बढ़ाया जाएगा। इससे उन सभी भवन स्वामियों की जेब हल्की होगी जिन पर टैक्स ही नहीं लगा है।
नगर निगम की आय का सबसे बड़ा साधन हाउस टैक्स, पानी और सीवर टैक्स है। नगर निगम को हाल में तीनों टैक्स से प्रतिवर्ष लगभग 30 करोड़ की आय हो रही है। यदि मेरठ महानगर को स्मार्ट सिटी में शामिल कराना है तो इस आय को बढ़ाना होगा। जीपीएस ऐसे भवन भी सामने आएंगे जो बहुमंजिले हैं, लेकिन उन पर टैक्स एक या दो कमरों के बराबर ही लगा है। ऐसे सभी भवनों पर नई दरों से टैक्स लगाने की तैयारी है।
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पहले भी कराया था जीपीएस से सर्वे
अब से पहले भी जीपीएस से भवनों की सर्वे कराया गया था, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही के कारण आज तक सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। इस कारण शहर में कम से कम 30 प्रतिशत भवन ऐसे हैं जिन पर हाउस टैक्स, सीवर और पानी का टैक्स लगा ही नहीं है। साथ ही 25 प्रतिशत भवन ऐसे भी हैं जिन पर मामूली हाउस टैक्स लगा है। काफी संख्या मेें भवन बहुमंजिले बने हैं। ऐसे भी भवन है जिन पर आवासीय हाउस टैक्स लगा है, लेकिन उपयोग कामर्शियल हो रहा है। निगम प्रशासन का मानना है कि यदि सभी भवनों पर नियमानुसार हाउस टैक्स लग जाए तो राजस्व वसूली कम से 60-70 करोड़ पहुंच जाएगी।
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राजस्व बढ़ेगा तो मिलेगा स्मार्ट सिटी
स्मार्ट सिटी योजना में शामिल होने के लिए नगर निगम का राजस्व बढ़ाया जाना जरूरी है। क्योंकि स्मार्ट सिटी की शर्तों के मुताबिक सरकार से मिलने वाली धनराशि के अलावा निगम के पास भी अपनी कुछ धनराशि होनी चाहिए। यदि नगर निगम के पास आय के साधन कम हैं तो उसको बढ़ाया जाना जरूरी है।
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वर्जन.....
नगर निगम की आय बढ़ाने के लिए कई बिंदुओं पर कार्य चल रहा है। जीपीएस से सभी भवनों की गणना होगी तो हाउस टैक्स बढ़ेगा। इसे लेकर पूरी तैयारी शुरू हो गई है। -मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त